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@n488
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2 महीने पहले
बेटियों पर तो बहुत कविताएं सुनी है, लेकिन एक सास द्वारा रचित अपनी बहू पर यह कविता बहुत ही प्यारी व निराली हैं...!! #___मेरी #___बेटी...!! एक बेटी मेरे घर में भी आई है, सिर के पीछे उछाले गये चावलों को, माँ के आँचल में छोड़कर...!!🙏 पाँव के अँगूठे से चावल का कलश लुढ़का कर, महावर रचे पैरों से, महालक्ष्मी का रूप लिए, बहु का नाम धरा लाई है...!! 🙏 #एक_बेटी_मेरे_घर #में_भी_आई_है...!! माँ ने सजा धजाकर बड़े अरमानों से, दामाद के साथ गठजोड़े में बांध विदा किया, उसी गठजोड़े में मेरे बेटे के साथ बंधी, आँखो में सपनो का संसार लिए सजल नयन आई है...!! 🙏 #एक_बेटी_मेरे_घर_में_भी_आई_है...!! किताबो की अलमारी अपने भीतर संजोये, गुड्डे गुड़ियों का संसार छोड़ कर, जीवन का नया अध्याय पढ़ने और जीने, माँ की गृहस्थी छोड़ अपनी नई बनाने, बेटी से माँ का रूप धरने आयी है...!! 🙏 माँ के घर मे उसकी हँसी गूँजती होगी, दीवारो में लगी तस्वीरो में, माँ उसका चेहरा पढ़ती होगी, यँहा उसकी चूड़ियाँ बजती है, घर के आँगन में उसने रंगोली सजाई है, #एक_बेटी_मेरे_घर_में_भी_आई_है...!! शायद उसने माँ के घर की रसोई नही देखी, यँहा रसोई में खड़ी वो डरी-डरी सी घबराई है, मुझसे पूछ पूछ कर खाना बनाती है, मेरे बेटे को मनुहार से खिलाकर प्रंशसा सुन खिलखिलाई है...!! 🙏 #एक_बेटी_मेरे_घर_में_भी_आई_है...!! अपनी ननद की चीज़ें देखकर, उसे अपनी सभी बातें याद आई हैं, सँभालती है, करीने से रखती है, जैसे अपना बचपन दोबारा जीती है, बरबस ही आँखे छलछला आई है...!! 🙏 #एक_बेटी_मेरे_घर_में_भी_आई_है...!! मुझे बेटी की याद आने पर" मै हूँ ना... कहकर तसल्ली देती है, उसे फ़ोन करके मिलने आने को कहती है, अपने मायके से फ़ोन आने पर आँखे चमक उठती है...!! 🙏 #एक_बेटी_मेरे_घर_में_भी_आई_है...!! उसके लिए भी आसान नही था, पिता का आँगन छोड़ना, पर मेरे बेटे के, साथ अपने सपने सजाने आई है, मै खुश हूँ, एक एक बेरी जाकर अपना घर बसा रही, एक यहाँ अपना संसार बसाने आई है...!! 🙏 #एक_बेटी_मेरे_घर_में_भी_आई_है...!! जय माता दी @everyonerishte #अनमोल रिश्ते 🙏🙏 #fbviralpost2025シ #emotional #feelkroreelkro #MustWatch #vairalpost
Ñ/Ň
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4 महीने पहले
बेटों से बढ़िया हैं बेटी, अम्मा! ये तुम कहना छोड़ो। बात तुम्हारी कलह की लगती मुझको एक बहाना। भईया को बेमतलब ही तुम मार रही हो ताना। जब तक सांस चलेगी तुमको साथ उन्हीं के रहना। अपने घर की बातें छोड़ो, घर के बाहर कहना। अपने आंसू से तुम मुझको बार बार यूँ छलना छोड़ो। बेटों से बढ़िया हैं बेटी, अम्मा! ये तुम कहना छोड़ो। मान रही हूँ कुछ बातें भाभी की बुरी लगेंगी। और साथ यदि भईया देंगे तुमको बहुत खलेंगी। पर मत भूलो तुम भी इक दिन दुल्हन थी बन आई। कितने धूप छाँव को सह कर अपनी जगह बनाई। वैसे ही भाभी की राहों में तुम बढ़ कर अड़ना छोड़ो। बेटों से बढ़िया हैं बेटी अम्मा! ये तुम कहना छोड़ो। किसी की बेटी बहू किसी की, बेटा बने जमाई। रिश्तों की मर्यादा रख ही मिटती मन की खाई। मुझको भी तब बुरा लगे जब सास ननद से कहतीं। सौ सौ कमियां गिना गिना कर साथ मेरे ही रहतीं। तुमभी अपनों की कमियों को मेरे आगे रखना छोड़ो। बेटों से बढ़िया हैं बेटी, अम्मा! ये तुम कहना छोड़ो। धीरे धीरे भाभी को तुम दो अधिकार तुम्हारे। और कहो भईया से हम दोनों के तुम्हीं सहारे। दादी की जो बात बुरी थी, उसको तुम मत बोलो। और मायके पर उनके तुम कभी नहीं मुँह खोलो। उम्र ढ़ले उस से पहले ही अम्मा!तुम तो तपना छोड़ो। बेटो से बढ़िया हैं बेटी, अम्मा! ये तुम कहना छोड़ो। [विवाहित बेटी का अपनी माँ से बातचीत] ❤️💗 #👩‍🍼माँ बेटी का प्यार 👩‍👦
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