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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 05 फरवरी 2026* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - फाल्गुन* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - चतुर्थी रात्रि 12:22 फरवरी 06 तक तत्पश्चात् पंचमी* *⛅नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी रात्रि 10:57 तक तत्पश्चात् हस्त* *⛅योग - सुकर्मा रात्रि 12:04 फरवरी 06 तक तत्पश्चात् धृति* *⛅राहुकाल - दोपहर 02:05 से दोपहर 03:28 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:05* *⛅सूर्यास्त - 06:17 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:23 से प्रातः 06:14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:19 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 06 से रात्रि 01:06 फरवरी 06 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी* *🌥️विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏 राधा रानी #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स *🔹गुरुवार विशेष 🔹* *🔸हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।* *🔸गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :* *🔸एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।* *ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।* *🌹 फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।* *🔸गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है ।* *🔸गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।*
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 04 फरवरी 2026* *⛅दिन - बुधवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - फाल्गुन* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - तृतीया रात्रि 12:09 फरवरी 05 तक तत्पश्चात् चतुर्थी* *⛅नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी रात्रि 10:12 तक तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी* *⛅योग - अतिगण्ड रात्रि 01:05 फरवरी 05 तक तत्पश्चात् सुकर्मा* *⛅राहुकाल - दोपहर 12:41 से दोपहर 02:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:06* *⛅सूर्यास्त - 06:16 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:23 से प्रातः 06:14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 05 से रात्रि 01:06 फरवरी 05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹कठोर या चंचल स्वभाव बदलने की कुंजी🔹* *🔸स्वभाव कठोर है तो कमल का ध्यान करें, स्वभाव कोमल हो जायेगा । चंचल स्वभाव है तो ऐसा चिंतन करें कि “मैं शांत आत्मा हूँ, चिद्घन आत्मा हूँ, चैतन्य आत्मा हूँ... चंचलता मन में है, उसको जाननेवाला, चल मन को जाननेवाला अचल मेरा आत्मा-परमात्मा है । ॐ ॐ ॐ....” थोड़े दिन में स्वभाव ठीक हो जायेगा ।* *🔹लक्ष्मीप्राप्ति व घर में सुख-शांति हेतु🔹* *🔸तुलसी-गमले की प्रतिदिन एक प्रदक्षिणा करने से लक्ष्मीप्राप्ति में सहायता मिलती है ।* *🔸तुलसी के थोड़े पत्ते पानी में डाल के उसे सामने रखकर भगवद्गीता का पाठ करे । फिर घर के सभी लोग मिल के भगवन्नाम - कीर्तन करके हास्य - प्रयोग करे और वह पवित्र जल सब लोग ग्रहण करे । यह प्रयोग करने से घर के झगड़े मिटते है, शराबी की शराब छुटती है और घर में सुख शांति का वास होता है ।* *🔹ह्रदय के लिए हितकर पेय🔹* *रात को भिगोये हुए ४ बादाम सुबह छिलका उतारकर १० तुलसी पत्तों और ४ काली मिर्च के साथ अच्छी तरह पीस लें । फिर आधा कप पानी में इनका घोल बना के पीने से विभिन्न प्रकार के ह्रदयरोगों में लाभ होता है । इससे मस्तिष्क को पोषण मिलता है एवं रक्त की वृद्धि भी होती हैं ।* #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
