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*_!! संध्या : कालीन वंदन !!_*
*_कर्पूरगौरं कररुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ! सदा वसन्तं हृदयारवृन्दे भवं भवानी सहितं नमामि !!_*
*_ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ_*
*_ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥_*
*_ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥_*
*_!! महाशिवरात्रि: उपवास का आध्यात्मिक रहस्य और शिव तत्व से मिलन !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, "बल्कि आत्म-साक्षात्कार का अवसर है।" प्रस्तुत पोस्ट में मैंने भगवान शिव के वचनों के माध्यम से उपवास के "वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट किया गया है, जो महज भोजन के त्याग से परे, आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया है।" साथ ही मैंने महाशिवरात्रि की तात्त्विक व्याख्या, रात्रि-जागरण का वैज्ञानिक महत्व, और शिवपूजा के भीतर छिपे गूढ़ रहस्यों पर भी प्रकाश डालने प्रयास किया है , जो इस पावन पर्व को साधना और आंतरिक क्रांति का पर्व बनाते हैं।_*
*_👉🏻 भगवान शिव कहते हैं :-_*
*_न स्नानेन न वस्त्रेण न धूपेन न चार्चया। तुष्यामि न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासतः।।_*
*_अर्थात् हे पार्वती ! महाशिवरात्रि के दिन जो उपवास करता है, "वह निश्चय ही मुझे संतुष्ट करता है।" उस दिन उपवास करने पर मैं जैसा प्रसन्न होता हूँ, वैसा स्नान, वस्त्र, धूप और पुष्प अर्पण करने से भी नहीं होता।_*
*_👉🏻 उत्तम उपवास कौन-सा है ? :-_*
*_'उप' का अर्थ है समीप और 'वास' का अर्थ है रहना। अर्थात् अपनी आत्मा के समीप जाने की क्रिया का नाम "उपवास" है। भगवान उपवास से जितने प्रसन्न होते हैं, उतने स्नान, वस्त्र, धूप-पुष्प आदि से नहीं होते।_*
*_उप समीपे यो वासो जीवात्मपरमात्मनोः।_*
*_अर्थात् 'जीवात्मा का परमात्मा के निकट वास ही उपवास है।' जप-ध्यान, स्नान, कथा-श्रवण आदि पवित्र सद्गुणों के साथ हमारी वृत्ति का वास ही 'उपवास' है। ऐसा नहीं कि अनाज न खाया, पर राजगीरा या कुट्टू के आटे की पूरियाँ, साबूदाने की खिचड़ी, आलू-गाजर का हलवा खा लिया और कह दिया 'उपवास है।' मेरी दृष्टि में यह उपवास का निम्नतम स्वरूप है। उपवास का उत्तम स्वरूप है कि "आत्मा के समीप जीवात्मा का वास हो।" मध्यम उपवास यह है कि सप्ताह में एक बार अथवा ऐसे पवित्र दिनों-पर्वों पर अन्न एवं भूनी हुई वस्तुओं का त्याग करके, "आवश्यक होने पर केवल थोड़ा-सा फल व दूध आदि ग्रहण करके नाड़ियों की शुद्धि करें और जप-ध्यान-भजन करें।" व्रत के दूसरे दिन पारण करके अत्यंत हल्का भोजन ग्रहण करें।_*
*_👉🏻 महाशिवरात्रि का महत्व :-_*
*_मित्रों, महाशिवरात्रि का अर्थ है – "कल्याण करने वाली रात्रि, मंगलकारी रात। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि है, जो कल्याणकारी रात्रि है।" जो कि आज मनाईं जा रही है। यह तपस्या का पर्व है।_*
*_शिवस्य प्रिया रात्रिर्यस्मिन् व्रते अंगत्वेन विहिता तद् व्रतं शिवरात्र्याख्यम्।_*
*_शिवजी को प्रिय ऐसी रात्रि, सुख-शांति-माधुर्य देने वाली शिव की आनंदमयी प्रिय रात्रि, "जिसके साथ व्रत का विशेष संबंध है,वह शिवरात्रि है और वह व्रत शिवरात्रि का व्रत कहलाता है।" यदि जीवन में कोई व्रत नहीं रखा, तो जीवन में दृढ़ता नहीं आएगी, दक्षता नहीं आएगी, अपने-आप पर श्रद्धा नहीं बैठेगी और सत्यस्वरूप आत्मा-परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। मित्रों, यजुर्वेद में आता है:_*
*_व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाप्नोति दक्षिणाम्। दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धया सत्यमाप्यते।।_*
