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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 11 अगस्त 2026* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - चतुर्दशी मध्यरात्रि 01:52 तक तत्पश्चात् अमावस्या* *⛅नक्षत्र -‌ पुनर्वसु सुबह 10:09 तक तत्पश्चात् पुष्य* *⛅योग - सिद्धि शाम 06:51 तक तत्पश्चात् व्यतीपात* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:47 से शाम 05:24 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:01* *⛅सूर्यास्त - 07:02 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:34 से प्रातः 05:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 से दोपहर 12:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:10 से मध्यरात्रि 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - मासिक शिवरात्रि, द्वितीय मंगला गौरी व्रत, व्यतीपात योग (शाम 06:51 दोपहर 03:26 अगस्त 12 तक)* *🌥️विशेष - चतुर्दशी को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
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1 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 10 अगस्त 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वादशी सुबह 08:00 तक, तत्पश्चात् त्रयोदशी 11 अगस्त प्रातः 04:54 तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी* *⛅नक्षत्र -‌ आर्द्रा दोपहर 12:26 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु* *⛅योग - वज्र रात्रि 10:27 तक तत्पश्चात् सिद्धि* *⛅राहुकाल - सुबह 07:40 से सुबह 09:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:01* *⛅सूर्यास्त - 07:03 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:33 से प्रातः 05:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 से दोपहर 12:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:10 से मध्यरात्रि 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत, सोमप्रदोष व्रत* *🌥️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #monday #god #harharmahadev #omnamahshivaya #lordshiva #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #SantShriAsharamjiBapu #SantShriAsharamjiAshram #facebookviral #fbviral #trendingnow
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एकादशी व्रत को सभी व्रतों का राजा क्यों कहते हैं ? 〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️ वैकुण्ठधाम की प्राप्ति कराने वाला, भोग और मोक्ष दोनों ही देने वाला तथा पापों का नाश करने वाला एकादशी के समान कोई व्रत नहीं है, इसलिए इसे ‘व्रतों का राजा’ कहते हैं। सभी व्रत व सभी दान से अधिक फल एकादशी व्रत करने से होता है। जैसे देवताओं में भगवान विष्णु, प्रकाश-तत्त्वों में सूर्य, नदियों में गंगा प्रमुख हैं वैसे ही व्रतों में सर्वश्रेष्ठ व्रत एकादशी-व्रत को माना गया है । इस तिथि को जो कुछ दान किया जाता है, भजन-पूजन किया जाता है, वह सब भगवान श्रीहरि के पूजित होने पर पूर्णता को प्राप्त होता है। संसार के स्वामी सर्वेश्वर श्रीहरि पूजित होने पर संतुष्ट होकर प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। इस दिन किया गया प्रत्येक पुण्य कर्म अनन्त फल देता है और मनुष्य के सात जन्मों के कायिक, वाचिक और मानसिक पाप दूर हो जाते हैं। भगवान विष्णु को अत्यन्त प्रिय है एकादशी का व्रत की संक्षिप्त कथा👉 पूर्व काल में मुर दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के शरीर से एक कन्या प्रकट हुई जो विष्णु के तेज से सम्पन्न और युद्धकला में निपुण थी। उसकी हुंकार मात्र से मुर दैत्य राख का ढेर हो गया। वह कन्या ही एकादशी देवी थी। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उससे वर मांगने को कहा। एकादशी देवी ने वर मांगा—‘यदि आप प्रसन्न हैं तो आपकी कृपा से मैं सब तीर्थों में प्रधान, सभी विघ्नों का नाश करने वाली व समस्त सिद्धि देने वाली देवी होऊं। जो लोग उपवास (नक्त और एकभुक्त) करके मेरे व्रत का पालन करें, उन्हें आप धन, धर्म व मोक्ष प्रदान कीजिए।’ भगवान ने वर देते हुए कहा—‘ऐसा ही हो। जो तुम्हारे भक्तजन हैं वे मेरे भी भक्त कहलायेंगे।’ 👉 विभिन्न नक्षत्रों का योग होने पर एकादशी-व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। जैसे— 👉 जब शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘पुनर्वसु’ नक्षत्र हो तो वह तिथि ‘जया’ कहलाती है। इसका व्रत करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। 👉 जब शुक्ल पक्ष की द्वादशी को ‘श्रवण’ नक्षत्र हो तो वह तिथि ‘विजया’ कहलाती है। इसमें किया गया व्रत, दान व ब्राह्मण-भोजन सहस्त्र गुना फल देने वाला होता है। 👉 जब शुक्ल पक्ष की द्वादशी को ‘रोहिणी’ नक्षत्र हो तो वह तिथि ‘जयन्ती’ कहलाती है। इस दिन भगवान गोविन्द का व्रत व पूजन करने से वे मनुष्य के सब पाप धो डालते हैं। 👉जब शुक्ल पक्ष की द्वादशी को ‘पुष्य’ नक्षत्र हो तो वह तिथि ‘पापनाशिनी’ कहलाती है। इसका व्रत करने से संसार के स्वामी प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। पुष्प नक्षत्र से युक्त एकादशी का व्रत करने से मनुष्य एक हजार एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त कर लेता है। इस दिन किए गये स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय व देव पूजा का अक्षय फल माना गया है। गोदान व अश्वमेध-यज्ञ करने का जो फल होता है, उससे सौगुना अधिक फल एकादशी व्रत करने वाले को मिलता है। एकादशी व्रत के करने से सभी रोग व दोष शान्त हो जाते हैं। मनुष्य को दीर्घायु, सुख-शान्ति व समृद्धि की प्राप्ति होती है। मनुष्य जीवन का उद्देश्य ‘भगवान की प्राप्ति’ भी एकादशी व्रत से हो जाती है। चिन्तामणि के समान एकादशी व्रत मनुष्य की सभी कामनाएं पूरी करता हैं। एकादशी व्रत का अखण्ड पालन करने से मनुष्य की सौ पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है। एकादशी का व्रत सभी पुण्यों को और मोक्ष देने वाला है। एकादशी के दिन अन्न क्यों नहीं खाना चाहिए..? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एकादशी के दिन अन्न (गेहूं, चावल आदि) खाने से पाप क्यों लगता है, इसके लिए कहा गया है कि—‘ब्रह्महत्या आदि समस्त पाप एकादशी के दिन अन्न में रहते हैं । अत: एकादशी के दिन जो भोजन करता है, वह पाप-भोजन करता है।’ यदि एकादशी का व्रत न भी कर सकें तो इस दिन चावल और उससे बने पदार्थ नहीं खाने चाहिए। एकादशी का व्रत क्यों करना चाहिए ? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1👉 यह संसार भोग-भूमि और मानव योनि भोग-योनि है इसलिए मनुष्य की स्वाभाविक रुचि भोगों की ओर ही रहती है। मनुष्य यदि भोगों में ही लिप्त रहेगा तो वह इस संसार में आवागमन के चक्र से मुक्त नहीं हो सकेगा। संसार में सब कार्यों को करते हुए भी कम-से-कम पक्ष में एक बार मनुष्य भोगों से अलग रहकर ‘स्व’ में स्थित रहे और अपने मन व चित्त को सात्विक रखकर भगवान की प्राप्ति की ओर मुड़ सके इसके लिए एकादशी व्रत का विधान किया गया है। 2👉 एकादशी ‘नित्य व्रत’ है इसलिए नित्य-कर्म की तरह सभी वैष्णवों को इस व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। 3👉 ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को चन्द्रमा की एकादश (ग्यारह) कलाओं का प्रभाव जीवों पर पड़ता है। चन्द्रमा का प्रभाव शरीर और मन पर होता है, इसलिए इस तिथि में शरीर की अस्वस्थता और मन की चंचलता बढ़ जाती है। इसी तरह कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सूर्य की एकादश कलाओं का प्रभाव जीवों पर पड़ता है। इसी कारण उपवास से शरीर को संभालने और इष्टदेव के पूजन से चित्त की चंचलता दूर करने और मानसिक बल बढ़ाने के लिए एकादशी का व्रत करने का नियम बनाया गया है। 4👉 एकादशी व्रत करने से वात आदि कितनी ही तरह की व्याधियों से मनुष्य की रक्षा होती है। 5👉 यदि उदयकाल में थोड़ी-सी एकादशी, मध्य में पूरी द्वादशी और अंत में थोड़ी-सी भी त्रयोदशी हो तो वह *•‘त्रिस्पृशा’* एकादशी कहलाती है। यह भगवान को बहुत ही प्रिय है। इसका उपवास करने से एक सहस्त्र एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। 6👉 दशमी युक्त एकादशी का व्रत कभी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से संतान का नाश होता है और सद्गति (विष्णुलोक की प्राप्ति) नहीं होती है। 〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️ *Kamika Ekadashi: इस साल सावन माह में कब है कामिका एकादशी, जानिए मुहूर्त, कथा महत्व उपवास का दिन और पारण का समय* इस वर्ष श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार रहेगा. एकादशी तिथि का प्रारंभ 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट पर होगा. वहीं, एकादशी तिथि का समापन 9 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा. उदयातिथि अनुसार, यह व्रत 9 अगस्त 2026 ,रविवार को रखा जाएगा. https://www.radheradheje.com/astrology-kamika-ekadashi-2026-date-time-kamika-ekadashi-kab-hai-shubh-muhurat-parana-kamika-ekadashi-significance-worship-savartha-siddhi-yoga-kamika-ekadashi-fasting-story/ #🪔कामिका एकादशी📿🌺
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1 days ago
कामिका (कामदा) एकादशी 09 अगस्त विशेष 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ सभी एकादशियों में कामिका एकादशी का काफी महत्व माना जाता है। इस एकादशी को भाव पूर्ण व्रत और पूजा-विधि के द्वारा करने पर प्रभाव से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। कामिका एकादशी श्रावण (सावन) कृष्ण एकादशी को पड़ती है। इस महीने कामिका एकादशी आज बुधवार को पड़ रही है। कामिका एकादशी महात्म्य एवं कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन, आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास्य माहात्म्य मैंने भली प्रकार से सुना। अब कृपा करके श्रावण कृष्ण एकादशी का क्या नाम है, सो बताइए। श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है, सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन होता है, जिनके नाम श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है, वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं होता वह भगवान विष्णु के पूजन से मिलता है। जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्यमेव करना चाहिए। पापरूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसाररूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। हे नारद! स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका व्रत से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से। तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का महात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है। प्रचलित कथा 〰️〰️〰️〰️ युधिष्ठिर के आग्रह पर श्रीकृष्ण ने कहा, राजन सुनों मैं तुम्हें कथा सुनाता हूं। एक नगर में एक ठेठ ठाकुर और एक ब्राह्मण रहते थे। दोनों की एक दूसरे से बनती नहीं थी। आपसी झगड़े के कारण ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला. इस पर नाराज ब्राह्मणों ने ठाकुर के घर खाना खाने से मना कर दिया। ठाकुर अकेला पड़ गया और वह खुद को दोषी मानने लगा ठाकुर को अपनी गलती महसूस हुई और उसने एक मुनी से अपने पापों का निवारण करने का तरीका पूछा इस पर, मुनी ने उन्हें कमिका एकदशी का उपवास करने के लिए कहा। ठाकुर ने ऐसा ही किया। ठाकुर ने व्रत करना शुरू कर दिया। एक दिन कामिका एकादशी के दिन जब ठाकुर भगवान की मूर्ति के निकट सोते हुए एक सपना देखा, भगवान ने उसे बताया, “ठाकुर, सभी पापों को हटा दिया गया है और अब आप ब्राह्मण हटिया के पाप से मुक्त हैं”। इसलिए, इस एकादशी को आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह चेतना से सभी नकारात्मकता को नष्ट करता है और मन और हृदय को दिव्य प्रकाश से भर देता है। अन्य प्रचलित कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एक गांव में एक