*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 06 मार्च 2026*
*⛅दिन - शुक्रवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - चैत्र*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - तृतीया शाम 05:53 तक तत्पश्चात् चतुर्थी*
*⛅नक्षत्र - हस्त सुबह 09:29 तक तत्पश्चात् चित्रा*
*⛅योग - गण्ड प्रातः 07:06 तक तत्पश्चात् वृद्धि*
*⛅राहुकाल - सुबह 11:10 से दोपहर 12:38 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:44*
*⛅सूर्यास्त - 06:32 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:07 से प्रातः 05:56 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:15 से दोपहर 01:02 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:13 से मध्यरात्रि 01:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी*
*🌥️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹सीजेरियन ऑपरेशन से कैसे बचें ?🔹*
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स#🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय#✡️ज्योतिष समाधान 🌟
*🔸किसी को सिजेरियन करवाने की नौबत आ गयी हो और डॉक्टरों ने बोला हो प्रसूति ऐसे नहीं हो सकती, तो 10 ग्राम गोबर का रस लेके ॐ जम्भला, जम्भला, जम्भला... इस मंत्र का जप करके पिला दो तो सामान्य प्रसूति होगी, कोई माइनर या मेजर ऑपरेशन कराने की जरूरत नहीं ।*
*🔸 एक नींबू और तुलसी के ३० पत्तों का रस निकाल के एक गिलास पानी के साथ कभी-कभी पियो तो तबीयत बढ़िया रहेगी । नींबू और तुलसी रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाते हैं । (रविवार को यह प्रयोग न करें ।)*
*🔸जिनका शरीर मोटा है अथवा पेट छाती से बाहर है उनको २५ मि.ली. ताजा गोमूत्र (७ बार व पड़छन करके) या संजीवनी रस ,अथवा गोमूत्र अर्क थोड़ा-सा पानी मिलाकर उपयोग करना चाहिए । इससे पेट की खराबियाँ गायब हो जायेंगी । कफ जम जाने से साँस लेने में तकलीफ हो तो भी यह फायदा करेगा, मधुमेह (diabetes) में भी चमत्कारिक लाभ होगा, और भी न जाने कितनी सारी बीमारियों से पीड़ित लोगों को नयी तंदुरुस्ती प्रदान की है संजीवनी रस और गोमूत्र अर्क ने ।*
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 05 मार्च 2026*
*⛅दिन - गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - चैत्र*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - द्वितीया शाम 05:03 तक तत्पश्चात् तृतीया*
*⛅नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी सुबह 08:17 तक तत्पश्चात् हस्त*
*⛅योग - शूल प्रातः 07:46 तक तत्पश्चात् गण्ड*
*⛅राहुकाल - दोपहर 02:07 से दोपहर 03:35 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:45*
*⛅सूर्यास्त - 06:32 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:07 से प्रातः 05:56 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:15 से दोपहर 01:02 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:14 से मध्यरात्रि 01:06 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - तुकारामजी द्वितीया*
*🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹तीर्थ में पालने योग्य १२ नियम🔹*
*अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च।*
*लक्षं प्रदक्षिणा भूमेः कुम्भस्नानेन तत्फलम् ।।*
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*🔸'हजारों अश्वमेध यज्ञ, सैकड़ों वाजपेय यज्ञ और लाखों बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो फल होता है, वही फल एक बार कुम्भ-स्नान करने से प्राप्त हो जाता है।'*
*🔸तीर्थ में ये बारह नियम अगर कोई पालता है तो उसे तीर्थ का पूरा फायदा होता है:*
*🔸 (१) हाथों का संयम : गंगा में गोता भी मारा और अनधिकार किसीकी वस्तु ले ली या ऐसी-वैसी कोई चीज उठाकर मुँह में डाल ली तो पुण्यप्राप्ति का आनंद नहीं होगा ।*
*🔸 (२) पैरों का संयम: कहीं भी चले गये मौज-मजा मारने के लिए... नहीं, अनुचित जगह पर न जायें ।*
*🔸 (३) मन को दूषित विचारों व चिंतन से बचाकर भगवच्चिंतन करना ।*
*🔸 (४) सत्संग व वेदांत शास्त्र का आश्रय लेना : ऐसा नहीं कि शरीर में बुखार है और दे मारा गोता । पुण्यलाभ करें और फिर हो गया बुखार या न्यूमोनिया और आदमी मर गया, ऐसा नहीं करना चाहिए । देश,काल और शरीर की अवस्था देखनी चाहिए ।*
*🔸 (५) तपस्या।*
*🔸 (६) भगवान की कीर्ति, भगवान के गुणों का गान कुम्भ-स्थान पर करना चाहिए ।*
*🔸 (७) परिग्रह का त्याग : कोई कुछ चीज दे तो तीर्थ में दान नहीं लेना चाहिए । तीर्थ में दूसरों की सुविधाओं का उपयोग करके अपने ऊपर बोझा न चढ़ायें । दान का खाना, अशुद्ध खाना, प्रसाद में धोखेबाजी करके बार-बार लेना... अशुद्ध व्यवहार पुण्य क्षीण और हृदय को मलिन करता है । एक तरफ पुण्य कमा रहे हैं, दूसरी तरफ बोझा चढ़ा रहे हैं । यह न करें ।*
*🔸 (८) जैसी भी परिस्थिति हो, आत्मसंतोष होना चाहिए । हाय रे ! धक्का धक्की है, बस नहीं मिली... ऐसा करके चित्त नहीं बिगाड़ना । 'हरे-हरे ! वाह ! यार की मौज ! तेरी मर्जी पूरण हो !' - इस प्रकार अपने चित्त को संतुष्ट रखें ।*
*🔸 (९) किसी प्रकार के अहंकार को न पोसें: 'मैं तो तीन बजे उठा था, मैं तो इतने मील पैदल गया और मैंने तो १० डुबकियाँ लगायीं.... - ऐसा अहंकार पुण्य को क्षीण कर देता है । भगवान की कृपा है जो पुण्यकर्म हुआ, उसको छुपाकर रखो ।*
*🔸 (१०) 'यह करूँगा, यह भोगूँगा, इधर जाऊँगा, उधर जाऊँगा.... इसका चिंतन न करें । 'मैं कौन हूँ ? जन्म के पहले मैं कौन था, अभी कौन हूँ और बाद में कौन रहूँगा ? तो मैं तो वही चैतन्य आत्मा हूँ । मैं जन्म के पहले था, अभी हूँ और बाद में भी रहूँगा ।' - इस प्रकार अपने स्वभाव में आने का प्रयत्न करें ।*
*🔸(११) दम्भ, दिखावा न करें ।*
*🔸(१२) इन्द्रिय-लोलुपता नहीं । कुछ भी खा लिया कि मजा आता है, कहीं भी चले गये... तो मौज-मजा मारने के लिए कुम्भ-स्नान नहीं है । सच्चाई, सत्कर्म और प्रभु-स्नेह से तपस्या करके अंतरात्मा का माधुर्य जगाने के लिए और हृदय को प्रसन्नता दिलाने के लिए तथा सत्संग के रहस्य का प्रसाद पाने के लिए कुम्भ-स्नान है ।"*
शयन विधान और सावधानियाँ | किस दिशा में सोना चाहिए ? वास्तु और आयुर्वेद नियम
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