फॉलो करें
RadheRadheje.com
@radheradheje
6,585
पोस्ट
17,082
फॉलोअर्स
RadheRadheje.com
571 ने देखा
सच्चे दोस्त तो वो हैं जिनके पास होने से ख़ुशी दोगुनी और दुःख आधे हो जाएँ.. #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌺राधा कृष्ण💞 #🙏 राधा रानी #📒 मेरी डायरी #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
RadheRadheje.com
589 ने देखा
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 28 जनवरी 2026* *⛅दिन - बुधवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - दशमी शाम 04:35 तक तत्पश्चात् एकादशी* *⛅नक्षत्र - कृत्तिका सुबह 09:26 तक तत्पश्चात् रोहिणी* *⛅योग - ब्रह्म रात्रि 11:54 तक तत्पश्चात् इन्द्र* *⛅राहुकाल - दोपहर 12:40 से दोपहर 02:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:08* *⛅सूर्यास्त - 06:12 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 जनवरी 29 से रात्रि 01:06 जनवरी 29 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (अहो रात्रि)* *🌥️विशेष - दशमी को कलंबी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹सबके लिए क्यों जरूरी है सूर्यस्नान ?🔹* *🔸सूर्य की किरणों में जो रोगप्रतिकारक शक्ति है, रोगनाशिनी शक्ति है वह दुनिया की सब औषधियों को मिलाकर भी नहीं मिलती है ।* *🔸डॉक्टर सोले कहते हैं : "सूर्य में जितनी रोगनाशक शक्ति है उतनी संसार के अन्य किसी पदार्थ में नहीं है ।* *🔸 कैंसर, नासूर, भगंदर आदि दुःसाध्य रोग, जो बिजली या रेडियम के प्रयोग से भी ठीक नहीं किये जा सकते, वे सूर्य-रश्मियों के प्रयोग से ठीक होते हुए मैंने देखे हैं ।"* *🔸जो माइयाँ सूर्यकिरणों से अपने को बचाये रखती हैं उनके जीवन में ज्यादा बीमारियाँ देखी जा सकती हैं । इसलिए रोज सुबह सिर को कपड़े से ढककर ८ मिनट सूर्य की ओर मुख व १० मिनट पीठ करके बैठना चाहिए । ऐसा सूर्यस्नान लेटकर करें तो और अच्छा ।* *🔸डॉक्टर होनर्ग ने लिखा है: 'रक्त का पीलापन, पतलापन, लोह (हीमोग्लोबिन) की कमी, नसों की दुर्बलता, कमजोरी, थकान, पेशियों की शिथिलता आदि बीमारियों का सूर्य किरण की मदद से इलाज करना लाजवाब है ।'* #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय
RadheRadheje.com
753 ने देखा
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 27 जनवरी 2026* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - नवमी शाम 07:05 तक तत्पश्चात् दशमी* *⛅नक्षत्र - भरणी सुबह 11:08 तक तत्पश्चात् कृत्तिका* *⛅योग - शुक्ल रात्रि 03:13 जनवरी 28 तक तत्पश्चात् ब्रह्म* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:25 से शाम 04:47 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:09* *⛅सूर्यास्त - 06:11 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:02 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 जनवरी 28 से रात्रि 01:06 जनवरी 28 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (सुबह 11:08 जनवरी 27 से सुबह 07:08 जनवरी 28 तक), मासिक कार्तिगई* *🌥️विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹दंडवत प्रणाम का महत्व🔹* *🔸ईश्वर की भक्ति के लिए अपने भीतर के सभी नकारात्मक तत्वों को हमें त्यागना पड़ता है और खुद को ईश्वर के चरणों में समर्पित करना होता है । ऐसा हम तभी कर सकते हैं जब हमारे भीतर मौजूद अभिमान हमारे अंतर्मन से निकल जाए । इसलिए शष्टांग प्रणाम के बढ़ावा दिया गया है ।* *🔹दंडवत प्रणाम कैसे करते हैं ?