Maa Narmada माँ नर्मदा का धार्मिक महत्त्व और पौराणिक कथा
अलौकिक और पुण्यदायिनी माँ नर्मदा के जन्मदिवस यानी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा महोत्सव मनाया जाता है। पतित पावनी पुण्य सलिला माँ नर्मदा जी अमरकंटक से प्रवाहित होकर रत्नासागर में समाहित हुई है, शिवजी ने इन्हें अजर-अमर होने का वरदान दिया है और इन्हें अस्थि-पंजर | राखिया को भी शिव रूप में परिवर्तित होने का आशीर्वाद प्राप्त है। इसका प्रमाण मार्कण्डेय ऋषि ने मार्कण्डेय पुराण में दिया है। नर्मदाजी का तट सुर्भीक्ष माना गया है, शास्त्रों के अनुसार माँ नर्मदा के पूजन, दीपदान, स्नान एवं दर्शन मात्र से मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है। महाभारत, रामायण सहित अनेक हिंदू धर्म शास्त्रों में माँ नर्मदा का उल्लेख मिलता है।