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Ashok Kumar
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Ashok Kumar
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1 महीने पहले
सर्वोदय बाल विद्यालय ,पटेल नगर दिल्ली से ये खबर आई है। जहाँ स्कूल के प्रिंसिपल ने पिछले दो साल से यह कविता लगा रखी है। कल जब अनिता जी ने ये व्हाट्सअप किया तो बताया कि स्कूल का जब पहला दिन था ऑफिस के आगे यही कविता पढ़ी थी। मैं कोई रानी महारानी होती तो ऐसे गले से माला उतार कर देती। मगर....... क्या कहें😁 इसी खुशी में कविता एक बार फिर से😍 लड़के हमेशा खड़े रहे खड़ा रहना उनकी कोई मजबूरी नहीं रही बस उन्हें कहा गया हर बार चलो तुम तो लड़के हो, खड़े हो जाओ तुम मलंगों का कुछ नहीं बिगड़ने वाला। छोटी-छोटी बातों पर ये खड़े रहे कक्षा के बाहर स्कूल विदाई पर जब ली गई ग्रुप फोटो लड़कियाँ हमेशा आगे बैठी और लड़के बगल में हाथ दिए पीछे खड़े रहे वे तस्वीरों में आज तक खड़े हैं। कॉलेज के बाहर खड़े होकर करते रहे किसी लड़की का इंतजार या किसी घर के बाहर घंटों खड़े रहे एक झलक एक हाँ के लिए अपने आपको आधा छोड़ वे आज भी वहीं रह गए हैं। बहन-बेटी की शादी में खड़े रहे मंडप के बाहर बारात का स्वागत करने के लिए खड़े रहे रात भर हलवाई के पास कभी भाजी में कोई कमी ना रहे खड़े रहे खाने की स्टाल के साथ कोई स्वाद कहीं खत्म न हो जाए खड़े रहे विदाई तक दरवाजे के सहारे और टैंट के अंतिम पाईप के उखड़ जाने तक बेटियाँ-बहनें जब लौटेंगी वे खड़े ही मिलेंगे। वे खड़े रहे पत्नी को सीट पर बैठाकर बस या ट्रेन की खिड़की थाम कर वे खड़े रहे बहन के साथ घर के काम में कोई भारी सामान थामकर वे खड़े रहे माँ के ऑपरेशन के समय ओ. टी. के बाहर घंटों वे खड़े रहे पिता की मौत पर अंतिम लकड़ी के जल जाने तक वे खड़े रहे दिसंबर में भी अस्थियाँ बहाते हुए गंगा के बर्फ से पानी में। लड़कों रीढ़ तो तुम्हारी पीठ में भी है क्या यह अकड़ती नहीं? #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 डर के आगे जीत👌
Ashok Kumar
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1 महीने पहले
पुरुष का मौन क्यों पहाड़ सा खड़ा रहता है...?? उसके जन्म पर खुशियाँ मनाई जाती है, थाली बजाई जाती है, लड्डू बांटे जाते हैं क्योंकि वो एक दुधारू गाय है, जिसे हर कोई दुहता है, उसके मन में सुख है या दुख इसकी थाह कोई नहीं पाता है....??? वह हर पल अपनों के लिए जीता है, जीवन का एक एक पल दूसरों के लिए समर्पित करता है, बचपन से जवानी तक माँ बाप के सपनों को साकार करने के लिए दिन रात संघर्ष करता है, तो कभी पितृहीन होकर परिवार की बागडोर मुखिया के रुप में संभालता है.... कभी छोटे भाई बहनों के लिए अपने सपनों की बलि देता है तो कभी परिवार की परम्परा के लिए अपने प्यार की तिलांजलि देता है और परिवार की खुशी के लिए अनचाही शादी करता है.... पत्नी कैसी भी हो उसे निभाता है, पत्नी सुन्दर सुशील हो तो अपनी किस्मत को सराहता है और बदसूरत...बददिमाग हो तो ताउम्र नरक की सजा भुगतता है, पिता बन कर संतानों की परवरिश करने में अपना तन मन धन सब कुछ समर्पित करता है.... अपनी हर लड़ाई में रहता है वह मौन, अपना संघर्ष किसी को नहीं बता पाता है, एक एक तिनका इकट्ठा करके अपने सपनों का आशियाना बनाने की कोशिश करता है, ताउम्र एक एक पैसे का हिसाब रखता है, जिम्मेदारियों के पहाड़ के नीचे दबा उफ तक नहीं कर पाता है.... इस सफर में आदमी जीतता है या हारता लेकिन अंतत: अपने मन में अपनी इच्छाओं की कब्र में अकेला ही रहता है, हर कोई उससे मांगता ही मांगता है, उसे देने कोई नहीं आता है..... और एक दिन चुपचाप चल देता है अनजान सफर पर जहाँ जाकर कोई वापस आता नहीं... आदमी का दर्द हमेशा मौन ही रहता है ... इसलिये पुरुष स्त्री से प्रेम करे, और थोड़ा स्त्री हो जाए, दुःखदायी है एक पुरुष का, ताउम्र पुरुष रह जाना.... सभी पुरुषो को सादर समर्पित 🙏 #❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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