🔹* *🔸अपने शरीर को दंडवत मुद्रा में लाते हुए सिर, हाथ, पैर, जाँघे, मन, ह्रदय, नेत्र और वचन को मिलकर लेट कर प्रणाम करें। अष्ट अंगों में दोनों पाँव, दोनों घुटने, छाती, ठुण्डी और दोनों हथेलियाँ शामिल हैं । इस प्रकार के प्रणाम को हम ‘दण्डवत प्रणाम’ इसलिए भी कहते हैं ।* *🔹अष्टांग दंडवत नमस्कार करने से लाभ🔹* *👉 1. दंडवत प्रणाम करने से व्यक्ति जीवन के असली अर्थ को समझ पाता है और आगे की दिशा में बढ़ पाता है ।* *👉 2. व्यक्ति के भीतर समान भाव की प्रवृत्ति जागृत होती है और अभिमान खत्म हो जाता है ।* *👉 3. दंडवत प्रणाम करने से अहम नष्ट होता है, ईश्वर के निकट पहुंचने का रास्ता है दंडवत प्रणाम ।* *👉 4. मन में दया और विनम्रता जैसे भाव पनपने लगते हैं ।* *👉 5. आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक है अष्टाङ्ग नमस्कार ।* *👉 6. मसल्स के स्टिम्युलेशन और एक्टिव प्रयोग से पीठ मजबूत होने लगती है ।* *👉 7. व्यक्ति अपने शरीर में ऊर्जा महसूस करने लगता है ।* *👉 8. पाचन क्रिया में संतुलन बनाये रखने में लाभकारी है ।* #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
RadheRadheje.com
591 ने देखा
#🌷भीष्म अष्टमी 🙏 भीष्माष्टमी व्रत 26 जनवरी विशेष 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भीष्माष्टमी व्रत किया जाता है. इस दिन भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्याग था. भीष्म अष्टमी के दिन तिल, जल और कुश से भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण किया जाता है. जिससे मनुष्य के सभी पापों का विनाश हो होता है, पितृदोष से मुक्ति मिलती है और सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है. इसके प्रभाव से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त होता है. भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया और महाभारत की गाथा में भीष्म पितामह का सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म पितामह का मूल नाम देवव्रत था। यह हस्तिनापुर के राजा शांतनु के पुत्र थे और इनकी माता गंगा था. शांतनु ने गंगा से विवाह किया ,परंतु गंगा ने शांतनु के सामने विवाह से पूर्व एक शर्त रखी और कहा कि वह कुछ भी करें शांतनु उन्हें नहीं रोकेंगे और ना ही कुछ पूछेंगे, अगर उन्होंने ऐसा करा तो वह शांतनु को छोड़कर हमेशा के लिए चली जाएंगी। हस्तिनापुर नरेश शांतनु ने गंगा की शर्त को मंजूर कर लिया. विवाह के पश्चात गंगा ने एक पुत्र को जन्म दिया परंतु जन्म लेने के तुरंत बाद ही गंगा ने अपने पुत्र को जल में डुबो दिया. इस प्रकार गंगा के सात पुत्र हुए और उन्होंने सातो पुत्रों को जल में डुबो दिया. शांतनु यह सब देख ना पाए और जब उनके आठवां पुत्र हुआ और गंगा आठवा पुत्र जल में डूबोने के लिए ले जाने लगी ,तो शांतनु ने उन्हें रोक दिया और पूछा कि आखिर तुम ऐसा क्यों कर रही हो. अपने ही पुत्रों को जल में डुबो रही हो ,तुम कैसी माता हो। गंगा ने कहा शर्त के अनुसार आपने मुझे वचन दिया था कि आप ना मुझसे कुछ पूछेंगे और ना ही मुझे कुछ करने से रोकेंगे ,परंतु आपने यह वचन तोड़ दिया. लेकिन मैं जाने से पहले आपको बताऊंगी किआपके यह पुत्र वसु थेऔर उन्होंने श्राप के कारण मृत्यु लोक में जन्म लिया. जिन्हें मैंने मुक्ति दिलाई. परंतु इस वस्तु आठवें वसु के भाग्य में अभी दुख भोगना लिखा है. आपने मुझे रोका इसलिए मैं जा रही हूं और अपने पुत्र को भी अपने साथ ले जाऊंगी .इसका लालन -पालन करके इस पुत्र को आपको सौंप दूंगी. गंगा और शांतनु का यही आठवां पुत्र देवव्रत के नाम से विख्यात हुआ। प्रारंभिक शिक्षा पूरी कराने के पश्चात गंगा ने देवव्रत को महाराज शांतनु को वापस लौटा दिया .