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umashankar
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umashankar
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आज के जमाने में दुकानदार बनना सबसे बड़ा योद्धा बनने से भी ज़्यादा खतरनाक है! भाई, लड़ाई का मैदान छोड़ दो... असली जंग तो दुकान खोलने में है! पहले तो घर-बार बेचकर या कर्ज लेकर 40-50 लाख की पूँजी जुटाओ। नहीं जुटा पाए? कोई बात नहीं — किराए की दुकान लो, वो भी महीने का कम से कम 15-30 हजार (बड़ी जगहों पर तो 50 हजार तक आसानी से)! फिर भागो सरकार के चक्कर में — ट्रेड लाइसेंस, GST नंबर, शॉप एक्ट रजिस्ट्रेशन, Udyam... सब कुछ कराओ। दुकान खाली? अब माल भर दो, स्टाफ रखो, सैलरी दो। लोगों को माल बेचो — नकद तो ठीक है, लेकिन ज़्यादातर उधार! फिर रोज़ उगाही का खेल शुरू — “भैया, पैसे कब दोगे?” “अरे सर, अगले महीने...” “बच्चे की फीस है, थोड़ा टाइम दो...”रोज़ सुबह से रात तक हिसाब-किताब: UPI, कैश, ऑनलाइन, क्रेडिट... सबका अलग-अलग रिकॉर्ड। Accountant रखो, वरना गधे बन जाओगे। हर महीने बैंक रिकॉन्सिलिएशन, GST रिटर्न, GSTR-1, GSTR-3B की टेंशन। साल खत्म होते ही CA बुलाओ — बैलेंस शीट, इनकम टैक्स, ऑडिट... और फिर से हजारों रुपये गिनो। और सबसे मज़ेदार बात? पूरे दिन साफ-सुथरे कपड़े पहनकर भी सरकार की नज़र में तुम “टैक्स चोर” और “ब्लैक मनी” वाले हो! GST नोटिस, इनकम टैक्स स्क्रूटनी, सर्वे... रोज़ नई चिंता! फिर भी साल भर मेहनत के बाद प्रॉफिट? एक झुनझुना जैसा छोटा-मोटा अमाउंट हाथ लगे तो समझो किस्मत खुल गई। तनाव तो फ्री में मिलता है: सुगर (डायबिटीज) सर्वाइकल पेन हाई BP हार्ट की दिक्कतें नींद नहीं आना डिप्रेशन और एंग्जायटी ये सब बोनस में आता है। और हाँ... अगर कुछ और बचा है दुकानदार की ज़िंदगी में तो ये भी जान लो: रात को दुकान बंद करके भी दिमाग में उधार वालों के चेहरे घूमते रहते हैं त्योहारों पर भी छुट्टी नहीं, क्योंकि “सेल” करनी है परिवार को टाइम नहीं दे पाते, बच्चे “पापा कब आएंगे” पूछते रहते हैं दोस्त-रिश्तेदार समझते हैं “दुकानदार है, आराम से पैसा कमा रहा होगा” एक छोटी सी गलती (GST में mismatch या गलत HSN कोड) और लाखों का नोटिस आ जाता है पड़ोसी की नई गाड़ी देखकर खुद की पुरानी बाइक पर भी गर्व करना पड़ता है फिर भी ये सारे योद्धा सुबह 8 बजे दुकान खोलते हैं... और रात 10 बजे बंद करते हैं। बिना तलवार के, बिना वर्दी के, सिर्फ़ एक कैलकुलेटर और आशा लेकर!सैल्यूट है इन सच्चे योद्धाओं को! दुकानदार भाई, तुम सच में सबसे बड़े फाइटर हो — जो बिना शोर के, बिना सरकारी तवज्जो के, देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर खड़े हो। अब बोलो... अभी भी लगता है कि दुकानदार बनना आसान है? दुकानदारों की जय! #😂फनी जोक्स🤣 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार
umashankar
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3 hours ago
रिटायर्ड बेचारा क्या करे ----------------------------- 1. रिटायर व्यक्ति अगर देर तक सोया रहे तो.... बीवी : अब उठ भी जाओ ! आपके जैसा भी कोई सोता है क्या ? रिटायर हो गये तो इसका मतलब यह नहीं कि दोपहर तक सोते ही रहोगे....! 🤓🤓🤓 2. रिटायर व्यक्ति अगर जल्दी उठ जाये तो.... बीवी: आपको तो बुढापे में नींद आती नहीं , दूसरों को तो सोने दो । एक दिन भी किसी को चैन से सोने नही देते हो , 5:30 बजे उठ कर बड़ बड़ करने लगते हो । अब तो आफिस भी नहीं जाना होता , चुपचाप सो जाइये और सबको सोने दीजिए.....! 🤓🤓🤓 ३. रिटायर व्यक्ति अगर घर पर ही रहे तो.... बीवी: सबेरा होते ही मोबाइल लेकर बैठ जाते हो और चाय पर चाय के लिए चिल्लाते रहते हो , कुछ काम अपने आप भी कर लिया कीजिए । कभी घर से थोड़ा बाहर भी निकला करो , हमें भी चैन की सांस लेने दो । सब लोगों को कुछ न कुछ काम रहता है , यह आदमी दिन भर घर पर निठल्ला बैठा रहता है । यह नहीं होता है कि जल्दी से उठकर नहा धोकर नाश्ता पानी कर लें , अब इनके लिए सब लोग बैठे रहें....! 🤓🤓🤓 4. रिटायर व्यक्ति अगर घर से देर तक बाहर रहे तो.... बीवी : कहाँ थे आप इतनी देर से ? अब नौकरी भी नही है , फिर भी घर पर टिकना नहीं होता । कभी अपने परिवार में भी बैठा करो । कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया करो...! 🤓🤓🤓 5. रिटायर व्यक्ति अगर पूजा करे तो... बीवी : ये घन्टी बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला । अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता , बल्कि किसी पुजारी का नाम होता...! जब देखो कभी माला कभी घंटी , कभी राम राम । 🤓🤓🤓 6. अगर रिटायर व्यक्ति खाली समय में पैसा कमाने के लिए कुछ काम करे तो... बीवी : हर वक़्त काम , काम काम । ये पैसे की मोह माया बुढ़ापे में भी तुम्हे टिकने नहीं देती । हम क्या यहाँ पर बंधुआ मजदूर हैं जो सारा दिन काम करें और शाम को आपका इंतज़ार किया करें.....? 🤓🤓🤓 7. रिटायर व्यक्ति अगर पत्नी को घुमाने के लिए किसी धार्मिक तीर्थ पर ले जाए तो... बीवी : देखिये, सक्सेना जी अपनी बीबी को हर महीने घुमाने ले जाते हैं और वो भी शिमला और दार्जिलिंग जैसी जगहों पर, आपकी तरह "हरिद्वार" नहाने नहीं जाते....! 🤓🤓🤓 8. रिटायर व्यक्ति अगर अपनी जिंदगी भर की बचत से नैनीताल , मसूरी , गोवा , माउन्ट आबू , ऊटी जैसी जगहों पर घुमाने ले भी जाए तो....! बीवी : अपना घर ही सबसे अच्छा , बेकार ही पैसे लुटाते फिरते है । लगता है फालतू पैसे आ गये हैं आपके पास जो ज्यादा ही उछल रहे हैं । अब टिक कर भी बैठना है कि इधर उधर बंजारों की तरह घूमते ही रहना है । क्या रखा है घूमने में ? इतने पैसे से अगर घर पर ही रहते तो पूरे 2 साल के लिए कपड़े खरीद सकते थे , या फिर पूरे घर में पेंट करवा लेते ! 🤓🤓🤓 9.रिटायर व्यक्ति पुराने गानों का शौक़ीन हो तो... ! बीवी: बुढ़ापे में गाने भाते हैं , अब ज्यादा जवानी चढ़ने लगी है , कोई भजन या राम के नाम ही ले लिया करो.....! 🤓🤓🤓 10.रिटायर व्यक्ति अगर मन बहलाने के लिए फोन करे तो....! बीवी : दिन भर फोन पर लगे रहते हो , किस किस को फोन करते हो ? हम तो नहीं करते किसी को.....फोन! 🤓🤓🤓 11. रिटायर व्यक्ति बन ठन कर घर में रहे तो....! बीवी : बुढ़ापे में क्या सिंगार करते हो , जाना है कहीं क्या ? घर में ही सज धज कर बैठे रहते हो , बहुएं क्या कहेंगी...! 🤓🤓🤓 वाह रे ! रिटायर आदमी सभी रिटायर्ड बंधुओं को समर्पित ♥️♥️♥️ #🙏 प्रेरणादायक विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
