#🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️
भगवान सूर्य का
अनहद नाद है 'ॐ'
ॐ ब्रह्माण्ड की
नादीय अभिव्यंजना है !
108 अंक ब्रह्माण्ड की
गणितीय अभिव्यंजना है !
💐#ॐकार_परब्रह्म_है।💐
वह निखिल ब्रह्माण्ड में
व्याप्त है।
उसे शब्द ब्रह्म और नाद
ब्रह्म के नाम से भी जाना
जाता है।
प्रत्येक वेदमन्त्र के उच्चारण
से पूर्व तथा पाठ समाप्ति के
बाद इसे लगाया जाता है।
सृष्टि के जितने पदार्थ हैं
सबमें ॐकार ही व्याप्त है।
💐#ओ३म् (ॐ) #क्या_है:-
ओ३म्(ॐ)का शाब्दिक
और सरल अर्थ प्रणव
अर्थात परमेश्वर से है,
ओ३म् वास्तविकता में
सम्पूर्ण सृष्टि कि उद्भावता
की ओर संकेत करता है,
कहने का तात्पर्य यह है
कि ओ३म् से ही यह चराचर
जगत चलायमान है और इस
संसार के कण कण में ओ३म्
रमा हुआ है।
ओ३म् किसी भी एक देव का
नाम या संकेत नहीं है,अपितु
हर धर्म को मानने वालों ने इसे
अपने तरीके से प्रचलित किया है।
जैसे ब्रह्मा-वाद में विश्वास
रखने वाले इसे ब्रह्मा,विष्णु
के सम्प्रदाय वाले वैष्णवजन
इसे विष्णु तथा शैव या
रुद्रानुगामी इसे शिव का
प्रतिक मानते है और इसी
तरीके से इसको प्रचलित
करते है।
परन्तु वास्तव में ओ३म् तीनों
देवो का मिश्रित तत्त्व है जो कि
इस प्रकार है:-
ओ३म्(ॐ)शब्द में "अ"
ब्रह्मा का पर्याय है,और
इसके उच्चारण द्वारा
हृदय में उसके त्याग
का भाव होता है।
"उ" विष्णु का पर्याय है,इसके
उच्चारण द्वारा त्याग कंठ में
होता है तथा "म" रुद्र का पर्याय
है और इसके उच्चारण द्वारा
त्याग तालुमध्य में होता है।
इन तीनो देवों (त्रिदेवों)
के संगम से यह ओ३म्
(ॐ)बना है।
ओ३म् (ॐ) की महत्ता:-
हम जिस ब्रह्माण्ड में रहते है
उसमे ओ३म् (ॐ) सर्वव्यापी
है अर्थात सभी जगह व्याप्त है।
ओ३म्(ॐ)के बिना इस संसार
कि कल्पना भी नहीं की जा
सकती है।
जब आप योग या ध्यान कि
मुद्रा में बैठते होंगे तब आपको
महसूस होता होगा कि बिना
ओ३म् (ॐ) का जाप किये ही
आपको अपने आप ही अनवरत
रूप से ओ३म् (ॐ) कि ध्वनि
आ रही है।
यह तभी होता है जब आप
ध्यान कि मुद्रा में पूर्ण रूप से
खो जाते है अर्थात चरम तक
पहुच जाये।
ईश्वर का वाचक प्रणव 'ॐ' है,
तथा इसी ओम् में सारी सृष्टि
समायी हुई है।
ओम् कि महत्ता तो यहाँ तक
है कि माना जाता है कि सम्पूर्ण
ब्रह्माण्ड में ओ३म्(ॐ)की ध्वनि
से पूर्ण ब्रह्माण्ड गुन्जायमान
रहता है।
तथा इस ओ३म् (ॐ) मंत्र
को परम पवित्र और परम
शक्तिशाली माना जाता है।
यह ओ३म् (ॐ) ही हमारे प्राण
अर्थात श्वास को नियंत्रित करता
है तभी तो मनुष्य को श्वास लेते
समय ओ३म् (ॐ) कि ध्वनि का
अहसास होता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि
ओ३म् (ॐ) मंत्र बहुत शक्ति
-शाली मंत्र है और इसका प्रभाव
भी त्वरित होता है एवं ओ३म्
(ॐ) को किसी मंत्र के साथ
जोड़ दिया जाये तो वह मंत्र