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जानें कब है माता यशोदा जन्मोत्सव | यशोदा जयंती 2026, पूजा विधि, मंत्र, महत्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए व्रत करती हैं और उनके सुख की मंगलकामनाएं करती हैं इस दिन संतान सुख से वंचित लोग यदि माता यशोदा का व्रत रखकर विधिपूर्वक पूजन करते हैं, तो उन्हें संतान सुख प्राप्त होता है। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #YashodaJayanti2026 https://www.radheradheje.com/yashoda-jayanti-2026-puja-vidhi-mantra-mahatva/
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 03 फरवरी 2026* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - फाल्गुन* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वितीया रात्रि 12:40 फरवरी 04 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - मघा रात्रि 10:10 तक तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी* *⛅योग - शोभन रात्रि 02:39 फरवरी 04 तक तत्पश्चात् अतिगण्ड* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:28 से शाम 04:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:06* *⛅सूर्यास्त - 06:16 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:23 से प्रातः 06:15 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:19 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 04 से रात्रि 01:06 फरवरी 04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹शात्रों में वर्णित गौ-महिमा🔹* *🔸जो प्रतिदिन स्नान करके गौ का स्पर्श करता है, वह मनुष्य सब प्रकार के स्थूल पापों से भी मुक्त हो जाता है । जो गौओं के खुर से उडी हुई धूल को सिर पर धारण करता है, वह मानो तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है । (पद्म पुराण, सृष्टि खंड, अध्याय:५७)* *🔸गौ का स्पर्श करने, सात्त्विक-सदाचारी ब्राह्मण को नमस्कार करने और सद्गुरु, देवता का भलीभाँति पूजन करने से गृहस्थ सारे पापों से छुट जाते हैं । (स्कंद पुराण, प्रभास खंड)* *🔸गंडस्पर्श कर लेने मात्र से ही गौएँ मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट कर देती हैं और आदरपूर्वक सेवन किये जाने पर अपार सम्पत्ति प्रदान करती हैं । वे ही गायें दान दिये जाने पर सीधे स्वर्ग ले जाती हैं । ऐसी गौओं के समान और कोई भी धन नहीं हैं । (बृहत्पराशर स्मृति)* *🔸जो प्यास से व्याकुल हुई गौओं को पानी पीने से विघ्न डालता है, उसे ब्रह्मघाती समझना चाहिए । (महाभारत, अनुशासन पर्व : २४.७ )* *🔸जो एक वर्ष तक प्रतिदिन स्वयं भोजन के पहले दुसरे की गाय को एक मुट्ठी घास खिलाता है, उसका वह व्रत समस्त कामनाओं को पूर्ण करनेवाला होता है । (महाभारत, अनुशासन पर्व : ६९.१२)* *🔸प्रतिपदा का चन्द्र-दर्शन केवल गाय ही कर पाती है । यमदूतों व प्रेतत्माओं को देख लेने में गाय सक्षम है । उनके दिखने पर वह विशिष्ट प्रकार की आवाज निकालने लगती है । गाय रँभाने की तरंगे जहाँ तक पहुँचती हैं वहाँ तक आसुरी शक्तियों का प्रभाव नष्ट हो जाता है ।* #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
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फाल्गुन मास महात्मय 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ फाल्गुन का महीना हिन्दू पंचांग का अंतिम महीना है. इस महीने की पूर्णिमा को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नाम फाल्गुन है. इस महीने को आनंद और उल्लास का महीना कहा जाता है. इस महीने से धीरे धीरे गरमी की शुरुआत होती है , और सर्दी कम होने लगती है। फाल्गुन माह को फागुन माह भी कहा जाता है. इस माह का आगमन ही हर दिशा में रंगों को बिखेरता सा प्रतीत होता है. मौसम में मन को भा लेने वाला जादू सा छाया होता है. इस माह के दौरान प्रकृति में अनूपम छटा बिखरी होती है. इस मौसम में चंद्रमा के जन्म से संबंधित पौराणिक आख्यान भी मौजूद हैं, इसी कारण इस माह में चंद्रमा और श्री कृष्ण की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में बाल कृष्ण, युवा कृष्ण और गुरु कृष्ण तीनों ही स्वरूपों की उपासना की जा सकती है संतान के लिए बाल कृष्ण की पूजा करें। प्रेम और आनंद के लिए युवा कृष्ण की उपासना करें। ज्ञान और वैराग्य के लिए गुरु कृष्ण की उपासना करें। इस माह के दौरान भगवान शिव, भगवान विष्णु एवं चंद्र देव की पूजा का महत्व बताया गया है. फाल्गुन माह के दौरान देवी लक्ष्मी और माता सीता की पूजा का विधान भी रहा है. फाल्गुन माह आखिरी महीना होता है, इस माह के दौरान प्रकृति का एक अलग रुप दृष्टि में आता है. इसी समय पर भक्ति के साथ शक्ति की आराधना भी होती है. फाल्गुन माह भी अन्य माह की भांति ही ज्योतिष, धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व रखता है। फाल्गुन माह में जन्मे जातक 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ फाल्गुन माह में जन्म लेने वाला व्यक्ति गौरे रंग का होता है. दिखने में आकर्षक लगता है. बोल चाल में अधिक कुशल होता है. जातक का मन चंचल हो सकता है. बहुत अधिक चीजों को लेकर गंभीर न रह पाए. वह परोपकार के कार्यो में रुचि लेता है, तथा अपनी विद्वता से वह धन कमाने में सफल रहता है। जातक द्वारा किए गये कार्यो में बुद्धिमानी का भाव पाया जाता है. प्रेम संबंधों के प्रति रुझान भी रखता है. वह जीवन में सभी भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करने में सफल रहता है. इसके अतिरिक्त उसे विदेश में भ्रमण के अवसर प्राप्त होते है. अपने प्रेमी के प्रति भावनात्मक झुकाव भी बहुत अधिक रखता है। फाल्गुन मास मात्र इसलिए नहीं जाना जाता क्योकिं इस माह में होली का पर्व आता है. बल्कि इस माह का धार्मिक महत्व भी है. यह माह पतझड के बाद जीवन की एक नई शुरुआत का माह है. जिस प्रकार रात के बाद सुबह अवश्य आती है. उसी प्रकार व्यक्ति जीवन की बाधाओं को पार करने के बाद उन्नति की एक नई शुरुआत करता है. फागुन मास के दौरान बहुत से पर्व मनाए जाते हैं जिसमें से मुख्य होली, शिवरात्रि, फाल्गुन पूर्णिमा और एकादशी नामक उत्सव मनाए जाते हैं। इस माह में आने वाली एकादशी विजया एकादशी कहलाती है। इस समय के दोरान होलाष्टक लग जाता है. यह आठ दिनों का समय होता है जिसमें सभी शुभ काम रुक से जाते हैं इस समय पर विवाह इत्यादि कार्य नहीं होते हैं। होली का आगमन प्रकृति से संबंधित होता है. होली रंगों का त्यौहार है जिसमें जीवन के भी सभी रंग मिल कर एक हो जाते हैं। फाल्गुन माह की चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का पौराणिक मान्यता अनुसार इसी दिन से सृष्टि का प्रारंभ भी माना गया है. इस शुभ दिन में महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. वर्षभर में आने वाली 12 शिवरात्रियों में से फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के नाम से भी पुकारा जाता है और यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। फाल्गुन मास की कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सतयुग की बात है तब एक धर्मात्मा राजा का राज्य था। वह राजा बड़ा धर्मात्मा था। उसके राज्य में एक ब्राह्यण था। उसका नाम था। विष्णु शर्मा। विष्णु शर्मा के सात पुत्र थे। वे सातों अलग-अलग रहते थे। विष्णु शर्मा की जब वृद्धावस्था आ गयी, तो उसने सब बहूओं से कहा कि तुम सब गणेश का व्र्रत करो। विष्णु शर्मा स्वयं भी इस व्रत को करता था। अब बूढा हो जाने पर ये दायित्व वह बहूओं को सौंपना चाहता था। जब उसने बहुओं से इस व्रत के लिए कहा, तो बहूओं को सौंपना चाहता था। जब उसने बहूओं से इस व्रत के लिए कहा, तो बहूओं नाक सिकोड़ते हुए उसकी आज्ञा न मानकर उसका अपमान कर दिया। अंत में छोटी बहू ने अपने ससुर की बात मान ली। उसने पूजा का सामान की व्यवस्था करके ससुर के साथ व्रत किया और भोजन नहीं किया। ससुर को भोजन कर दिया। जब आधी रात बीती, तो विष्णु शर्मा को उल्टी और दस्त लग गये। छोटी बहू ने मल-मूत्र से गन्दे हुए कपड़ो को साफ करके ससुर के शरीर को धोया और पोंछा। पूरी रात बिना कुछ खाये-पिये जागती रही। गणेशजी ने उन दोनों पर अपनी कृपा की। ससुर को स्वास्थ्य ठीक हो गया और छोटी बहू का घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। फिर तो अन्य बहूंओ को भी इस घटना से प्ररेणा मिली और उन्होंने भी गणेशजी का व्रत किया जो भी व्यक्ति गणेश जी का व्रत सच्चे मन से करता है भगवान गणेश उसकी सभी मनो कामनाएं पूरी करते है । फाल्गुन मास की महत्वपूर्ण बातें 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ फाल्गुन मास के दौरान व्यक्ति अपने आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सामान्य एवं संतुलित आहार करना ही उत्तम होता है। इस मौसम में पानी को गरम करके स्नान नहीं करना चाहिए. शीतल जल से ही स्नान करना उत्तम होता है. संभव हो सके तो गंगा स्नान का लाभ अवश्य उठाएं। भोजन में अनाज का प्रयोग कम से कम करें , अधिक से अधिक फल खाएं। अपनी साफ सफाई और रहन सहन को लेकर भी सौम्यता और शालीनता बरतनी चाहिए। इस माह के दौरान तामसिक एवं गरिष्ठ भोजन अर्थात मांस मंदिरा और तले-भुने भोजन को त्यागना चाहिए। इस माह के दौरान भगवान कृष्ण का पूजन करते समय फूल एवं फूलों का उपयोग अधिक करना चाहिए। 👉 भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने चाहिए। 👉 फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन देवताओं को अबीर और गुलाल अर्पित करने चाहिए। 👉 आर्थिक एवं दांपत्य सुख समृद्धि के लिए माता पार्वती एवं देवी लक्ष्मी की उपासना में कुमकुम एवं सुगंधित वस्तुओं का उपयोग करना शुभ होता है। फाल्गुन महीने में क्या विशेष प्रयोग करें? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 👉 अगर क्रोध या चिड़चिड़ाहट की समस्या है तो श्रीकृष्ण को पूरे महीने नियमित रूप से अबीर गुलाल अर्पित करें। 👉 अगर मानसिक अवसाद की समस्या है तो सुगन्धित जल से स्नान करें और चन्दन की सुगंध का प्रयोग करें। 👉 अगर स्वास्थ्य की समस्या है तो शिव जी को पूरे महीने सफ़ेद चंदन अर्पित करें। 👉 अगर आर्थिक समस्या है तो पूरे महीने माँ लक्ष्मी को गुलाब का इत्र या गुलाब अर्पित करें। फाल्गुन मास के व्रत-पर्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 02 फरवरी (सोमवार)👉 फाल्गुन कृष्ण पक्ष आरम्भ, बृज महोत्सव आरम्भ। 04 फरवरी (बुधवार) 👉 मोढेश्वरी माता प्राकट्य (गुजरात)। 05 फरवरी (गुरुवार)👉 संकष्ट द्विज प्रिय चतुर्थी, सिद्धि विनायक प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त (मुम्बई)। 08 फरवरी (रविवार)👉 श्रीनाथजी पाटोत्सव (नाथद्वारा), शबरी जयन्ती। 09 फरवरी (सोमवार) 👉 सीताष्टमी (माँ जानकी जन्मोत्सव), कालाष्टमी, अष्टका श्राद्ध। 11 फरवरी (बुधवार) 👉 समर्थ रामदास नवमी। 12 फरवरी (गुरुवार)👉 संक्रान्ति सूर्य कुम्भ में, स्वामी दयानन्द सरस्वती जयन्ती। 13 फरवरी (शुक्रवार) 👉विजया एकादशी व्रत (सबका), संक्रान्ति पुण्यकाल (सूर्योदय से 12:51 तक)। 14 फरवरी (शनिवार) 👉 शनि प्रदोष व्रत। 15 फरवरी (रविवार) 👉 महाशिवरात्रि (रात्रि चार प्रहर पूजन अभिषेक) निशीथकाल 24:15 से 25:06 तक। 16 फरवरी (सोमवार) 👉 स्वामी दयानन्द बोधोत्सव, वासुपूज्य जन्म (जैन)। 17 फरवरी (मंगलवार) 👉 देव-पितृ कार्य हेतु, भौमवती अमावस्या, शिव खप्पर पूजा, पंचक आरम्भ 09:05 से कंकणाकृति सूर्य ग्रहण (भारत में नहीं)। 18 फ़रवरी (बुधवार) 👉 चन्द्रदर्शन, वसन्त ऋतु आरम्भ' फाल्गुन शुक्ल पक्ष आरम्भ। 19 फ़रवरी (गुरुवार) 👉 फुलेरा दूज' रामकृष्ण परमहंस जयन्ती, छत्रपती शिवाजी जयन्ती (तौरीख-प्रमाण), मेला खाटू श्याम जी आरम्भ। 20 फ़रवरी (शुक्रवार)👉 राष्ट्रीय फाल्गुन मास आरम्भ। 21 फ़रवरी (शनिवार) 👉 विनायक चतुर्थी, पंचक समाप्त 19:07 पर, मनोरथ चतुर्थी। 22 फ़रवरी (रविवार)👉 याज्ञवल्क्य जयन्ती। 24 फरवरी (मंगलवार) 👉 होलाष्टक आरम्भ 07:02 से, दुर्गाष्टमी, अन्नपूर्णा अष्टमी, श्री दादूदयाल जयन्ती। 25 फरवरी (बुधवार) 👉 लट्ठमार होली (बरसाना), आनन्दा नवमी)। 26 फरवरी (गुरुवार) 👉 नन्द गांव होली आरम्भ, फागुदशमी (उड़ीसा)। 27 फरवरी (शुक्रवार) 👉 आमलकी एकादशी व्रत (सबका)' रंगभरी ग्यारस, मेला खाटू श्याम जी समाप्त,। 28 फरवरी (शनिवार) 👉 नृसिंह द्वादशी, गोविन्द द्वादशी, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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