umashankar
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3 hours ago
बच्चों के नए शैक्षिक सत्र में ध्यान देने योग्य बातें। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने पर सभी अभिभावक नए संकल्प लेने लगते हैं। नए सत्र में अभिभावकों को महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए सभी शैक्षणिक स्कूल अपने दिशा निर्देश नए सिरे से बनाते हैं। जहाँ पर वो अभिभावकों को इस बात के लिए निर्देशित करते हैं कि बच्चे के पढ़ाई और व्यक्तित्व को निखारने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। निम्न बातें बहुत महत्वपूर्ण है- 1. बच्चे का सोने-उठने का नियम होना चाहिए बच्चों के समय पर ना सोने के कारण सुबह उन्हें उठने में परेशानी होती है। वे स्कूल जाने में लेट हो जाते हैं। नींद पूरी न होने के कारण उनके स्वभाव में चिडचिड़ापन आ जाता है इसका असर उनके याद करने की क्षमता पर भी पड़ता है। अगर बच्चे को सुबह 8 बजे स्कूल पहुँचना है तो उसे 7 बजे तैयार हो जाना चाहिए और अगर 7 बजे तैयार होना है तो 6 बजे तो उठना ही होगा। 6 बजे उठने के लिए बच्चे को कम से कम 9 घंटे नींद भी चाहिए तो बच्चे को रात्रि 9 बजे तक सो जाना चाहिए। 9 बजे सोने के लिए उन्हेें 7.30 बजे तक रात्रि का भोजन कर लेना चाहिए। अगर आप रात्रि भोजन 9-9.30 के बीच करते हैं तो बच्चा 11 बजे तक सोएगा फिर उसे सुबह 6 बजे उठने में चिड़चिड़ाहट होगी और इस सबसे बचने के लिए यह जरूरी है कि उसके सोने व उठने का समय तय हो। 2. सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन समय नहीं होना चाहिए। रात्रि 8 बजे तक आप और परिवार को मोबाइल, टी.वी, आईपैड से पूरी तरह दूर हो जाना चाहिए। आज हमें बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने या कंट्रोल करने की जरूरत है। बच्चों का सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन टाइम खत्म हो जाना चाहिए। देखा जाता है कि घर में बड़े भी टीवी या मोबाईल को देखते हुए सोते हैं फिर नींद पूरी नहीं होती व सुबह स्वभाव में चिड़चिड़ापन होता है। अगर आप सोते समय कोई पुस्तक पढ़ते हैं तो नींद भी अच्छी आती है सुबह स्फूर्ति भी बनी रहती है। स्क्रीन समय को कम करने के लिए कुछ नियम बनाए जा सकते हैं - घर में ऐसे कुछ कोने (जोन) बना दिए जाएँ जहाँ टीवी या मोबाइल का चलाना निषेध हो। जैसे बैडरूम - यहाँ आप मोबाइल को बैन कर सकते हैं अथवा जैसे डिनर के समय । लेकिन यहाँ पर अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके लिए आपको भी मोबाइल बंद करना होगा। 