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*_!! जब राजीव गांधी ने भारत में डिजिटल क्रांति की नींव रखी — "एक चिंतन " !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, 35वीं पुण्यतिथि पर विशेष।✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, "1984 के आम चुनावों में कांग्रेस ने रिकॉर्ड 414 सीटें जीतीं।" यह राजीव गांधी की चरम लोकप्रियता और शक्ति का दौर था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने और दिसंबर 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया — कुल 414 सीटें, जो भारतीय चुनावी इतिहास में किसी भी पार्टी का अब तक का सबसे बड़ा बहुमत है। यह दौर उनके "आधुनिक भारत" के विज़न की शुरुआत भी था, "जिसने उन्हें एक युवा, ईमानदार और प्रगतिशील नेता के रूप में स्थापित किया।" इंदिरा गांधी की हत्या के ठीक बाद हुए इन चुनावों में राजीव गांधी ने पूरे देश का दौरा किया, सैकड़ों रैलियाँ कीं और कांग्रेस को अभूतपूर्व जीत दिलाई।_*
*_उनके प्रधानमंत्रित्व काल का सबसे प्रमुख योगदान था — "सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति की नींव रखना।" वे भारत के कंप्यूटर एवं संचार क्रांति के जनक माने जाते हैं। उन्होंने समानांतर रूप से अनेक प्रौद्योगिकी मिशन शुरू किए और "सैम पित्रोदा" जैसे विशेषज्ञों को साथ लेकर देश को आधुनिक बनाने का अभियान चलाया। पहले टेलीफोन अमीरों की चीज़ था, "लेकिन राजीव गांधी के प्रयासों से यह आम लोगों — विशेषकर ग्रामीण भारत — तक पहुँचा।" इससे व्यवसाय, सरकारी कामकाज और सूचना के आदान-प्रदान में आसानी हुई, जो बाद में भारत की आईटी और बीपीओ उद्योग ( इन्फोसिस, विप्रो जैसी कंपनियों ) की मज़बूत नींव बनी। आज का "डिजिटल इंडिया" इसी दूरदर्शिता की देन है।_*
*_मित्रों, जब 1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, "उस समय भारत में मात्र 20-25 लाख टेलीफोन थे," जो मुख्यतः शहरों तक सीमित थे। टेलीफोन लगवाना बहुत मुश्किल और महँगा था, और ग्रामीण क्षेत्र लगभग इससे कटे हुए थे। इसी दौरान सैम पित्रोदा का आगमन हुआ, "जो अमेरिका में सफल दूरसंचार इंजीनियर थे।" 1981 में भारत आने पर उन्होंने देश की खराब टेलीकॉम व्यवस्था देखी और बदलाव की ठान ली। इंदिरा गांधी के समय संपर्क हुआ, किंतु राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर 1984 में पित्रोदा को सलाहकार नियुक्त किया गया।_*
*_अगस्त 1984 में भारत में C-DOT ( Centre for Development of Telematics ) की स्थापना हुई — एक स्वायत्त संस्था, "जिसका उद्देश्य भारत में स्वदेशी डिजिटल टेलीफोन एक्सचेंज विकसित करना था।" पित्रोदा इसके संस्थापक एवं प्रथम प्रमुख बने। C-DOT ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाई और भारतीय परिस्थितियों ( गर्मी, धूल, बिजली की समस्याओं ) के अनुकूल सस्ती तकनीक विकसित की। देश में छोटे-बड़े डिजिटल एक्सचेंज ( Rural Automatic Exchanges – RAX ) विकसित किए गए, जिनसे गाँवों में भी टेलीफोन सुविधा पहुँची। C-DOT ने भारत को स्वावलंबी बनाया। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में टेलीफोन सेवाएँ सुधारने के लिए महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड ( MTNL ) की स्थापना की गई, जिससे सेवाएँ तीव्र और कुशल हुईं। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार हेतु विदेश संचार निगम लिमिटेड ( VSNL ) बनाया गया, जिससे विदेशी संपर्क सरल हुआ। इस काल में STD और PCO बूथों का अभूतपूर्व विस्तार किया गया। गाँव-गाँव PCO बूथ खुले, "जहाँ आम आदमी सस्ते में STD कॉल कर सकता था।" यह सबसे दृश्यमान परिवर्तन था, जो ग्रामीण भारत को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाली कड़ी बना।_*
*_मित्रों, राजीव गांधी ने 1989 में टेलीकॉम कमीशन बनाया, "जिसे स्वायत्तता दी गई।" इससे नीतियाँ त्वरित लागू हो सकीं। कंप्यूटर आयात पर सीमा शुल्क घटाया गया, प्रौद्योगिकी मिशन शुरू किए गए, और सरकारी विभागों में कंप्यूटरीकरण की शुरुआत हुई। जिसके परिणामस्वरूप: टेलीफोन कनेक्शनों में तीव्र वृद्धि हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सुविधा बढ़ी, "जिससे व्यवसाय, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि को मदद मिली।" बाद में आईटी और बीपीओ उद्योग की मजबूत नींव पड़ी। "आज की डिजिटल इंडिया क्रांति इसी दूरदर्शिता की देन है।" यह क्रांति प्रारंभ में पूर्णतः सरकारी प्रयासों पर आधारित थी, किंतु 1990 के दशक में निजीकरण और 2000 के बाद मोबाइल फोन के आगमन ने इसे और आगे बढ़ाया। राजीव गांधी का योगदान दूरदर्शिता का था। उन्होंने “प्रौद्योगिकी को आम आदमी तक पहुँचाने” का सपना देखा और उसकी शुरुआत की। उस दौर में लिए गए उनके दूरदर्शी निर्णयों के कारण ही आज भारत आईटी क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है।_* 👌🏻
*_विशेष :-_*
*_☝🏻आज, 21 मई... जब हम आपको याद करते हैं, "तो हृदय में एक गहरी पीड़ा और गर्व का मिश्रण उभरता है।" आपने मात्र 40 वर्ष की आयु में देश की बागडोर संभाली "और भारत को आधुनिक युग की ओर ले जाने का सपना देखा।" आपका विज़न था — "एक सशक्त, समृद्ध और प्रगतिशील भारत।" 21 मई 1991 को आपने देश के लिए अपना "सर्वोच्च बलिदान दिया।" लेकिन आपकी विचारधारा, आपकी ऊर्जा और आपका सपना आज भी जीवित है। आधुनिक भारत के शिल्पकार, महान देशभक्त, अत्यंत सरल और दूरदर्शी नेता राजीव गांधी जी को उनकी 35वीं पुण्यतिथि पर — सुरेंद्र अरोड़ा श्रद्धानवत श्रद्धांजलि अर्पित करता है।_*👏🏻
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