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विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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1 months ago
#❤️जीवन की सीख “रानी लक्ष्मीबाई का पैतृक गाँव धावड़शी” 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का पैतृक गाँव (मूल मायका) महाराष्ट्र के सातारा जिले का धावड़शी (Dhawadshi) है। दस साल पहले इस गांव पहुंचने पर मुझे रानी लक्ष्मीबाई का तांबे वाड़ा ढूंढने में दिक्कत हुई क्योंकि वहां न कोई बोर्ड लिखा था,न कोई इतिहास की जानकारी लिखी थी। गांव के चौराहे पर भविष्य के कीर्तिमान नेताओं के और उनके बच्चों के जन्म दिवस शुभकामना के पोस्टर जरूर लगाए गए थे। मंदिर के पुजारी ने तांबे वाड़ा पहुंचा दिया। रानी लक्ष्मी बाई के रिश्तेदार वहां अपना जीवन यापन करते है। बहुत गरीब मध्य वर्गीय परिवार। घर का खस्ता हाल था। कहीं दीवारे ढह गई थी कही पुराने ईंटों ने अपना स्थान छोड़कर ज़मीन के साथ शरण ली थी । घरवालों ने वह जगह दिखाई जहां रानी लक्ष्मी बाई का बचपन गुजरा था वहां अब गाय भैंस का तबेला था। यह सब देखकर बहुत दुःख हुआ। घरवालों ने जलपान का प्रबंध किया था । रानी लक्ष्मीबाई के पिता मोरोपंत तांबे और माता भागीरथीबाई तांबे मूल रूप से धावड़शी गाँव के निवासी थे। बाद में व्यावसायिक कारणों से यह परिवार उत्तर प्रदेश के काशी (वाराणसी) में बस गया, जहाँ 19 नवंबर 1835 को रानी लक्ष्मीबाई (बचपन का नाम: मणिकर्णिका या मनु) का जन्म हुआ। धावड़शी गाँव और 'तांबे वाड़ा' (तांबे हवेली) का विस्तृत इतिहास इस प्रकार है: 📜 तांबे वाड़ा का ऐतिहासिक महत्व और निर्माण कोंकण से धावड़शी आगमन: तांबे परिवार मूल रूप से कोंकण (रत्नागिरी) का रहने वाला था। इस परिवार के पूर्वज विष्णुराव तांबे, सातारा के प्रसिद्ध संत श्री ब्रह्मेंद्रस्वामी धावड़शीकर के अनन्य भक्त थे। स्वामी जी की सेवा में रहने के लिए वे कोंकण छोड़कर सातारा के पास धावड़शी आ गए और वहाँ अपना 'तांबे वाडा' (हवेली) बनवाया। पराक्रमी कृष्णाजी तांबे: विष्णुराव तांबे के पुत्र कृष्णराव (कृष्णाजी) तांबे (जन्म 1719) एक महान विद्वान और शूरवीर योद्धा थे। उनकी बहादुरी से प्रभावित होकर बाजीराव पेशवा (प्रथम) ने उन्हें पुणे बुलाया। कृष्णाजी ने बाजीराव पेशवा के साथ प्रसिद्ध 'बुंदेलखंड अभियान' में अद्भुत वीरता दिखाई। इसके बाद उन्हें हमीरपुर और बांदा की सूबेदारी सौंपी गई। पुणे में दूसरा तांबे वाडा: धावड़शी की हवेली के बाद, कृष्णाजी तांबे के पराक्रम से खुश होकर बाजीराव पेशवा ने उन्हें पुणे में भी एक 'तांबे वाडा' उपहार स्वरूप बनवाकर दिया था। रानी लक्ष्मीबाई का संबंध: इसी पराक्रमी तांबे घराने में आगे चलकर मोरोपंत तांबे का जन्म हुआ, जिनकी सुपुत्री क्रांतिदेवता मणिकर्णिका (रानी लक्ष्मीबाई) बनीं। इसलिए इतिहास प्रेमियों के लिए यह हवेली एक अत्यंत पवित्र 'प्रेरणा स्थल' है। 🏛️ वर्तमान स्थिति और भव्य स्मारक की मांग सद्यस्थिति: समय के साथ मूल तांबे वाड़ा का काफी हिस्सा ढह चुका है और अब इसके अवशेष ही बचे हैं। लेकिन गाँव का इतिहास आज भी रानी लक्ष्मीबाई की यादों को संजोए हुए है। राष्ट्रीय स्मारक की मांग: धावड़शी गाँव में रानी लक्ष्मीबाई के इस पैतृक निवास स्थान पर एक भव्य राष्ट्रीय स्मारक बनाने और इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की मांग स्थानीय ग्रामीणों और इतिहासकारों द्वारा लगातार की जा रही है। 