पूर्णतया शुद्ध,पवित्र और
शक्तिशाली हो जाता है।
तभी तो शास्त्रानुसार सभी
मन्त्रों के पूर्व ओ३म् (ॐ)
लगाने का विधान है,
जैसे श्रीराम का मंत्र,
-ॐ रामाय नमः,
भगवान विष्णु का मंत्र,
-ॐ विष्णवे नमः,
भगवन शिव का मंत्र,-
ॐ नमः शिवाय,आदि
अत्यधिक प्रचलित है।
कहा जाता है कि ॐ से रहित
कोई मंत्र फलदायी नही होता,
चाहे उसका कितना भी जाप हो।
मंत्र के रूप में मात्र ॐ भी
पर्याप्त है।
माना जाता है कि एक बार
ॐ का जाप हज़ार बार किसी
मंत्र के जाप से महत्वपूर्ण है।
ॐ का दूसरा नाम प्रणव
(परमेश्वर) है।
"तस्य वाचकः प्रणवः"
अर्थात् उस परमेश्वर
का वाचक प्रणव है।
इस तरह प्रणव अथवा ॐ
एवं ब्रह्म में कोई भेद नहीं है।
ॐ अक्षर है इसका क्षय
तथा विनाश नहीं होता।
ॐकार की 19 शक्तियाँ सारे
शास्त्र-स्मृतियों का मूल है वेद।
वेदों का मूल गायत्री है और
गायत्री का मूल है ॐकार।
ॐकार से गायत्री,गायत्री से
वैदिक ज्ञान,और उससे शास्त्र
और सामाजिक प्रवृत्तियों की
खोज हुई।
पतंजलि महाराज ने कहा हैः
तस्य वाचकः प्रणवः।
परमात्मा का वाचक ओंकार है।
सब मंत्रों में ॐ राजा है।
ॐकार अनहद नाद है।
यह सहज में स्फुरित हो
जाता है।
अकार,उकार,मकार और
अर्धतन्मात्रायुक्त ॐ एक ऐसा
अदभुत भगवन्नाम मंत्र है कि
इस पर कई व्याखयाएँ हुई।
कई ग्रंथ लिखे गये।
फिर भी इसकी महिमा हमने
लिखी ऐसा दावा किसी ने नहीं
किया।
इस ओंकार के विषय में
ज्ञानेश्वरी गीता में ज्ञानेश्वर
महाराज ने कहा हैः
ॐ नमो जी आद्या वेदप्रतिपाद्या
जय जय स्वसंवेद्या आत्मरूपा।
परमात्मा का ओंकारस्वरूप
से अभिवादन करके ज्ञानेश्वर
महाराज ने ज्ञानेश्वरी गीता का
प्रारम्भ किया था।
धन्वंतरी महाराज लिखते हैं
कि ॐ सबसे उत्कृष्ट मंत्र है।
वेदव्यासजी महाराज
कहते हैं कि,
प्रणवः मंत्राणां सेतुः।
यह प्रणव मंत्र सारे मंत्रों
का सेतु है।
कोई मनुष्य दिशाशून्य हो
गया हो,लाचारी की हालत
में फेंका गया हो,कुटुंबियों
ने मुख मोड़ लिया हो,भाग्य
रूठ गया हो,बन्धुओं ने सताना
शुरू कर दिया हो,पड़ोसियों ने
पुचकार के बदले दुत्कारना शुरू
कर दिया हो...
चारों तरफ से व्यक्ति दिशाशून्य,
सहयोगशून्य,धनशून्य,सत्ताशून्य
हो गया हो फिर भी हताश न हो
वरन् सुबह-शाम 3 घंटे ओंकार
सहित भगवन्नाम का जप करे
तो वर्ष के अंदर वह व्यक्ति
भगवत्शक्ति से सबके द्वारा
सम्मानित,सब दिशाओं में
सफल और सब गुणों से
सम्पन्न होने लगेगा।
इसलिए मनुष्य को कभी भी
लाचार,दीन-हीन और असहाय
मानकर अपने को कोसना नहीं
चाहिए।
भगवान तुम्हारे आत्मा बनकर
बैठे हैं और भगवान का नाम
तुम्हें सहज में प्राप्त हो सकता
है फिर क्यों दुःखी होना ?
रोज रात्रि में आप 10 मिनट
ॐकार का जप करके सो
जाइये।
फिर देखिये इस मंत्र भगवान की
क्या-क्या करामात होती है ?
और दिनों की अपेक्षा वह रात
कैसी जाती है और सुबह कैसी
जाती है ?