शांतनु ने देवव्रत को हस्तिनापुर का युवराज घोषित किया .कुछ समय पश्चात महाराज शांतनु सत्यवती नामक एक युवती पर मोहित हो गए और उन्होंने सत्यवती से विवाह करने की इच्छा प्रकट करी. परंतु सत्यवती के पिता ने शांतनु से वचन मांगा की सत्यवती का जेष्ठ पुत्र हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी होगा। शांतनु ने सत्यवती के पिता को ऐसा कोई भी वचन ना दिया और अपने महल वापस आ गए अपने पिता को चुपचाप और परेशान देखा तो देवव्रत ने इस बात का पता लगाने की कोशिश करी आखिर क्या बात है जो उनके पिता को इस प्रकार बेचैन कर रही है . जब देवव्रत को इस बात का ज्ञात हुआ कि उनके पिता सत्यवती नामक कन्या से विवाह करना चाहते हैं और सत्यवती के पिता ने महाराज शांतनु के आगे वचन रखा है. तो देवव्रत ने अपने हाथ में जल लेकर यह प्रतिज्ञा की कि वह आजीवन ब्रह्मचारी रहेंगे .उनकी इस प्रतिज्ञा को भीष्म प्रतिज्ञा कहा गयाऔर देवव्रत भीष्म के नाम से जाने गए.देवव्रत की इस प्रतिज्ञा से प्रसन्न होकर महाराज शांतनु ने देवव्रत को इच्छा मृत्यु का वरदान दिया .भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने और गद्दी न लेने का वचन दिया और सत्यवती के दोनों पुत्रों को राज्य देकर उनकी बराबर रक्षा करते रहे. महाभारत युद्ध में वह कौरवों के सेनापति बने और महाभारत के दसवें दिन शिखंडी को सामने कर अर्जुन ने बाणों से भीष्म पितामह का शरीर छेद डाला. भीष्म पितामह बाणों की शैया पर 58 दिन रहे.परंतु भीष्म पितामह ने उस समय मृत्यु को नहीं अपनाया क्योंकि उस वक्त सूर्य दक्षिणायन था तब उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की जैसे ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश हुआ और उत्तरायण हो गया अर्जुन के बाण से निकली गंगा की धार का पान कर भीष्म पितामह ने अपने प्राणों का त्याग करा और मोक्ष को प्राप्त हुए.इसलिए इस दिन को भीष्म अष्टमी के नाम से जाना गया है.माघ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भीष्म पितामह का तर्पण किया जाता है. मृत आत्माओं की शांति के लिए इस दिन पूजा करनी चाहिए क्योंकि यह दिन उत्तम बताया गया है जिससे पित्र दोष समाप्त हो जाते हैं. भीष्माष्टमी का व्रत पितृदोष से मुक्ति और संतान प्राप्ति के लिए बहुत महत्व रखता है इस दिन पवित्र नदी में स्नान ,दान करने से पुण्य प्राप्त होता है. इस दिन जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। भीष्म तर्पण 〰️〰️〰️〰️ भीष्मजी को अर्ध्य देने से पुत्रहीन को पुत्र प्राप्त होता है। जिसको स्वप्नदोष या ब्रह्मचर्य सम्बन्धी गन्दी आदतें या तकलीफें हैं, उनका भीष्मजी को अर्ध्य देने से ब्रह्मचर्य सुदृढ़ बनता है। हम सभी साधकों को इन पांच दिनों में भीष्मजी को अर्ध्य जरुर देना चाहिए और ब्रह्मचर्य रक्षा के लिए प्रयत्न करना चाहिए। भीष्म तर्पण के लिए निम्न मन्त्र शुद्धभाव से पढ़कर तर्पण करना चाहिए। 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ तर्पण मंत्र👉 सत्यव्रताय शुचये गांगेयाय महात्मने। भीष्मायेतद् ददाम्यर्घ्यमाजन्म ब्रह्मचारिणे ।। अर्थ👉 आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले परम पवित्र सत्यव्रत पारायण गंगानन्दन महात्मा भीष्म को मैं अर्घ्य देता हूँ। जो मनुष्य निम्नलिखित मंत्र द्वारा भीष्म जी के लिए अर्घ्यदान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। अर्घ्य मंत्र👉 वैयाघ्रपद गोत्राय सांकृत्यप्रवराय च । अपुत्राय ददाम्येतदुदकं भीष्मवर्मणे ।। वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च । अर्घ्यं ददानि भीष्माय आजन्म ब्रह्मचारिणे ।। अर्थ👉 जिनका गोत्र व्याघ्रपद और सांकृतप्रवर है, उन पुत्र रहित भीष्म जी को मैं जल देता हूँ. वसुओं के अवतार, शान्तनु के पुत्र, आजन्म ब्रह्मचारी भीष्म को मैं अर्घ्य देता हूँ. जो भी मनुष्य अपनी स्त्री सहित पुत्र की कामना करते हुए भीष्म पंचक व्रत का पालन करता हुआ तर्पण और अर्घ्य देता है. उसे एक वर्ष के अन्दर ही पुत्र की प्राप्ति होती है. इस व्रत के प्रभाव से महापातकों का नाश होता है. अर्घ्य देने के बाद पंचगव्य, सुगन्धित चन्दन के जल, उत्तम गन्ध व कुंकुम द्वारा सभी पापों को हरने वाले श्री हरि की पूजा करें. भगवान के समीप पाँच दिनों तक अखण्ड दीप जलाएँ. भगवान श्री हरि को उत्तम नैवेद्य अर्पित करें. पूजा-अर्चना और ध्यान नमस्कार करें. उसके बाद “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मन्त्र का 108 बार जाप करें. प्रतिदिन सुबह तथा शाम दोनों समय सन्ध्यावन्दन करके ऊपर लिखे मन्त्र का 108 बार जाप कर भूमि पर सोएं. व्रत करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना अति उत्तम है. शाकाहारी भोजन अथवा मुनियों से प्राप्त भोजन द्वारा निर्वाह करें और ज्यादा से ज्यादा समय विष्णु पूजन में व्यतीत करें. विधवा स्त्रियों को मोक्ष की कामना से यह व्रत करना चाहिए. पूर्णमासी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएँ तथा बछड़े सहित गौ दान करें. इस प्रकार पूर्ण विधि के साथ व्रत का समापन करें. पाँच दिनों का यह भीष्म पंचक व्रत-एकादशी से पूर्णिमा तक किया जाता है. इस व्रत में अन्न का निषेध है अर्थात इन पाँच दिनों में अन्न नहीं खाना चाहिए. इस व्रत को विधिपूर्वक पूर्ण करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। माघ, शुक्ल अष्टमी प्रारम्भ 👉 जनवरी 25 रात्रि 11:10 से अष्टमी समाप्त 👉 जनवरी 26 रात्रि 09:16 पर मध्याह्न समय दोपहर 11:25 से 01:32 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
RadheRadheje.com
572 ने देखा
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 26 जनवरी 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - अष्टमी रात्रि 09:17 तक तत्पश्चात् नवमी* *⛅नक्षत्र - अश्विनी दोपहर 12:32 तक तत्पश्चात् भरणी* *⛅योग - साध्य सुबह 09:11 तक, तत्पश्चात् शुभ प्रातः 06:20 जनवरी 27 तक, तत्पश्चात् शुक्ल* *⛅राहुकाल - सुबह 08:33 से सुबह 09:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:09* *⛅सूर्यास्त - 06:10 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:13 जनवरी 27 से रात्रि 01:05 जनवरी 27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - भीष्माष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी, गणतंत्र दिवस* *🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹सर्दियों में पुष्टिदायी बलप्रद मेथी🔹* *🔸मेथी को ताजा, सुखकर या इसके बीजों को अकुंरित करके उपयोग में लाया जाता हैं । इसका पाक सर्दियों में बल तथा पुष्टि वर्धक होता है ।* *🔸मेथी की भाजी कडवी, गर्म, पित्तवर्धक, हल्की, रक्तशुद्धिकर, मल-मूत्र साफ़ लानेवाली, ह्रदय के लिए बलप्रद, अफरा, उदर-विकार, संधिवात, शारीरिक दर्द तथा वायुदोष में अत्यंत हितकर हैं । यह माता के दूध को बढ़ाती है ।* *🔸प्रमेह में रोज १-२ चम्मच मेथी-दाने पानी में भिगोकर सब्जी बनाकर या मेथी-दाने का चूर्ण पानी के साथ लेने से लाभ होता है । मेथी के पत्तों की सब्जी भी लाभदायी है ।