3. खाने की आदतें - नए सत्र में हम हर बार नई उमंग और नए उत्साह के साथ शुरू करते हैं, खाने की आदतों के लिए भी कुछ नियम बनाएं। मीठा और नमक यह दोनों बच्चे के मानसिक विकास के लिए हानिकारक हैं। बच्चों के कम से कम किसी एक भोजन में फल अनिवार्य करें। साथ ही आजकल बच्चे पानी कम पीने लगे हैं उसके लिए भी एक नियम बनाएं कि बच्चे ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। बच्चे स्कूल से आते हैं या शाम को खेल कर आते हैं तब उन्हें भूख लग रही होती है । उनके लिए आप कुछ न कुछ खाने के लिए पौष्टिक आहार हेल्दी सैंडविच या शेक, जूस आदि घर में ही तैयार करें उस समय अगर उन्हें तैयार मिलेगा तो वह खा लेगें अन्यथा वह कुछ अनाप-शनाप चीजें खाएंगे। 4. अगर आपका बच्चा 12 साल से छोटा है तो सोने से पहले, उसके साथ कुछ न कुछ पुस्तक पढ़िए, पर अगर बच्चा बहुत छोटा है 4-5 साल का तो उसके साथ भी आप सोने से पहले कुछ न कुछ पुस्तकें पढ़ें-सुनाएँ। जितना छोटा बच्चा हो उतनी आपकी पुस्तक पढ़ने की गति धीमी होनी चाहिए ताकि बच्चे का मस्तिष्क उसे समझ सके। रीडिंग करने से उसे शुरू से ही शब्दावली का ज्ञान अच्छा हो जाएगा। धीरे-धीरे यह उसकी आदत हो जाती है कि सोने से पहले वह आपके पास आयेगा इससे उसकी पुस्तक पढ़ने की आदत का विकास होता है आपके साथ उसका भावनात्मक संबंध और मजबूत बनता है और नियम से सोने की आदत भी सुधरती है। 5. दैनिक जीवन में पेरेन्टिंग- पेरेन्टिंग कोई एक दिन की चर्चा का विषय नहीं है कि केवल परीक्षा से पहले ही पेरेन्टिंग की जाएगी। अगर आप अपने बच्चे का अच्छा विकास चाहते हैं उसके परीक्षा परिणामों को तनाव में नहीं देखना चाहते तो आप रोज ही पेरन्टिंग करने की आदत डालें अर्थात् उसकी डायरी देखे यही नहीं कि बस बच्चे से पूछ लिया कि आपने क्या-क्या पढ़ा, क्या किया तो वह कह देगा सब ठीक चल रहा हे। प्रतिदिन पेरन्टिंग का अर्थ यह है कि आप विस्तार पूर्वक उसके साथ बैठकर यह जाने और देखें कि वह क्या कर रहा है। उसकी जिज्ञासा का उत्तर दें। अगर आप रोज 1 घंटा बच्चे के साथ बिताते हैं तो यह तय है कि आप कभी भी रिजल्ट के लिए हैरान नहीं होंगे। आपको पता होगा कि आपका बच्चा कक्षा में कैसा प्रदर्शन करता है एवं आप लगभग जानते होंगे कि उसके कितने अंक आएंगे । जो अभिभावक रोज अपने बच्चे के लिए समय निकालते हैं उनके बच्चों का प्रदर्शन बहुत बेहतर होता है। 6. आज का समय बदल गया है आपके समय से अब तक पढ़ाई के ढंग में बहुत बदलाव आ गया है नई-नई प्रतियोगिताएं होती रहती हैं, तथा नए-नए अवसर भी बहुत आ रहे हैं। । अध्यापक अपने तरीके से यह सब नई जानकारियां आपको देते हैं मगर आपका जागरूक होना भी आवश्यक है। आप बच्चे के स्कूल अथवा कोचिंग से हर नई बात पता करते रहें। आज सामाजिक मीडिया के बहुत से चैनल हैं उनको देखते रहें तथा उनकी वेबसाइट को भी देखते रहें जिससे नई नई जानकारियां आपको मिलती रहें। अपने बच्चे के दोस्त व उनके माता-पिता से भी संबंध रखें। कोई भी नई जानकारी या नई प्रतियोगिता आए तो बच्चे को उत्साहित करें कि वह प्रतियोगिता में हिस्सा ले। उसका रजिस्ट्रेशन फार्म भरें तथा प्रतियोगिता की तैयारी करवाएं। 7. बच्चे स्वयं इतने समझदार नहीं होते कि वह स्कूल में होने वाली हर घोषणा को सुनें अगर आप रुचि लेते हैं तो बच्चों से इस सम्बन्ध में पूछें और टेस्ट आदि की जानकारी रखें उसको तैयारी करवाएँ यदि टेस्ट देखकर उसे अच्छा लगता है उसे प्रोत्साहित करें। इससे उसका अपने पर विश्वास बढ़ेगा। आप सदा नई-नई जानकारी लेने में रुचि रखें हमेशा यह जिज्ञासा रखें कि क्या नया हो रहा है? इसका परिणाम बहुत अच्छा रहता है। स्कूल की पी टी. एम. में अवश्य जाएं जो अध्यापक कहते हैं उसे ध्यान से सुनें। बहुत सारे स्कूल में केवल दिखावे में मीठी बातें की जाती हैं पेरेंट्स से बोला जाता है कि आपका बच्चा कक्षा मैं अच्छी तरह जवाब देता है मगर पेपर में क्या कर आता है पता नहीं। अगर बच्चे को याद है तो वह अवश्य सही जवाब देगा। बहुत कम स्कूलों में, बहुत कम अध्यापक ऐसे होते हैं जो यह ध्यान देते हैं कि वह अभिभावक को सही बात बताएं । अगर आपके बच्चे की सही प्रदर्शन नहीं हो रहा तो आप सही से अध्यापक से कारण जानें। अगर सही जानकारी मिलती है तो उसकी सराहना करें। ना कि उसके प्रति उग्र प्रदर्शन करें। अन्यथा अध्यापक आगे से आपके बच्चे के बारे में ईमानदारी से नहीं बता पाएंगे। उनसे विचार विमर्श कर अपने आधार पर पढ़ाई के तरीके और नियम बदलें या सुधारें। हमेशा बच्चे के स्कूल प्रबंधन व अध्यापकों का आदर करें अगर आप ऐसा करते हेैं तो वे भी आपको आदर देंगे और आपके बच्चे को भी। तथा आपकी बात को भी सुना जाएगा। यह भी ध्यान रखें कि बच्चे के कितने भी अंक आएं वह अच्छा करे या न करे मगर आप दूसरे के बच्चे से कभी तुलना न कर। कई बार हम तनाव में अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चे से करने लगते हैं या उसी के भाई-बहिन से तुलना करने लगतेे हैं इससे बच्चे के मन में एक झल्लाहट और क्रोध पैदा हो जाता है जो उसके लिए हानिकारक होता है। इसके बजाए आप उसे अपनी कमियों को दूर करने में उसकी मदद करें। उसके पढ़ने के तरीके में बदलाव लाकर उसमें सुधार करने की कोशिश करें ताकि वह बेहतर प्रदर्शन कर सके। 8. हमेशा उसके अच्छे काम की सराहना करें, गलत के लिए उसे सजा भी दें।उसे हमेशा बताएं कि कोई भी सफलता शार्ट कट से नहीं मिलती बहुत मेहनत करनी पड़ती है यह बताना इसलिए आवश्यक है कि क्योंकि आजकल बच्चे सपनों की दुनिया में ज्यादा रहते हैं जैसे पोकीमोन, डोरीमोन, पब जी जैसे गेम, सीरियल आदि देखते हैं जिसमें डोरीमोन एक आलसी सा बच्चा होता है वह काम नहीं करना चाहता और एक कम्प्यूटर उसकी मदद करता है। बच्चे को लगता है कि उनको भी एक ऐसा कम्प्यूटर या हेल्पर मिल जाएगा जो उनका गृहकार्य कर देगा। वह धीरे-धीरे कठिन कार्य करने से या यूँ कहें कि मनानुसार कार्य ना मिलने पर कार्य करने से घबराने लगते हैं। इसलिए उन्हें मेहनत करने का रास्ता बताएं उन्हें ऐसी सफलता की कहानियां सुनाए जिससे उनमें भी जोश और उत्साह रहे। #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार
umashankar
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3 hours ago
एक बुज़ुर्ग शिक्षिका भीषण गर्मियों के दिन में बस में सवार हुई, पैरों के दर्द से बेहाल, लेकिन बस में सीट न देख कर जैसे – तैसे खड़ी हो गई। कुछ दूरी ही तय की थी बस ने कि एक उम्रदराज औरत ने बड़े सम्मानपूर्वक आवाज़ दी, आ जाइए मैडम, आप यहाँ बैठ जाएं” कहते हुए उसे अपनी सीट पर बैठा दिया। खुद वो गरीब सी औरत बस में खड़ी हो गई। मैडम ने दुआ दी, "बहुत-बहुत धन्यवाद, मेरी बुरी हालत थी सच में।उस गरीब महिला के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान फैल गई। कुछ देर बाद शिक्षिका के पास वाली सीट खाली हो गई। लेकिन महिला ने एक और महिला को, जो एक छोटे बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी और मुश्किल से बच्चे को ले जाने में सक्षम थी, को सीट पर बिठा दिया। अगले पड़ाव पर बच्चे के साथ महिला भी उतर गई, सीट खाली हो गई, लेकिन नेकदिल महिला ने बैठने का लालच नहीं किया* । *बस में चढ़े एक कमजोर बूढ़े आदमी को बैठा दिया जो अभी - अभी बस में चढ़ा था। सीट फिर से खाली हो गई। बस में अब गिनी – चुनी सवारियां ही रह गईं थीं। अब उस अध्यापिका ने महिला को अपने पास बिठाया और पूछा, सीट कितनी बार खाली हुई है लेकिन आप लोगों को ही बैठाते रहे, खुद नहीं बैठे, क्या बात है? महिला ने कहा, मैडम, मैं एक मजदूर हूं, मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं कुछ दान कर सकूं। तो मैं क्या करती हूं कि कहीं रास्ते से पत्थर उठाकर एक तरफ कर देती हूं, कभी किसी जरूरतमंद को पानी पिला देती हूं, कभी बस में किसी के लिए सीट छोड़ देती हूं, फिर जब सामने वाला मुझे दुआएं देता है तो मैं अपनी गरीबी भूल जाती हूं । दिन भर की थकान दूर हो जाती है । और तो और, जब मैं दोपहर में रोटी खाने के लिए बैठती हूं ना बाहर बेंच पर, तो ये पंछी - चिड़ियां पास आ के बैठ जाते हैं, रोटी डाल देती हूं छोटे-छोटे टुकड़े करके । जब वे खुशी से चिल्लाते हैं, तो उन भगवान के जीवों को देखकर मेरा पेट भर जाता है। पैसा धेला न सही, सोचती हूं दुआएं तो मिल ही जाती है ना मुफ्त में। फायदा ही है ना और हमने लेकर भी क्या जाना है यहां से। शिक्षिका अवाक रह गई, एक अनपढ़ सी दिखने वाली महिला इतना बड़ा पाठ जो पढ़ा गई थी उसे।अगर दुनिया के आधे लोग ऐसी सोच को अपना लें तो धरती स्वर्ग बन जाएगी। दान धन से नहीं, मन से होता है। 🌹🙏 🙏 🙏 #🙏 प्रेरणादायक विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
umashankar
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3 hours ago
"आपसी तालमेल..... सुधा जी अपने कमरे में बड़बड़ाती हुए घुसी.... सब अपने मन की करते रहते है....मेरी तो कोई सुनता ही नहीं है.... पत्नी का चेहरा गुस्से से तमतमाए देखते हुए मोहनबाबू ने पूछा....क्या हो गया सुधा....किस पर बड़बड़ा रही हो... हूं..... पूछ तो ऐसे रहे हो जैसे कुछ जानते ही नहीं..... वही तुम्हारी लाडली बहू.....आज उसका मन हो गया कि एयर कंडीशन खरीदना है तो शाम तक देखना खरीद कर ही मानेगी.... मैंने उससे कहा कि पंखे है कूलर है ....इनमें भी तो ठंडी हवा तो आती है.... मगर कोई मेरी सुनता ही नही... सुमित तो उसका गुलाम हो गया है तुम देखना दिला ही देगा....