पहले ही दिन से अंतर दिखने
लग जायेगा।
मंत्र के ऋषि,देवता,छंद,बीज
और कीलक होते हैं।
इस विधि को जानकर गुरुमंत्र
देने वाले सदगुरु मिल जायें
और उसका पालन करने वाला
सतशिष्य मिल जाये तो काम
बन जाता है।
ओंकार मंत्र का छंद गायत्री है,
इसके देवता परमात्मा स्वयं है
और मंत्र के ऋषि भी ईश्वर ही हैं।
भगवान की रक्षण शक्ति,गति
शक्ति,कांति शक्ति,प्रीति शक्ति,
अवगम शक्ति,प्रवेश अवति
शक्ति आदि 19 शक्तियाँ
ओंकार में हैं।
इसका आदर से श्रवण करने से
मंत्रजापक को बहुत लाभ होता
है ऐसा संस्कृत के जानकार
पाणिनी मुनि ने बताया है।
वे पहले महाबुद्धु थे,महामूर्खों
में उनकी गिनती होती थी।
14 साल तक वे पहली कक्षा
से दूसरी में नहीं जा पाये थे।
फिर उन्होंने शिवजी
की उपासना की,उनका
ध्यान किया तथा शिवमंत्र
जपा।
शिवजी के दर्शन किये व उनकी
कृपा से संस्कृत व्याकरण की
रचना की और अभी पाणिनी
मुनि का संस्कृत व्याकरण
पढ़ाया जाता है।
---मंत्र में 19 शक्तियाँ हैं-
💐#रक्षण_शक्तिः -
ॐ सहित मंत्र का जप करते हैं
तो वह हमारे जप तथा पुण्य की
रक्षा करता है।
किसी नामदान के लिए हुए
साधक पर यदि कोई आपदा
आनेवाली है,कोई दुर्घटना घटने
वाली है तो मंत्र भगवान उस
आपदा को शूली में से काँटा
कर देते हैं।
साधक का बचाव कर देते हैं।
ऐसा बचाव तो एक नहीं,मेरे
हजारों साधकों के जीवन में
चमत्कारिक ढंग से महसूस
होता है।
गाड़ी उलट गयी,तीन गुलाटी
खा गयी किंतु बापू जी !
हमको खरोंच तक नहीं
आयी.... !
हमारी नौकरी छूट गयी थी,
ऐसा हो गया था,वैसा हो गया
था किंतु बाद में उसी साहब ने
हमको बुलाकर हमसे माफी
माँगी और हमारी पुनर्नियुक्ति
कर दी।
पदोन्नति भी कर दी... इस
प्रकार की न जाने कैसी-कैसी
अनुभूतियाँ लोगों को होती हैं।
ये अनुभूतियाँ समर्थ भगवान
की सामर्थ्यता प्रकट करती हैं।
💐#गति_शक्तिः -
जिस योग में,ज्ञान में,ध्यान में
आप फिसल गये थे,उदासीन
हो गये थे,किंकर्तव्यविमूढ़ हो
गये थे उसमें मंत्रदीक्षा लेने के
बाद गति आने लगती है।
मंत्रदीक्षा के बाद आपके अंदर
गति शक्ति कार्य में आपको
मदद करने लगती है।
💐#कांति_शक्तिः-
मंत्रजाप से जापक के कुकर्मों
के संस्कार नष्ट होने लगते हैं
और उसका चित्त उज्जवल
होने लगता है।
उसकी आभा उज्जवल होने
लगती है,उसकी मति-गति
उज्जवल होने लगती है और
उसके व्यवहार में उज्जवलता
आने लगती है।
इसका मतलब ऐसा नहीं है कि
आज मंत्र लिया और कल सब
छूमंतर हो जायेगा...।
धीरे-धीरे होगा।
एक दिन में कोई स्नातक नहीं
होता,एक दिन में कोई एम.ए.
नहीं पढ़ लेता,ऐसे ही एक दिन
में सब छूमंतर नहीं हो जाता।
मंत्र लेकर ज्यों-ज्यों आप श्रद्धा
से,एकाग्रता से और पवित्रता से
जप करते जायेंगे त्यों-त्यों
विशेष लाभ होता जायेगा।
💐#प्रीति_शक्तिः-
ज्यों-ज्यों आप मंत्र जपते जायेंगे
त्यों-त्यों मंत्र के देवता के प्रति,
मंत्र के ऋषि,मंत्र के सामर्थ्य के
प्रति आपकी प्रीति बढ़ती
जायेगी।
💐#तृप्ति_शक्तिः-
ज्यों-ज्यों आप मंत्र जपते जायेंगे
त्यों-त्यों आपकी अंतरात्मा में
तृप्ति बढ़ती जायेगी,संतोष
बढ़ता जायेगा।
जिन्होंने नियम लिया है और
जिस दिन वे मंत्र नहीं जपते,
उनका वह दिन कुछ ऐसा ही
जाता है।
जिस दिन वे मंत्र जपते हैं,
उस दिन उन्हें अच्छी तृप्ति
और संतोष होता है।
जिनको गुरुमंत्र सिद्ध हो गया
है उनकी वाणी में सामर्थ्य आ
जाता है।
नेता भाषण करता है तो
लोग इतने तृप्त नहीं होते,
किंतु जिनका गुरुमंत्र सिद्ध
हो गया है ऐसे महापुरुष
बोलते हैं तो लोग बड़े तृप्त
हो जाते हैं और महापुरुष
के शिष्य बन जाते हैं।
💐#अवगम_शक्तिः-
मंत्रजाप से दूसरों के मनोभावों
को जानने की शक्ति विकसित
हो जाती है।
दूसरे के मनोभावों को आप
अंतर्यामी बनकर जान सकते हो।
कोई व्यक्ति कौन सा भाव
लेकर आया है ?