वीर श्रत्रिय रहता था। एक दिन किसी कारण वश उसकी ब्राहमण से हाथापाई हो गई और ब्राहमण की मृत्य हो गई। अपने हाथों मरे गये ब्राहमण की क्रिया उस श्रत्रिय ने करनी चाही। परन्तु पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया। ब्राहमणों ने बताया कि तुम पर ब्रहम हत्या का दोष है। पहले प्रायश्चित कर इस पाप से मुक्त हो तब हम तुम्हारे घर भोजन करेंगे। इस पर श्रत्रिय ने पूछा कि इस पाप से मुक्त होने के क्या उपाय है। तब ब्राहमणों ने बताया कि श्रावण माह के कृष्ण पश्र की एकादशी को भक्तिभाव से भगवान श्रीधर का व्रत एवं पूजन कर ब्राहमणों को भोजन कराके सदश्रिणा के साथ आशीर्वाद प्राप्त करने से इस पाप से मुक्ति मिलेगी। पंडितों के बताये हुए तरीके पर व्रत कराने वाली रात में भगवान श्रीधर ने श्रत्रिय को दर्शन देकर कहा कि तुम्हें ब्रहम हत्या के पाप से मुक्ति मिल गई है। कामिका एकादशी पूजा-विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एकादशी के दिन स्नानादि से पवित्र होने के पश्चात् पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद श्री विष्णु के विग्रह का पूजन करना चाहिए। भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि पदार्थ निवेदित करके, आठों प्रहर निर्जल रहकर विष्णु जी के नाम का स्मरण और संकीर्तन करना चाहिए। एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा का बड़ा ही महत्व है। इसलिए ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना शुभ माना गया है। इस प्रकार जो कामिका एकादशी का व्रत रखता है उसकी कामनाएं पूर्ण होती हैं। पूजा के लिये आवश्यक सामग्री 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ श्री विष्णु जी की मूर्ति वस्त्र पुष्प पुष्पमाला नारियल सुपारी अन्य ऋतुफल धूप दीप घी पंचामृत (दूध(कच्चा दूध),दही,घी,शहद और शक्कर का मिश्रण) अक्षत तुलसी दल चंदन मिष्ठान आदि। कामिका एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एकादशी तिथि प्रारम्भ👉 08 अगस्त को दोपहर 01:57 बजे से। एकादशी तिथि समाप्त👉 09 अगस्त, को प्रातः 11:05 बजे तक। पारण (व्रत तोड़ने का) समय👉 10 अगस्त प्रातः 05:45 से 07:57 तक। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय प्रातः 08:00 बजे। पारण विधि 〰️〰️〰️〰️ द्वादशी के दिन घर पर ब्राह्मण को बुलाएं और उन्हें खाना खिलाएं और सामर्थ्य अनुसार उन्हें दान दक्षिणा दें। उसके बाद स्वयंं पारण करें. ध्यान रहे कि पारण के समय के दौरान ही पारण किया जाना चाहिए। अगर ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन कराने का सामर्थ्य नहीं है तो आप एक व्यक्ति के भोजन के बराबर अनाज किसी गरीब को या मंदिर में दान कर दें। यह भी आपको उतना ही फल प्रदान करेगा। भगवान जगदीश्वर जी की आरती 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे। दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे। विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे। श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *Kamika Ekadashi: इस साल सावन माह में कब है कामिका एकादशी, जानिए मुहूर्त, कथा महत्व उपवास का दिन और पारण का समय* इस वर्ष श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार रहेगा. एकादशी तिथि का प्रारंभ 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट पर होगा. वहीं, एकादशी तिथि का समापन 9 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा. उदयातिथि अनुसार, यह व्रत 9 अगस्त 2026 ,रविवार को रखा जाएगा. https://www.radheradheje.com/astrology-kamika-ekadashi-2026-date-time-kamika-ekadashi-kab-hai-shubh-muhurat-parana-kamika-ekadashi-significance-worship-savartha-siddhi-yoga-kamika-ekadashi-fasting-story/ #🪔कामिका एकादशी📿🌺