* *🔸पाचन-तंत्र की कमजोरी तथा शौचसबंधी तकलीफों में चौथाई कप मेथी के पत्तों के रस में १ चम्मच शहद मिलाकर लेने से अत्यधिक लाभ होता है ।* *🔸मेथी के पत्तों का रस बालों में लगाने से रुसी व बालों का झड़ना कम होता है, बाल काले व मुलायम बनते हैं । साबुन का उपयोग न करें । उसके नियमित सेवन से महिलाओं में खून की कमी नहीं होती ।* #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स *🔹सावधानी : पित्त-प्रकोप, अम्लपित्त, दाह में मेथी न खायें ।*
RadheRadheje.com
629 ने देखा
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 25 जनवरी 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - सप्तमी रात्रि 11:10 तक तत्पश्चात् अष्टमी* *⛅नक्षत्र - रेवती दोपहर 01:35 तक तत्पश्चात् अश्विनी* *⛅योग - सिद्ध सुबह 11:46 तक तत्पश्चात् साध्य* *⛅राहुकाल - शाम 04:46 से शाम 06:08 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:09* *⛅सूर्यास्त - 06:09 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:13 जनवरी 26 से रात्रि 01:05 जनवरी 26 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - नर्मदा जयंती, रथ सप्तमी, रविवारी सप्तमी (सूर्योदय से रात्रि 11:10 तक), सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 01:35 से सुबह 07:09 जनवरी 26 तक)* *🌥️विशेष - सप्तमी को ताड़ फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹 रविवार विशेष🔹* *🔸 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)* *🔸 रविवार के दिन आँवला, मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)* *🔸 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)* *🔸 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।* *🔸 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।* *🔸 रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना एवं पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।* #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
RadheRadheje.com
597 ने देखा
Maa Narmada माँ नर्मदा का धार्मिक महत्त्व और पौराणिक कथा
अलौकिक और पुण्यदायिनी माँ नर्मदा के जन्मदिवस यानी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा महोत्सव मनाया जाता है। पतित पावनी पुण्य सलिला माँ नर्मदा जी अमरकंटक से प्रवाहित होकर रत्नासागर में समाहित हुई है, शिवजी ने इन्हें अजर-अमर होने का वरदान दिया है और इन्हें अस्थि-पंजर | राखिया को भी शिव रूप में परिवर्तित होने का आशीर्वाद प्राप्त है। इसका प्रमाण मार्कण्डेय ऋषि ने मार्कण्डेय पुराण में दिया है। नर्मदाजी का तट सुर्भीक्ष माना गया है, शास्त्रों के अनुसार माँ नर्मदा के पूजन, दीपदान, स्नान एवं दर्शन मात्र से मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है। महाभारत, रामायण सहित अनेक हिंदू धर्म शास्त्रों में माँ नर्मदा का उल्लेख मिलता है।
माँ नर्मदा का धार्मिक महत्त्व और पौराणिक कथा अलौकिक और पुण्यदायिनी माँ नर्मदा के जन्मदिवस यानी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा महोत्सव मनाया जाता है, इस दिन नर्मदा नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है। #maanarmada2026 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/maa-narmada-religious-significance-and-mythology-of-maa-narmada-in-hindi-narmadashtakam-with-hindi-meaning/
See other profiles for amazing content