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Dr.S.S.Arora
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Dr.S.S.Arora
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17 मिनट पहले
☯️🕉️🌳🌹🇮🇳🌝🇮🇳🌻🌳🕉️☯️ *_!! रात्रिकालीन वंदन !!_* *_नमस्ते देवि गायत्रि, सावित्रि त्रिपदेक्षरे ! अजरे अमरे मातस्त्राहि मां भवसागरात् !!नमस्ते सूर्यसंकाशे, सूर्यसावित्रिके शुभे ! ब्रह्मविद्ये महाविद्ये, वेदमातर्नमोऽस्तु ते !!_* *_नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः ! ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः !!_* *_जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः ! नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय देवाय नमो नमः !!_* *_नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नमः ! नमः पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते !!_* *_ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूर्यायादित्यवर्चसे ! भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः !!_* *_!! धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक प्रयोग: एक सामाजिक परीक्षा !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोड़ा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट✍🏻_* *_☝🏻 मित्रों, भारत की आध्यात्मिक परंपराएँ सदियों से हमारी सामूहिक चेतना का आधार रही हैं। परंतु आज एक नया दृश्य उभर रहा है—"जहाँ धार्मिक प्रतीकों और आस्थाओं का उपयोग राजनीतिक प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पतन का क्रम है।" पहले राम को छोटा करके मंदिर ले जाते दिखाया गया। "फिर काशी कॉरिडोर के नाम पर ऐतिहासिक मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ा गया।" तिरुपति में विष्णु प्रतिमा के सामने ऐसे चित्र खिंचवाए गए "मानो बालाजी स्वयं उपस्थित हों।" सोमनाथ यात्रा में "शिव का रूप धारण कर तालियाँ बटोरी गईं।" और अब पिछले दिनों हनुमान जी को "पतंग की तरह उड़ाया जा रहा था।" हर बार जनता मौन रही, या फिर आनंदित हुई। आस्था के नाम पर प्रतीकों का विस्थापन स्वीकार कर लिया गया। अपने आप को कट्टर हिंदू कहने वालो, चुल्लू भर पानी में डूब मरो।_* *_मित्रों, एक मूलभूत प्रश्न जो मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, वो यह है: यहाँ प्रश्न किसी एक धर्म या व्यक्ति का नहीं है। प्रश्न यह है—"क्या किसी अन्य धर्म में अपने ईष्ट के प्रतीकात्मक विस्थापन को इतनी सहज स्वीकार्यता मिल सकती है ?" क्या बुद्ध, नानक, ईसा या पैगंबर मुहम्मद साहब के स्थान पर कोई स्वयं को प्रस्तुत कर सकता है "और अनुयायी बिना विरोध के उसे श्रद्धा का विषय बना लें ?" लानत है तुम सब पर, जो इस कृत्य को बर्दाश्त कर रहे हो। कुछ और नहीं, "तो चंद शब्द ही लिखकर " सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते।_* *_मित्रों, हिंदू धर्म की उदारता और सहिष्णुता उसकी शक्ति रही है। "पर जब यही उदारता राजनीतिक प्रबंधन का औजार बन जाए, तो आस्था प्रयोग में बदल जाती है," जो धर्म और नीति दोनों के विरुद्ध है। सामाजिक परीक्षण के इस दौर में एक राजनीतिक व्यक्तित्व "प्रतीकों के माध्यम से स्वयं को देवताओं की श्रेणी में, या कभी-कभी उनसे ऊपर भी स्थापित करता नज़र आ रहा है।" यह एक सामाजिक परीक्षण है—यह परखा जा रहा है कि भक्ति की सीमा कहाँ तक जा सकती है, "लोग किस हद तक अपने ईष्ट के प्रतीकात्मक अपमान को सहन कर सकते हैं।" जब कोई स्वयं को अवतार कहे, दशरथ का पुत्र बताए, और समाज बिना प्रश्न स्वीकार कर ले, तो अगला कदम अनुमान से परे नहीं होना चाहिए। मित्रों, एक बार शांतचित्त होकर सोचिएगा जरूर। 🤔_* *_🙏🏻रविवार रात्रि: काल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान भास्कर जी एवं माँ गायत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। मातेश्वरी आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें, आप हमेशा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं सहित सुमंगलम स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को 77वें गणतंत्र दिवस की अग्रिम ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। अगर पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया अपने सभी जानने वालों में प्रेषित करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस० एस० अरोड़ा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिस दिन यह विश्वास दृढ़ हो जाएगा कि भक्ति पूरी तरह अंधी हो चुकी है, "उस दिन देवालयों में ईश्वर के साथ-साथ मानवीय मूर्तियाँ भी स्थापित कर दी जाएँगी।" फिर