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Rupali Patole
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Rupali Patole
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#WORD OF GOD ✝️ #jesus is our life #thankyou🙏jesu #biblical teachings #Bible Messages "सच्चा मन फिराव" 🧚‍♂©Daily Bread📖🧚‍♀ ------------------------------------------------------- हमारी बाह्य धार्मिकता से परमेश्वर कदापि प्रसन्न नहीं होता, जो केवल मनुष्यों के साम्हने धर्मी बने रहने के लिए किए जाते हैं। इसलिए प्रभु येशू मसीह ने इस बात का निषेध करते हुए कहा कि तुम ऐसा न करो, नहीं तो अपने स्वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे (मत्ती 6:1)। ठिक वैसे ही केवल दिखावे के लिए कोई पश्चाताप करे, तो ऐसा जन अपने पापों की क्षमा प्राप्त नहीं कर सकता। क्योंकि परमेश्वर हमारे मनों को जांचता है और हमारे मन के विचारों को परखता है। और ऐसा पश्चाताप जो केवल बाहरी तौर पर दिखाने हेतू केवल धुलि और राख में बैठकर पश्चाताप करने के समान है, जो परमेश्वर की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है; क्योंकि हमारा इस रवैये से परमेश्वर घृणा रखता है (यशायाह 1:11)। और हम देखते हैं कि झूठा पश्चाताप जताने वाला मनुष्य न ही अपने मन को प्रभु के अनुसार बदलता है और न ही मनुष्यों के प्रति अपने व्यवहार को! तथा ऐसा जन परमेश्वर को ही झूठा ठहराता है। इसलिए ऐसा व्यक्ति परमेश्वर की दृष्टि में ऐसी मुर्खता प्रगट करता है, जिसका दण्ड वह आप भुगतता है। परन्तु सच्चा पश्चाताप अय्युब के समान होता है, जिसने अपनी अज्ञानता को कबुल किया और परमेश्वर की वाणी को सच्चा जाना और उसके अनुसार अपने मन के गलत विचारों को बदलने के लिए धुलि और राख में पश्चाताप किया (अय्युब 42:1-6)। परन्तु हम देखते हैं कि अय्युब के तीन मित्रों ने अय्युब के विषय में तो ठिक बातें की ही नहीं थी, परन्तु इसके साथ ही उन्होंने परमेश्वर के विषय में भी ठिक बातें नहीं की; जिस कारण परमेश्वर का क्रोध उनपर भड़का। परन्तु परमेश्वर ने ही उनके लिए उपाय किया, तब उन्होंने परमेश्वर की बात मान ली और उसके अनुसार अय्युब ने उनके लिए प्रार्थना की, तो वे अपनी मूर्खता का फल पाने से बच गए। इसलिए यदि हम भी अपने कुकर्मों से मन फिराने के लिए इन्कार करे और अपने मन का ही पीछा करते रहे, तो भलेही हम धुलि और राख में बैठे, तौभि हमारे पाप बने रहते है। क्योंकि जो अपने पापों को मान लेता है और प्रभु येशू मसीह के अनुग्रह के राजासन के पास सच्चे मन से आता है और अपनी पिछली चालचलन का त्याग करने का निर्णय लेता है, तो वह प्रभु येशू से अनुग्रह पाता है और पवित्र आत्मा उसे सहायता करता है। और ऐसा जन अपने पापों की क्षमा पाता है। क्योंकि परमेश्वर को सच्चा मन फिराव भांता है; झूठा मन फिराव परमेश्वर की दृष्टि में अधर्म है (यशायाह 1:10-17)। इसलिए झुठा मन फिराव करनेवाला अपने आप को ही धोखा देता है; इसलिए कि वह उन मनुष्यों के साम्हने अपने आप को धर्मी ठहराने का प्रयास करता है, जो उसे परमेश्वर की धार्मिकता से कदापि धर्मी नहीं ठहरा सकते हैं और न ही ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर पाता है और न ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने पाएगा (मत्ती 7:21-23)। इसलिए पाप कबुल करके छोड़ देनेवाला मनुष्य उद्धार प्राप्त करता है, जो परमेश्वर की दया के अनुसार ही है। क्योंकि सच्चा मन फिराव हमें उद्धार की ओर ले चलता है और अनन्त जीवन का भागी बनाता है (मत्ती 4:17)।