दो साल पहले उसका क्या हुआ
था या अभी उसका क्या हुआ
है ?
उसकी तबीयत कैसी है?
लोगों को आश्चर्य होगा किंतु
आप तुरंत बोल दोगे कि 'आप
को छाती में जरा दर्द है...
आपको रात्रि में ऐसा स्वप्न
आता है....
कोई कहे कि 'महाराज !
आप तो अंतर्यामी हैं।'
वास्तव में यह भगवत्शक्ति
के विकास की बात है।
💐#प्रवेश_अवति_शक्तिः-
अर्थात् सबके अंतरतम की
चेतना के साथ एकाकार होने
की शक्ति।
अंतःकरण के सर्व भावों को
तथा पूर्वजीवन के भावों को
और भविष्य की यात्रा के
भावों को जानने की शक्ति
कई योगियों में होती है।
वे कभी-कभार मौज में आ
जायें तो बता सकते हैं कि
आपकी यह गति थी,आप
यहाँ थे,फलाने जन्म में ऐसे
थे,अभी ऐसे हैं।
जैसे दीर्घतपा के पुत्र पावन को
माता-पिता की मृत्यु पर उनके
लिए शोक करते देखकर उसके
बड़े भाई पुण्यक ने उसे उसके
पूर्वजन्मों के बारे में बताया था।
यह कथा योगवाशिष्ठ
महारामायण में आती है।
💐#श्रवण_शक्तिः-
मंत्रजाप के प्रभाव से जापक
सूक्ष्मतम,गुप्ततम शब्दों का
श्रोता बन जाता है।
जैसे,
शुकदेवजी महाराज ने जब
परीक्षित के लिए सत्संग शुरु
किया तो देवता आये।
शुकदेवजी ने उन देवताओं
से बात की।
माँ आनंदमयी का भी देवलोक
के साथ सीधा सम्बन्ध था।
और भी कई संतो का होता है।
दूर देश से भक्त पुकारता है कि
गुरुजी !
मेरी रक्षा करो... तो गुरुदेव तक
उसकी पुकार पहुँच जाती है !
💐#स्वाम्यर्थ_शक्तिः-
अर्थात् नियामक और शासन
का सामर्थ्य।
नियामक और शासक शक्ति
का सामर्थ्य विकसित करता
है प्रणव का जाप।
💐#याचन_शक्तिः-
अर्थात् याचना की लक्ष्यपूर्ति
का सामर्थ्य देनेवाला मंत्र।
💐#क्रिया_शक्तिः-
अर्थात् निरन्तर क्रियारत रहने
की क्षमता,क्रियारत रहनेवाली
चेतना का विकास।
💐#इच्छित_अवति_शक्तिः-
अर्थात् वह ॐ स्वरूप परब्रह्म
परमात्मा स्वयं तो निष्काम है
किंतु उसका जप करने वाले में
सामने वाले व्यक्ति का मनोरथ
पूरा करने का सामर्थ्य आ जाता है।
इसीलिए संतों के चरणों में
लोग मत्था टेकते हैं,कतार
लगाते हैं,प्रसाद धरते हैं,
आशीर्वाद माँगते हैं आदि
आदि।
💐#इच्छित_अवन्ति_शक्ति:-
अर्थात् निष्काम परमात्मा स्वयं
शुभेच्छा का प्रकाशक बन जाता है।
💐#दीप्ति_शक्तिः-
अर्थात् ओंकार जपने वाले के
हृदय में ज्ञान का प्रकाश बढ़
जायेगा।
उसकी दीप्ति शक्ति विकसित
हो जायेगी।
💐#वाप्ति_शक्तिः-
अणु-अणु में जो चेतना व्याप
रही है उस चैतन्यस्वरूप ब्रह्म
के साथ आपकी एकाकारता
हो जायेगी।
💐#आलिंगन_शक्तिः-
अर्थात् अपनापन विकसित
करने की शक्ति।
ओंकार के जप से पराये भी
अपने होने लगेंगे तो अपनों
की तो बात ही क्या ?
