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♨️ *आज का प्रेरक प्रसंग* ♨️
*!! हमेशा अच्छा करो !!*
एक छोटे से गाँव में एक महिला अपने परिवार के साथ रहती थी। वह बहुत सरल और दयालु स्वभाव की थी। रोज़ घर के सभी सदस्यों के लिए भोजन बनाते समय वह एक रोटी अलग से निकाल लेती और उसे घर की खिड़की के पास रख देती। उसका मानना था कि पता नहीं कब, किस भूखे इंसान को इसकी जरूरत पड़ जाए।
उस रोटी को प्रतिदिन एक गरीब और कुबड़ा व्यक्ति लेने आता था। वह रोटी उठाता और बिना धन्यवाद दिए आगे बढ़ जाता। जाते-जाते वह हमेशा एक ही बात बड़बड़ाता—
*"जो तुम बुरा करोगे, वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे, वह तुम्हारे पास लौटकर आएगा।"*
महिला कई दिनों तक उसकी बात सुनती रही। धीरे-धीरे उसे यह बात खटकने लगी कि वह रोज़ रोटी तो ले जाता है, लेकिन धन्यवाद के दो शब्द भी नहीं कहता।
एक दिन उसका मन इतना खिन्न हुआ कि उसके भीतर क्रोध पैदा हो गया। उसने सोचा, "मैं रोज़ इसके लिए रोटी बनाती हूँ और यह व्यक्ति मुझे धन्यवाद देने के बजाय रोज़ वही बात दोहराकर चला जाता है।"
क्रोध में आकर उसने उस दिन रोटी में विष मिला दिया। लेकिन जैसे ही वह रोटी खिड़की पर रखने लगी, उसके हाथ अचानक काँपने लगे। उसका अंतर्मन जैसे उसे रोक रहा था।
वह कुछ क्षण रोटी को देखती रही और फिर बोली—
*"हे भगवान! मैं यह क्या करने जा रही थी?"*
उसने तुरंत वह रोटी चूल्हे की आग में डाल दी और नष्ट कर दी। फिर उसने अपने मन को शांत किया, नई रोटी बनाई और हमेशा की तरह खिड़की पर रख दी।
कुछ देर बाद वह कुबड़ा आया। उसने रोटी उठाई और वही बात दोहराते हुए आगे बढ़ गया—
*"जो तुम बुरा करोगे, वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे, वह तुम तक लौटकर आएगा।"*
महिला चुपचाप उसे देखती रही।
उस महिला का एक बेटा था, जो बेहतर भविष्य की तलाश में कई महीनों पहले घर से बाहर गया था। काफी समय से उसकी कोई खबर नहीं थी। माँ रोज़ उसके सुरक्षित लौटने की प्रार्थना करती थी और खिड़की पर रोटी रखते समय भी उसके लिए भगवान से दुआ करती थी।
उसी दिन शाम को अचानक उसके दरवाजे पर दस्तक हुई।
दरवाजा खुला तो सामने उसका बेटा खड़ा था।
वह बहुत कमजोर हो चुका था। कपड़े मैले थे और चेहरे पर थकान साफ दिखाई दे रही थी। माँ ने उसे देखते ही गले लगा लिया। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
बेटे ने कहा, "माँ, आज अगर एक व्यक्ति मेरी मदद न करता तो शायद मैं तुम्हारे सामने खड़ा नहीं होता।"
माँ ने घबराकर पूछा, "क्या हुआ था?"
बेटे ने बताया, "मैं कई दिनों से परेशान था। आज घर से कुछ दूर मुझे इतनी भूख लगी कि मेरे कदम जवाब देने लगे। मैं सड़क किनारे बैठ गया। तभी वही एक गरीब और कुबड़ा व्यक्ति वहाँ से गुजरा। उसने मुझे देखा तो मेरे पास आया। मैंने उससे खाने के लिए कुछ माँगा। उसके पास सिर्फ एक रोटी थी। उसने बिना सोचे वह रोटी मुझे दे दी और कहा—'मैं रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज इसकी जरूरत तुमको मुझसे ज्यादा है।'"
यह सुनते ही माँ के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसे सुबह की वह रोटी याद आ गई—वही रोटी जिसमें उसने क्रोध में विष मिला दिया था।
अगर उसने अपने क्रोध पर नियंत्रण न किया होता और वह रोटी जला न दी होती, तो वही रोटी उस कुबड़े व्यक्ति के हाथों उसके बेटे तक पहुँच सकती थी।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसे पहली बार उस गरीब व्यक्ति के उन शब्दों का वास्तविक अर्थ समझ आया—
*"जो तुम बुरा करोगे, वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे, वह तुम तक लौटकर आएगा।"*
उस दिन उस महिला ने समझ लिया कि भलाई का फल हमेशा उसी रूप में और उसी समय वापस नहीं आता, लेकिन अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते।
उसने मन ही मन संकल्प लिया कि अब वह किसी के व्यवहार से अपनी अच्छाई नहीं बदलेगी।
*📌 शिक्षा:-*
हमेशा अच्छा करते रहिए, भले ही सामने वाला आपकी अच्छाई को समझे या उसका धन्यवाद न करे। किसी के व्यवहार के कारण अपने अच्छे संस्कार मत छोड़िए। क्योंकि हम नहीं जानते कि हमारा एक छोटा-सा अच्छा काम कब, किस रूप में और किसके जीवन में उम्मीद की किरण बन जाए।
*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
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