जोरु का गुलाम जो ठहरा..... मोहनबाबू समझ गए कि रिश्तो की आपसी खींचतान का असर केवल सास बहू पर ही नही बल्कि पूरे घर होगा... उन्होंने अपनी पत्नी सुधाजी से कहा....सुधा...बैठो मेरे पास....तुमसे कुछ बात करनी है.... सुधा जी बडबडाते हुए पलंग पर मोहनबाबू के समीप बैठ गई....तब मोहनबाबू ने कहना शुरू किया... सुधा ....याद है तुमको कि गर्मी के दिनों में जब हमारी नई नई शादी हुई थी तब हम दिन का समय कैसे व्यतीत किया करते थे.... अरे याद क्यो नहीं ....मुझे सब अच्छे से याद है उस जमाने में कूलर वगैरह तो आते नहीं थे तब तुम खस की पट्टियां बाजार से लेकर आते थे और उन्हें गीला कर के पंखे के सामने बाँध देते थे, ताकि मुझे गर्मी ना लगे... तुम कितना ख्याल रखते थे मेरा उस समय... जबकि मां जी पीछे से चिल्ला....ती...... ऐसा कहते कहते अचानक सुधा जी की नजर मोहनबाबू पर जा टिकी और वह सब समझ गई कि मोहनबाबू उन्हें क्या समझाना चाहते है.... मोहनबाबू ने प्यार से सुधाजी का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा....देखो सुधा....वह सिर्फ तुम्हारी बहू ही नही सुमित की पत्नी भी है जो अपेक्षाएं तुम्हारी मुझसे थी... वही अपेक्षाएं बहू की सुमित से भी होंगी... और यही जमाने का दस्तूर भी है अगर पत्नी अपने पति से नहीं तो और किस से अपेक्षा रखेगी कि कोई उसके दुख दर्द को समझे और उस की सुविधाओं का ध्यान रखें... हमारे जमाने में तो कूलर भी नहीं थे तो एयर कंडीशनर की कहां से सोचते, आज जब चीजें उपलब्ध है और हमारा सामर्थ्य हैं तो क्यों ना सुविधाओं का लाभ उठाएं...और सुधा हमारे दोनों बच्चे बहुत अच्छे है वे हम दोनों के बारे में अच्छा ही सोचते है फिर क्यो हम गलत धारणा बना कर आपसी विश्वास को कमजोर करे.. जय जिनेंद्र जी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार
umashankar
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3 hours ago
कल एक बुजुर्ग को एक आदमी बोला कि पहले इतने लोग बिमार नहीं होते थे जितने आज हो रहे हैं तो बुजुर्ग ने अपने तजुर्बे से उसको बोला कि भाईजी पहले कूटने की परंपरा थी जिससे इम्यूनिटी पावर मजबूत रहता था पहले हम हर चीज को कुटते थे जबसे हमने कुटना छोड़ा है तब से हम सब बिमार होने लग गए जैसे पहले खेत से अनाज को कुट कर घर लाते थे, घर में मिर्च मसाला कुटते थे, कभी कभी तो बड़ा भाई भी छोटे को कुट देता था और जब छोटा भाई उसकी शिकायत मां से करता था तो मां बड़े भाई को कुट देती थी और कभी तो दादाजी भी पोते को कुट देते थे यानी कुल मिलाकर दिन भर कुटने का काम चलता रहता था कभी मां बाजरा कुट कर शाम को खिचड़ी बनाती , पहले हम कपड़े भी कुट कर धोते थे स्कूल में मास्टरजी भी कुटते थे जहां देखो वहां पर कुटने का काम चलता रहता था तो बिमारी नजदीक नहीं आती थी सबका इमुनिटी पावर मजबूत रहता था जब कभी बच्चा सर्दी में नहाने से मना करता था तो मां पहले कुट कर उसकी इमुनिटी पावर बढ़ाती थी और फिर नहलाती थी👌 वर्तमान समय में इम्यूनिटी iपावर बढ़ाने के लिए कूटने की परंपरा फिर से चालू होनी चाहिए😝lजयजिनेन्द्र 🙏 #😂फनी जोक्स🤣