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 09 अगस्त 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - एकादशी सुबह 11:04 तक तत्पश्चात् द्वादशी* *⛅नक्षत्र - मृगशिरा दोपहर 02:43 तक तत्पश्चात् आर्द्रा* *⛅योग - हर्षण मध्यरात्रि 02:04 तक तत्पश्चात् वज्र* *⛅राहुकाल - शाम 05:25 से शाम 07:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:01* *⛅सूर्यास्त - 07:04 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:33 से प्रातः 05:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 से दोपहर 12:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:11 से मध्यरात्रि 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - कामिका एकादशी* *🌥️विशेष - एकादशी की शिम्बी (सेम) एवं द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #sunday #god #suryadev #lordsurya #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
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Kamika Ekadashi: इस साल सावन माह में कब है कामिका एकादशी, जानिए मुहूर्त, कथा महत्व उपवास का दिन और पारण का समय
कामिका एकादशी सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरूप की पूजा की जाती है, महाभारत काल में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को एकादशी के महात्मय के बारे में बताया था। कामिका एकादशी के व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना गया है, यह एकादशी जीवन में समृद्धि और खुशियां लाने वाली मानी गयी है। अपने पापों से डरने वाले व्यक्ति को कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए, श्रावण मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से, सभी गन्धर्वों और नागों की भी पूजा हो जाती है। इस एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा पीले रंग के फल-फूल से की जाती है।
ॐ नमो नारायणाय 🙏 *📆 कामिका एकादशी व्रत, 9 अगस्त 2026* वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल सावन माह कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन कामिका एकादशी व्रत रखा जाता है। इस साल कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि कामिका एकादशी के दिन श्रीहरि की पूजा और व्रत रखने से सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। यदि कोई कामना लंबे समय से अधूरी है तो कामिका एकादशी का विधिवत व्रत रखकर भगवान के समक्ष उस कामना की पूर्ति की प्रार्थना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार सावन माह में भगवान विष्णु की पूजा करने से गंधर्वों और नागों की भी पूजा अपने आप हो जाती है। कामिका एकादशी के दिन शंख, चक्र गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 https://www.radheradheje.com/astrology-kamika-ekadashi-2026-date-time-kamika-ekadashi-kab-hai-shubh-muhurat-parana-kamika-ekadashi-significance-worship-savartha-siddhi-yoga-kamika-ekadashi-fasting-story/
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3 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 08 अगस्त 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - दशमी दोपहर 01:59 तक तत्पश्चात् एकादशी* *⛅नक्षत्र - रोहिणी शाम 04:51 तक तत्पश्चात् मृगशिरा* *⛅योग - ध्रुव सुबह 09:02 तक, तत्पश्चात् व्याघात 09 अगस्त प्रातः 05:38 तक, तत्पश्चात् हर्षण* *⛅राहुकाल - सुबह 09:17 से सुबह 10:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:00* *⛅सूर्यास्त - 07:05 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:33 से प्रातः 05:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 से दोपहर 12:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:11 से मध्यरात्रि 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग (प्रातः 06:00 से शाम 04:51 तक), रोहिणी व्रत* *🌥️विशेष - दशमी को कलम्बी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #saturday #god #hanumanji #bajrangbali #Shanidev #LordShani #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #radheradheje #facebookviral #fbviral #trendingnow