सरकारी आदेश आएँगे, और श्रद्धा का प्रमाण सोशल मीडिया पर तस्वीरों के रूप में माँगा जाएगा। इस नए "भगवान" का जयकारा लगाना अनिवार्य किया जा सकता है—"वरना आप हिंदू कैसे कहलाए जाएँगे ?" मैं किसी राजनीतिक दल का समर्थक या आलोचक नहीं हूँ। इसलिए जनहित में जो उचित लगा, लिख दिया। "अब सही और ग़लत का फैसला आप पर छोड़ता हूँ।" मित्रों, एक बार पार्टीबाजी से ऊपर उठकर, एक जिम्मेदार नागरिक की हैसियत से सोचिएगा जरूर। "धर्म आपका, व्यवस्था आपकी, भगवान आपके, सरकार आपकी। आप इन्हें सम्मान दें, खिलौना बनाएँ, या पतंग बनाएँ—यह आपकी मर्ज़ी।" मैं सिर्फ़ तमाशा देख सकता हूँ—एक नेता किस हद तक नीचे गिर सकता है, "और आप उस पतन को किस स्तर तक समर्थन या सहन कर सकते हैं।" ज्यादा न लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूँ। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा। 👏🏻_* *_"मित्रों, हमेशा याद रखिए - देश सर्वोपरि है, पार्टी नहीं।"_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🇮🇳😴🇮🇳💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
Dr.S.S.Arora
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9 घंटे पहले
☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रातः कालीन वंदन !!_* *_ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ_* *_ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥_* *_जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥_* *_ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः। विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे रविः॥_* *_ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पयेमां भक्त्या गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻मित्रों, ज़ुबान हमारी सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती है, "जब दिल और दिमाग के बीच तालमेल न हो।" झूठ का कद कितना भी ऊँचा क्यों न हो, "सत्य के मुकाबले में छोटा ही होता है।" ज़िंदगी में कुछ पाने के लिए कोई कितने भी चमत्कारी टोटके कर ले, "लेकिन कर्मों की मार से बचने का कोई उपाय नहीं होता।" कोई कितनी भी तेज़ चालें चल ले, "लेकिन सबके हुकुम के इक्के सिर्फ़ ईश्वर के हाथ में होते हैं।" मत देखो कि दुनिया में सुंदर कौन है, देखना है तो उसे देखो "जिसके होने से आपकी दुनिया सुंदर है।" मित्रों, ज़िंदगी में लोगों के आने का भी एक मकसद होता है — कुछ आज़माते हैं, कुछ सिखाते हैं, कुछ इस्तेमाल करते हैं, "और कुछ जीने का सही मतलब बताते हैं। "_*👌🏻 *_🙏🏻रविवार प्रातःकाल की पवित्र "मंगल बेला" पर, विधाता आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन और ऊर्जा प्रदान करें। यही सुरेंद्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलमय शुभकामनाएं हैं। आपके स्वास्थ्य, सफलता एवं यश-कीर्ति की असीमित शुभकामनाओं के साथ, सुमंगल एवं स्नेहिल भोर वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को भानू सप्तमी,नर्मदा जयंती,राष्ट्रीय मतदाता दिवस तथा राष्ट्रीय पर्यटन दिवस की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान, भास्कर जी एवं मां गायत्री जी का स्नेहिल शुभाशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदैव बना रहे। मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, समस्त पाप-कर्मों से दूर रहें,तथा प्रकृति के "एहसानमंद और शुक्रगुज़ार " रहें।🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕☀️🛕💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
Dr.S.S.Arora
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23 घंटे पहले
☯️🕉️🌳🌹🛕🌝🛕🌻🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि: कालीन वंदन !!_* *_मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥_* *_ॐ शार्दूलवाहनाय विद्महे शक्तिधराय धीमहि। तन्नः स्कन्दः प्रचोदयात्॥_* *_शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। स्फटिकमालिकाधारं सर्वाभरणभूषितम्॥_* *_दक्षिणे शक्तिहस्तं च वामतो मयूरवाहनम्। सर्वमङ्गलदातारं स्कन्दं प्रणमाम्यहम्॥_* *_ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि। तन्नो सौरिः प्रचोदयात्॥_* *_!! आज रात्रि की पोस्ट :- "षड्मुख देव कार्तिकेय: जन्म, नाम और महिमा का संक्षिप्त इतिहास" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा,संकद षष्ठी पर विशेष✍🏻_* *_मित्रों, आइए आज संकद षष्ठी पर मैं आपको भगवान श्री कार्तिकेय जी का इतिहास संक्षेप में बताता हूं :- भगवान कार्तिकेय, "जिन्हें स्कंद, मुरुगन, सुब्रमण्यम आदि नामों से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में प्रमुख देवताओं में से हैं।" उनके जन्म की कथा कई पुराणों में वर्णित है:_* *_स्कंद पुराण के अनुसार, जब तारकासुर ने अपने तप से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल "शिव-पुत्र के हाथों ही हो सकती है।" चूंकि शिवजी सती की मृत्यु के बाद तपस्या में लीन थे, "इसलिए देवताओं ने कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने भेजा।" क्रोधित शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में, शिव के तेज को अग्नि ने ग्रहण किया और गंगा में छोड़ दिया। गंगा ने उस तेज को सरोवर में रख दिया, "जहाँ से छह कुमार पैदा हुए। पार्वती ने उन सभी को एक शरीर में मिला दिया, जिससे छह मुख वाले कार्तिकेय का जन्म हुआ।" महाभारत और अन्य ग्रंथों के अनुसार, शिव का वीर्य अग्नि में गिरा, फिर अग्नि से गंगा में और फिर बाद में शरवण नामक सरोवर में छह कुमारों के रूप में प्रकट हुआ। भगवान कार्तिकेय के प्रमुख नाम और अर्थ निम्नलिखित हैं :-_* *_1) कार्तिकेय - कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने के कारण_* *_2) स्कंद - शिव के वीर्य से स्कंदित ( उछले ) होने के कारण_* *_3) मुरुगन ( तमिल ) - सुंदर युवक के रूप में_* *_4) सुब्रमण्यम - शुभ मंगलकारी_* *_5) षण्मुख / षडानन - छह मुख वाले_* *_6) गुह - गुप्त रहने वाले तथा_* *_7) तारकजित् - तारकासुर के विजेता।_* *_मित्रों, भगवान कार्तिकेय का पालन-पोषण कृत्तिका नक्षत्र की छह माताओं ( अदिति, दिति, कद्रु, विनता, सुरसा और मुनि ) ने किया। उन्होंने ब्रह्मा जी से समस्त वेद, शास्त्र और शस्त्र विद्या प्राप्त की। वे इतने तेजस्वी थे कि जन्म लेते ही हाथ में शक्ति धारण कर युद्ध के लिए तैयार हो गए। तारकासुर के अत्याचारों से पीड़ित देवताओं ने कार्तिकेय को सेनापति बनाया। भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर के साथ भीषण युद्ध किया और उसका वध किया। इस विजय के बाद इंद्र ने उन्हें "देवसेनापति" ( देवताओं के सेनापति ) का पद प्रदान किया।_* *_भगवान कार्तिकेय का विवाह इंद्र की पुत्री देवसेना से हुआ जो दैवीय सेना की अधिष्ठात्री देवी थीं। दक्षिण भारत की एक वन्य कन्या वल्ली जिनसे उनका प्रेम विवाह हुआ। यह कथा विशेष रूप से तमिल परंपरा में प्रसिद्ध है। भगवान कार्तिकेय का वाहन: मोर ( मयूर ), जो अहंकार का प्रतीक है। शस्त्र: शक्ति ( भाला ), जो दैवीय शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वज: मुर्गा ( कुक्कुट ) !_*👌🏻 *_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं सहित सुमंगलम स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस० एस० अरोडा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, "भगवान कार्तिकेय ज्ञान, बल और शौर्य के देवता माने जाते हैं। वे सेनापति और योद्धाओं के अधिपति हैं।" दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में "मुरुगन के रूप में अत्यधिक पूजनीय हैं।" स्कंद पुराण, शिव पुराण, महाभारत आदि में उनका विस्तृत वर्णन है। तमिल महीने कार्तिक ( अक्टूबर-नवंबर ) में "स्कंद षष्ठी का त्योहार मनाया जाता है।" उनके मंदिरों में पलानी मंदिर ( तमिलनाडु ) - सबसे प्रसिद्ध मंदिर, स्वामीनाथ मंदिर ( स्वामीमलाई, तमिलनाडु ), तिरुथनि मंदिर ( तमिलनाडु ), पज़हमुदिरचोलाई मंदिर ( तमिलनाडु ), तिरुपरंकुंरम मंदिर ( तमिलनाडु ) तथा कुमारकोट्टम मंदिर ( केरल ) प्रमुख हैं। "भगवान कार्तिकेय छह मुख छह प्रमुख षड्वर्ग ( काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर ) पर विजय के प्रतीक हैं।" वे आत्मज्ञान और आध्यात्मिक जागृति के देवता भी माने जाते हैं। भगवान कार्तिकेय की कथाएं न केवल वीरता और बल की प्रतीक हैं, "बल्कि वे ज्ञान, निष्ठा और धर्म की रक्षा के आदर्श भी प्रस्तुत करती हैं।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕😴🛕💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
Dr.S.S.Arora
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1 दिन पहले