*_यह शिवरात्रि जैसा पवित्र व्रत आपके मन को "पुष्ट, पवित्र और मजबूत करने के लिए आता है।" यह आपको महान बनने और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देता है। महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विधान है। "प्रथम प्रहर की पूजा दूध से, दूसरी दही से, तीसरी घी से और चौथी शहद से संपन्न होती है।" इसका अपना "प्राकृतिक और मनोवैज्ञानिक रहस्य है।" हमारी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक – चारों स्थितियाँ उन्नत हों, इसलिए पूजा का ऐसा विधान किया गया।_*
*_मित्रों, यह पूजन रात्रि में इसलिए है, "क्योंकि एक ऋतु पूरी होती है और दूसरी ऋतु प्रारंभ होती है।" जैसे सृष्टिचक्र में सृष्टि की उत्पत्ति के बाद "नाश और नाश के बाद उत्पत्ति है," ठीक वैसे ही ऋतुचक्र में भी एक के बाद एक ऋतु आती रहती है। एक ऋतु का जाना और नई ऋतु का आरंभ होना – इसके बीच का काल मध्य दशा है। "महाशिवरात्रि शिशिर और वसंत ऋतुओं की मध्य दशा में आती है।" इस मध्य दशा में यदि जाग्रत रह जाएँ, तो उत्पत्ति और प्रलय के अधिष्ठान में बैठने की, उस अधिष्ठान में विश्रांति पाने की, आत्मा में विश्रांति पाने की व्यवस्था सुगम होती है। इसलिए इस तिथि की रात्रि "महाशिवरात्रि " कही गई है।अनेक उपासक "प्रति मास शिवरात्रि मनाते हैं," पूजा-उपासना करते हैं, पर बारह मासों में ( फाल्गुन मास की शिवरात्रि ) एक शिवरात्रि ऐसी है, "जिसे महाशिवरात्रि अथवा अहोरात्रि भी कहते हैं।" जन्माष्टमी, नरक चतुर्दशी, शिवरात्रि, होली, दीपावली, नवरात्रि – ये कुछ महारात्रियाँ हैं। इनमें किया गया जप-तप-ध्यान अनंत गुना पुण्यफल देता है।_*
*_👉🏻 शिवपूजा का तात्त्विक रहस्य :-_*
*_मित्रों, ऋषियों और संतों ने बताया है कि बिल्वपत्र का गुण है कि वह वायुजनित रोगों को दूर करता है। बिल्वपत्र चढ़ाने के साथ हम "रजोगुण, तमोगुण और सत्त्वगुण के अहं का अर्पण करते हैं।" पंचामृत का अर्थ है – पाँच भूतों से जो कुछ मिला है, वह "आत्मा-परमात्मा के प्रसाद से है," उसे प्रसादरूप में ग्रहण करना। महादेव की आरती का अर्थ है – "प्रकाश में जीना।" धूप-दीप करने का भाव है – अपने सुंदर स्वभाव की सुवास फैलाना। शिवजी त्रिशूल धारण करते हैं। "जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति – ये तीनों शूल ( कष्ट ) देते हैं।" जाग्रत में चिंता, स्वप्न में अटपटी स्वप्न सृष्टि, और सुषुप्ति ( गहरी नींद ) में अज्ञानता – "इन तीनों शूलों से पार करने वाली महाशिवरात्रि है।" जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति बदल जाती हैं, फिर भी जो नहीं बदलता – उस आत्मा में जाने की रीति सिखाने वाला शिवरात्रि का यह सत्संग जीव को तीनों गुणों से पार करा देता है।_*👌🏻
*_🙏🏻रविवार,संध्या :काल की सुंदर,मधुर व सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान,भास्कर जी एवं मां गायत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त हो,मातेश्वरी आपके भन्डारे भरपूर रखें,आपको सुख,शान्ति व समृद्धि प्रदान करें,आप हमेशा खुश रहे, इन्हीं शुभकामनाओं सहित सुमंगलम,स्नेहिल संध्या वंदन मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को महाशिवरात्रि पर्व की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। अगर,पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया अपने सभी जानने वालों में प्रेषित करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस०एस०अरोडा 9877906419🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, महाशिवरात्रि का व्रत केवल निराहार रहने का कर्मकांड नहीं, "बल्कि संपूर्ण सृष्टि के उस मूल स्रोत शिव तत्व से जुड़ने का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक अवसर है।" उपवास का वास्तविक रहस्य शरीर को भूखा रखना नहीं, वरन् 'उप' ( समीप ) + 'वास' ( रहना ) "अर्थात् अपनी आत्मा को परमात्मा के समीप स्थापित करना है।" जब हम रात्रि-जागरण के माध्यम से ऋतुओं के संधिकाल में सजग रहते हैं, इंद्रियों के शूलों से ऊपर उठकर आत्मा के अविनाशी स्वरूप का साक्षात्कार करते हैं, "तब हम महज एक धार्मिक पर्व को आंतरिक क्रांति और आत्म-साक्षात्कार के पथ में परिवर्तित कर देते हैं।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट