एक समय की बात है…
राजा दक्ष प्रजापति ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया।
लेकिन अहंकार इतना बढ़ चुका था कि उन्होंने अपने ही दामाद भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया।
माता सती ने जब यह सुना, तो उनका हृदय व्यथित हो उठा।
पति का अपमान… वो भी अपने पिता के द्वारा…
सती बिना बुलावे ही यज्ञ में पहुँचीं।
वहाँ उन्होंने देखा – हर देवता का सम्मान हो रहा था, पर शिव का अपमान…
अपमान सहन न कर सकीं।
कंपती हुई आवाज़ में बोलीं –
"जहाँ मेरे प्रभु का सम्मान नहीं, वहाँ मेरा अस्तित्व भी व्यर्थ है…"
और उसी यज्ञ अग्नि में उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया… 🔥
जब यह समाचार शिव तक पहुँचा…
तो उनका क्रोध भयंकर रूप ले बैठा।
उन्होंने जटा से वीरभद्र को उत्पन्न किया और यज्ञ का विध्वंस कर दिया।
शिव ने सती के शरीर को उठाया और तांडव करने लगे।
ब्रह्मांड काँप उठा… 🌍⚡
तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए।
जहाँ-जहाँ वे अंग गिरे, वहाँ बने पवित्र शक्ति पीठ।
और यही सती पुनर्जन्म लेकर माता पार्वती बनीं —
ताकि शिव और शक्ति का मिलन फिर से हो सके… ❤️
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