☯️🕉️🌳🌻🛕🌄🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! संध्या: कालीन वंदन !!_* *_गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् !रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम् !!_* *_अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम् ! कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लंकाभयंकरम् !!_* *_कुन्थः शनैश्चरो घोरो रौद्रोऽन्तकः सुरेश्वरः। कृष्णः शनैश्चरो घोरस्तथा सौरिः शनैश्चरः॥_* *_ये पठन्ति नराः भक्त्या शनैश्चर स्तवं शुभम्। तेषां दूरतरं याति शनैः पीडा कदाचन॥_* *_उद्यदादित्यसंकाशमुदारभुजविक्रमम् ! कन्दर्पकोटिलावण्यं सर्वविद्याविशारदम् !!_* *_नमस्ते कोणसंस्थाय नीलांगाय नमो नमः ! चतुर्भुजाय विश्वाय गृध्रस्थाय नमोनमः !!_* *_!! अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस: एक वैश्विक प्रतिबद्धता !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर विशेष✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, आज 24 जनवरी को हम अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाते हैं। यह दिन शिक्षा के महत्व और हम सभी की इसके प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है। आइए, आपको संक्षेप में बताता हूं :-_* *_1👉🏻 क्यों और कब शुरू हुआ ? :-_* *_मित्रों, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 दिसंबर 2018 को 24 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया। पहली बार यह दिवस 24 जनवरी 2019 को मनाया गया।_* *_2👉🏻 मुख्य उद्देश्य :-_* *_• शिक्षा को मौलिक मानव अधिकार और सार्वजनिक जिम्मेदारी के रूप में पहचान दिलाना।_* *_• गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ बनाना, ताकि गरीबी, असमानता और संघर्ष जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।_* *_• संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-4 ( SDG-4 ) की प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित करना।_* *_3👉🏻 आवश्यकता क्यों पड़ी ? :-_* *_1948 से ही शिक्षा एक मानवाधिकार है, फिर भी UNESCO के अनुसार आज भी दुनिया भर में लाखों बच्चे एवं युवा स्कूल नहीं जा पाते, खासकर लड़कियाँ, संघर्षग्रस्त क्षेत्रों के बच्चे और वंचित समुदाय। यह दिवस इसी वैश्विक प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए है।_* *_4👉🏻 बिते वर्षों के कुछ वार्षिक थीम :-_* *_• 2025: "शिक्षा का अधिकार: हमारी स्वतंत्रता, हमारा भविष्य"_* *_• 2024: शिक्षा को "शांति का केंद्र" बनाना।_* *_• 2023: निवेश करो लोगों में, शिक्षा को प्राथमिकता दो।_* *_• 2020: समानता के लिए शिक्षा, समावेश के लिए शिक्षा।_* *_5👉🏻 भारत के संदर्भ में महत्व :-_* *_• भारत में शिक्षा 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए संवैधानिक अधिकार ( अनुच्छेद 21-क ) है।_* *_• नई शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों—जैसे समावेश, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा—को प्राप्त करने की दिशा में यह दिवस प्रेरणा देता है।_* *_• डिजिटल डिवाइड, शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियों पर ध्यान देने का अवसर है।_* *_6👉🏻 कैसे मनाया जाता है ? :-_* *_• संयुक्त राष्ट्र, UNESCO और सरकारों द्वारा संवाद, सम्मेलन और सेमिनार।_* *_• सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ और जागरूकता अभियान।_* *_• शिक्षा के लिए नीतिगत प्रतिबद्धता और निवेश बढ़ाने का आह्वान।_* *_7👉🏻 भविष्य की दिशा :-_* *_2019 की महामारी ने डिजिटल असमानता उजागर की। भविष्य में तकनीकी एकीकरण, लचीले शिक्षण मॉडल और 21वीं सदी के कौशल पर बल देने की आवश्यकता है।_* 🤔👌🏻 *_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत संध्या: काल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ – सुमंगलम, स्नेहिल संध्या वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना, डॉ० एस० एस० अरोडा 9877906419🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, यह दिवस सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि एक वार्षिक अनुस्मारक है कि “शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे आप दुनिया को बदल सकते हैं” ( नेल्सन मंडेला )। एक न्यायसंगत, शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण के लिए “सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना हमारी वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए।” आज हम विश्व शिक्षा दिवस मना रहे हैं। शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, "बल्कि एक ऐसा दीपक है जो अंधेरे को मिटाकर समाज को रोशन करता है।" यह हमें सोचने, समझने और सवाल करने की ताकत देती है। "शिक्षा से ही व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है और देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है।" आइए, हम सब मिलकर प्रण लें कि "शिक्षा को सभी तक पहुंचाने और ज्ञान के प्रकाश को फैलाने में अपना योगदान देंगे।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! शिक्षा सबका अधिकार, शिक्षा सबका सम्मान !!_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏
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