Rupali Patole
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#biblical teachings " ##almighty #trustgod #pray #prayer #faith #jesus #jesuschrist #allah #god #lord #allahuakbar #quran ##⛪✝️Growth Word of God ✝️⛪ 💒💝⛪ "सच्चा मन फिराव" 🧚‍♂©Daily Bread📖🧚‍♀ ------------------------------------------------------- हमारी बाह्य धार्मिकता से परमेश्वर कदापि प्रसन्न नहीं होता, जो केवल मनुष्यों के साम्हने धर्मी बने रहने के लिए किए जाते हैं। इसलिए प्रभु येशू मसीह ने इस बात का निषेध करते हुए कहा कि तुम ऐसा न करो, नहीं तो अपने स्वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे (मत्ती 6:1)। ठिक वैसे ही केवल दिखावे के लिए कोई पश्चाताप करे, तो ऐसा जन अपने पापों की क्षमा प्राप्त नहीं कर सकता। क्योंकि परमेश्वर हमारे मनों को जांचता है और हमारे मन के विचारों को परखता है। और ऐसा पश्चाताप जो केवल बाहरी तौर पर दिखाने हेतू केवल धुलि और राख में बैठकर पश्चाताप करने के समान है, जो परमेश्वर की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है; क्योंकि हमारा इस रवैये से परमेश्वर घृणा रखता है (यशायाह 1:11)। और हम देखते हैं कि झूठा पश्चाताप जताने वाला मनुष्य न ही अपने मन को प्रभु के अनुसार बदलता है और न ही मनुष्यों के प्रति अपने व्यवहार को! तथा ऐसा जन परमेश्वर को ही झूठा ठहराता है। इसलिए ऐसा व्यक्ति परमेश्वर की दृष्टि में ऐसी मुर्खता प्रगट करता है, जिसका दण्ड वह आप भुगतता है। परन्तु सच्चा पश्चाताप अय्युब के समान होता है, जिसने अपनी अज्ञानता को कबुल किया और परमेश्वर की वाणी को सच्चा जाना और उसके अनुसार अपने मन के गलत विचारों को बदलने के लिए धुलि और राख में पश्चाताप किया (अय्युब 42:1-6)। परन्तु हम देखते हैं कि अय्युब के तीन मित्रों ने अय्युब के विषय में तो ठिक बातें की ही नहीं थी, परन्तु इसके साथ ही उन्होंने परमेश्वर के विषय में भी ठिक बातें नहीं की; जिस कारण परमेश्वर का क्रोध उनपर भड़का। परन्तु परमेश्वर ने ही उनके लिए उपाय किया, तब उन्होंने परमेश्वर की बात मान ली और उसके अनुसार अय्युब ने उनके लिए प्रार्थना की, तो वे अपनी मूर्खता का फल पाने से बच गए। इसलिए यदि हम भी अपने कुकर्मों से मन फिराने के लिए इन्कार करे और अपने मन का ही पीछा करते रहे, तो भलेही हम धुलि और राख में बैठे, तौभि हमारे पाप बने रहते है। क्योंकि जो अपने पापों को मान लेता है और प्रभु येशू मसीह के अनुग्रह के राजासन के पास सच्चे मन से आता है और अपनी पिछली चालचलन का त्याग करने का निर्णय लेता है, तो वह प्रभु येशू से अनुग्रह पाता है और पवित्र आत्मा उसे सहायता करता है। और ऐसा जन अपने पापों की क्षमा पाता है। क्योंकि परमेश्वर को सच्चा मन फिराव भांता है; झूठा मन फिराव परमेश्वर की दृष्टि में अधर्म है (यशायाह 1:10-17)। इसलिए झुठा मन फिराव करनेवाला अपने आप को ही धोखा देता है; इसलिए कि वह उन मनुष्यों के साम्हने अपने आप को धर्मी ठहराने का प्रयास करता है, जो उसे परमेश्वर की धार्मिकता से कदापि धर्मी नहीं ठहरा सकते हैं और न ही ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर पाता है और न ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने पाएगा (मत्ती 7:21-23)। इसलिए पाप कबुल करके छोड़ देनेवाला मनुष्य उद्धार प्राप्त करता है, जो परमेश्वर की दया के अनुसार ही है। क्योंकि सच्चा मन फिराव हमें उद्धार की ओर ले चलता है और अनन्त जीवन का भागी बनाता है (मत्ती 4:17)।
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