जिनके पास जप-तप की कमाई
नहीं है उनको तो घरवाले भी
अपना नहीं मानते,किंतु जिनके
पास ओंकार के जप की कमाई
है उनको घरवाले,समाजवाले,
गाँववाले,नगरवाले,राज्य वाले,
राष्ट्रवाले तो क्या विश्ववाले भी
अपना मानकर आनंद लेने से
इनकार नहीं करते।
💐#हिंसा_शक्तिः-
ओंकार का जप करने वाला
हिंसक बन जायेगा ?
हाँ,हिँसक बन जायेगा किंतु
कैसा हिंसक बनेगा ?
दुष्ट विचारों का दमन करने
वाला बन जायेगा और दुष्टवृत्ति
के लोगों के दबाव में नहीं
आयेगा।
अर्थात् उसके अन्दर अज्ञान
को और दुष्ट सरकारों को मार
भगाने का प्रभाव विकसित हो
जायेगा।
💐#दान_शक्तिः-
अर्थात् वह पुष्टि और वृद्धि
का दाता बन जायेगा।
फिर वह माँगनेवाला नहीं
रहेगा,देने की शक्तिवाला
बन जायेगा।
वह देवी-देवता से,भगवान से
माँगेगा नहीं,स्वयं देने लगेगा।
💐#भोग_शक्तिः-
प्रलयकाल स्थूल जगत को
अपने में लीन करता है,ऐसे
ही तमाम दुःखों को,चिंताओं
को,भयों को अपने में लीन
करने का सामर्थ्य होता है
प्रणव का जप करने वालों में।
जैसे दरिया में सब लीन हो
जाता है,ऐसे ही उसके चित्त
में सब लीन हो जायेगा और
वह अपनी ही लहरों में फहराता
रहेगा,मस्त रहेगा...
नहीं तो एक-दो दुकान,एक-दो
कारखाने वाले को भी कभी-
कभी चिंता में चूर होना पड़ता है।
किंतु इस प्रकार की साधना
जिसने की है उसकी एक दुकान
या कारखाना तो क्या,एक
आश्रम या समिति तो क्या,
1100,1200 या 1500 ही
क्यों न हों,सब उत्तम प्रकार से
चलती हैं !
उसके लिए तो नित्य नवीन रस,
नित्य नवीन आनंद,नित्य नवीन
मौज रहती है।
शादी अर्थात् खुशी !
वह ऐसा मस्त फकीर बन
जायेगा।
💐#वृद्धि_शक्तिः-
अर्थात् प्रकृतिवर्धक,संरक्षक
शक्ति।
ओंकार का जप करने वाले
में प्रकृतिवर्धक और सरंक्षक
सामर्थ्य आ जाता है।
#साभार_मानससिद्धमन्त्र★
सूर्य स्तुति:-
नमः पूर्वाय गिरये
पश्चिमायाद्रये नमः।
ज्योतिर्गणानां पतये
दिनाधिपतये नमः।।
जयाय जयभद्राय
हर्यश्वाय नमो नमः।
नमो नमः सहस्रांशो
आदित्याय नमो नमः।।
नम उग्राय वीराय
सारंगाय नमो नमः।
नमः पद्मप्रबोधाय
प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते।।
'पूर्वगिरी उदयाचल तथा
पश्चिमगिरि अस्ताचल के
रूप में आपको नमस्कार है।
ज्योतिर्गणों (ग्रहों और तारों)
के स्वामी तथा दिन के अधिपति
आपको प्रणाम है।'
आप जय स्वरूप तथा विजय
और कल्याण के दाता है।
आपके रथ में हरे रंग के घोड़े
जुते रहते हैं।
आपको बारंबार नमस्कार है।
सहस्रों किरणों से सुशोभित
भगवान सूर्य !
आपको बारंबार प्रणाम है।
आप अदिति के पुत्र होने के
कारण आदित्य नाम से प्रसिद्ध
है,आपको नमस्कार है।'
'उग्र(अभक्तों के लिये भयंकर),
वीर (शक्तिसंपन्न) और सारंग
(शीघ्रगामी) सूर्यदेव को
नमस्कार है।
कमलों को विकसित करने
वाले प्रचंड तेजधारी मार्तण्ड
को प्रणाम है।
ॐ विष्णवे नमः,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ रामाय नमः,