📍 धावड़शी गाँव की अन्य विशेषताएं भौगोलिक स्थिति: यह गाँव सातारा शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर मेरुलिंग पर्वत श्रृंखला के बीच बसा एक खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थान है। ऐतिहासिक भार्गवराम (परशुराम) मंदिर: यहाँ काले पत्थरों को तराशकर बनाया गया एक अद्भुत परशुराम मंदिर है, जिसके निर्माण में छत्रपति शाहू महाराज का विशेष योगदान था। ब्रह्मेंद्रस्वामी समाधी: पेशवा काल की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले परमहंस ब्रह्मेंद्रस्वामी की समाधि भी इसी गाँव में स्थित है। **** जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी, तेरा स्मारक तू ही होगी, तू ख़ुद अमिट निशानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। ~ सुभद्रा कुमारी चौहान अप्रतिम शौर्य की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏 #झांसी की रानी लक्ष्मीबाई #रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि #🌸रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस 🙏 #💐रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि🙏🕯️
विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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1 months ago
200 रुपये का 'कर्ज' और 30 साल का 'फ़र्ज़'...! ❤️✨ एक तरफ जहाँ करोड़ों रुपये डकार कर देश से भाग जाने वाले बड़े-बड़े उद्योगपतियों की ख़बरों से अखबार रंगे रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ ईमानदारी की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो हमारे दिल को छू लेती है और इंसानियत पर भरोसा गहरा कर देती है। यह कहानी है केन्या के वर्तमान सांसद रिचर्ड टोंगी की। 📅 फ्लैशबैक (1989): बात करीब 30 साल पुरानी है। रिचर्ड तब भारत के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के मौलाना आज़ाद कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। परदेस में अकेले, जेब खाली और खाने-पीने की किल्लत। ऐसे मुश्किल दिनों में कॉलेज के पास ही किराना दुकान चलाने वाले काशीनाथ गवली काका उनके तारणहार बने। काका ने न सिर्फ उन्हें रहने के लिए छत दिलाई, बल्कि अपनी दुकान से राशन भी दिया। जब रिचर्ड अपनी पढ़ाई पूरी कर वापस केन्या लौटे, तो अनजाने में काका के ₹200 का उधार उनके सिर बाकी रह गया था। 🚀 वक्त बदला, रुतबा बदला... पर संस्कार नहीं बदले! केन्या लौटकर रिचर्ड ने राजनीति में कदम रखा, बड़ी सफलता पाई और वहाँ के रक्षा व विदेश मंत्रालय की समिति के उपाध्यक्ष (सांसद) बन गए। रसूख और पैसा तो आ गया, लेकिन भारत की वो मिट्टी और गवली काका के ₹200 का 'कर्ज' वो कभी नहीं भूले। ✈️ 30 साल बाद 'घर' वापसी: हाल ही में जब वे केन्या सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए, तो दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद उनके कदम सीधे छत्रपति संभाजीनगर की ओर मुड़ गए। दो दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने गवली काका का घर ढूँढ ही निकाला। जब 30 साल बाद दोनों आमने-सामने आए, तो शब्दों की जगह आँखों से आँसू बहने लगे। काका तो इस छोटी सी बात को भूल भी चुके थे, लेकिन जब रिचर्ड ने याद दिलाया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। "लोग कहते हैं कि पैसे लौटाना ईमानदारी है, लेकिन यह ईमानदारी मैंने इसी भारत देश की मिट्टी से सीखी है और मुझे इस बात पर गर्व है!" — भावुक होकर रिचर्ड टोंगी ने कहा। पारंपरिक स्वागत और अटूट रिश्ता: गवली परिवार ने भी अपने इस विदेशी 'बेटे' और बहू (मिशेल) का स्वागत पूरे पारंपरिक मराठी अंदाज में टोपी, तौलिया और साड़ी देकर किया। रिचर्ड ने उनके घर बड़े चाव से खाना खाया और काका को केन्या आने का न्योता भी दिया। 💡 ईमानदारी कोई सिलेबस देखकर नहीं सीखी जाती, यह तो बस लहू में होती है। पद और प्रतिष्ठा चाहे कितनी भी बड़ी हो जाए, बुरे वक्त में काम आए इंसानों को और अपने संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए। रिचर्ड टोंगी ने आज पूरी दुनिया को 'प्रामाणिकता' का एक खूबसूरत पाठ पढ़ाया है। 🙏🇮🇳🇰🇪 #Humanity #Inspiration #Honesty #Indiakenya #HeartWarming #StoryOfTheDay #ChhatrapatiSambhajinagar #TrueStory #ViralStories #RelationshipGoals #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान
विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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2 months ago
मेरी पुस्तक "राजभाषा हिंदी कार्यशाला" अब सशुल्क पोथी.कॉम पोर्टल पार उपलब्ध है। यह पुस्तक मुख्य रूप से उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और शैक्षणिक संस्थानों में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन और प्रशिक्षण से जुड़े हैं। सरकारी और प्रशासनिक क्षेत्रों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को राजभाषा नीति के नियमों से अवगत कराना और उन्हें कार्यालयीन कामकाज हिंदी में करने के लिए व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाना ही इस पुस्तक का प्राथमिक उद्देश्य है। यह पुस्तक हिंदी कार्यशालाओं (Workshops) के आयोजन के लिए एक मुकम्मल गाइड की तरह काम करती है। "राजभाषा हिंदी कार्यशाला" केवल सैद्धांतिक नियमों की किताब नहीं है, बल्कि सरकारी दफ्तरों में हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अनिवार्य 'हैंडबुक' (Manual) की तरह है। कृपया इच्छुक पाठक,शोधार्थी,हिंदी कर्मी, छात्र इसका लाभ उठाएं। आपकी प्रतिक्रियाएं और सुझावों का स्वागत है। ( लिंक नीचे कमेंट बॉक्स में उपलब्ध है) 🙏 विजय नगरकर सेवानिवृत्त राजभाषा अधिकारी बीएसएनएल अहिल्यानगर महाराष्ट्र vpnagarkar@gmail.com #hindi #हिंदी #राजभाषा #कार्यशाला https://pothi.com/pothi/book/ebook-vijay-prabhakar-nagarkar-rajbhasha-hindi-karyashala #💼सरकारी सेवा और योजना 👷 #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #📚एजुकेशन टिप्स & ट्रिक्स✍ #✍🏻भारतीय संविधान📕 #📚एजुकेशनल ज्ञान📝
विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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2 months ago
"एक देव, एक देश, एक आशा। एक जाति, एक जीव, एक भाषा।" — यह पंक्ति स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) की है। यह संदेश सावरकर ने अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल (कालापानी) में कैद हिंदू कैदियों को दिया था। विशेष रूप से, जब वे और उनके भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव) 1921 या 1924 के आसपास रिहा हो रहे थे, तब उन्होंने अपने सह-कैदियों को यह संदेश/शपथ दी। यह अंडमान जेल में हिंदू संगठन के उनके प्रयासों का हिस्सा था। जेल में सावरकर ने हिंदू कैदियों के बीच: - शिक्षा - सांस्कृतिक जागृति - एकता - शुद्धिकरण (धर्मांतरण रोकने के लिए) का काम किया। यह शपथ राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और हिंदू संगठन का प्रतीक बन गई। यह उनके हिंदुत्व विचारधारा से जुड़ी है, जिसमें भारत को हिंदुओं की पितृभूमि और पुण्यभूमि मानते हुए एक मजबूत, एकीकृत राष्ट्र बनाने पर जोर दिया गया। अर्थ और व्याख्या: - एक देव — एक ईश्वर (धार्मिक एकता, मूर्तिपूजा या संप्रदाय से ऊपर एक सामान्य आध्यात्मिक चेतना)। - एक देश — एक राष्ट्र (अखंड भारत, क्षेत्रीय या सांप्रदायिक विभाजन से ऊपर)। - एक आशा — एक आकांक्षा/उद्देश्य (स्वतंत्रता, राष्ट्र-निर्माण)। - एक जाति — एक समुदाय/जाति (हिंदू समाज में जाति-भेद मिटाकर एक सामूहिक पहचान)। - एक जीव — एक जीवन/एक आत्मा (सभी हिंदू एक जीवित इकाई के रूप में)। - एक भाषा — एक भाषा (हिंदी को प्रोत्साहन, जेल में उन्होंने उर्दू के बजाय हिंदी को lingua franca बनाया)। यह एकता के सूत्र को दर्शाता है — "एक राष्ट्र, एक संस्कृति" की भावना। सावरकर का मानना था कि विविधता के बावजूद राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए साझा पहचान आवश्यक है। यह उद्धरण सावरकर की समग्र विचारधारा का हिस्सा है: - उन्होंने हिंदुत्व शब्द को लोकप्रिय बनाया (हिंदू कौन है? पुस्तक)। - जाति-प्रथा और छुआछूत के घोर विरोधी थे। - अखंड भारत के प्रबल समर्थक थे। - जेल में रहते हुए भी उन्होंने हिंदू कैदियों को संगठित कर "इस्लामी प्रभुत्व" को चुनौती दी। यह शपथ आज भी हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों और कार्यकर्ताओं में प्रेरणा का स्रोत है। कई समारोहों और स्मरण सभाओं में इसे दोहराया जाता है। यह उद्धरण सावरकर की अदम्य इच्छाशक्ति और जेल की कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र-निर्माण की उनकी दूरदृष्टि को दर्शाता है। वे मानते थे कि बाहरी दुश्मन से लड़ने के लिए आंतरिक एकता जरूरी है। संदर्भ: savarkar.org (आधिकारिक साइट) — Q&A सेक्शन। - बाबाराव सावरकर की जीवनी और संबंधित दस्तावेज। - अंडमान जेल के कैदियों के संस्मरण और ऐतिहासिक लेख। #📓 हिंदी साहित्य #🌸 सत्य वचन #★ वीर सावरकर जयन्ती #हिन्दूह्रदयसम्राट स्वातंत्रवीर सावरकर 💥🔥🇲🇰 #👆🌼🌺🙏😍वीर सावरकर जी 😊🤗🥰🌸👌 ~ विजय नगरकर अहिल्यानगर, महाराष्ट्र
विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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2 months ago
“मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!” आज मीडिया में मेलडी चॉकलेट की चर्चा है। जानिए मेलडी चॉकलेट के निर्माता पार्ले जी की कहानी 🍬 एक 'गुमनाम' फैक्ट्री, एक 'नन्हीं प्यारी नटखट लड़की' और मिठास की क्रांति! 🇮🇳 क्या आप जानते हैं कि भारत के सबसे बड़े ब्रांड का नाम असल में 'गलती' से पड़ा था? यह कहानी है उस परिवार की, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ 'कैंडी वॉर' छेड़ दिया था! 🏭 नाम रखना ही भूल गए! बात 1929 की है। मोहनलाल दयाल चौहान जर्मनी से मिठाई बनाने की एक विशाल मशीन लेकर आए और मुंबई के विले पार्ले में एक पुरानी फैक्ट्री शुरू की। काम का इतना जुनून था कि वे कंपनी का नाम रखना ही भूल गए! जब लोग पूछते कि ये मिठाइयां कहाँ बनी हैं, तो जवाब मिलता— "वही पार्ले वाली फैक्ट्री में।" और बस, इस तरह 'पार्ले' (Parle) का जन्म एक इत्तेफाक से हुआ। 💋 Kismi: पहला 'रोमांटिक' स्वदेशी प्रयोग 60 के दशक तक भारत में अंग्रेजों की महंगी लेमन-चूस (Lozenges) का राज था। पार्ले ने इसे चुनौती दी 'Kismi' के साथ। यह सिर्फ एक टॉफी नहीं थी; यह अंग्रेजी च्यूइनेस और भारतीय इलायची-कैरामेल का एक अनोखा मेल था। नाम रखा 'Kiss-Me' ताकि युवाओं को कूल लगे, लेकिन स्वाद रखा 100% 'स्वदेशी'। 🌈 गर्मी में भी न पिघलने वाला इंद्रधनुष क्या आपको Poppins के वो रंगीन गोले याद हैं? भारतीय गर्मी में अक्सर गोलियां पिघलकर एक कत्थई चिपचिपा ढेर बन जाती थीं। पार्ले के इंजीनियरों ने एक 'केमिकल मार्वल' तैयार किया—एक ऐसी Dry-Glaze कोटिंग जो 10 अलग-अलग फ्लेवर्स को एक ही रोल में बिना एक-दूसरे को छुए सुरक्षित रखती थी। 🌾 जब देश के लिए 'गेहूँ' छोड़ दिया 1947 के बंटवारे में जब अनाज की भारी कमी हुई, तो पार्ले ने अपने मशहूर 'ग्लूको' बिस्किट का उत्पादन रोक दिया क्योंकि गेहूँ कम था। उन्होंने जौ (Barley) से बिस्किट बनाए ताकि कोई शरणार्थी भूखा न रहे। मुनाफे से पहले राष्ट्र को रखने की इसी जिद ने Parle-G को दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट बना दिया। 👧 कौन है वो रहस्यमयी लड़की? नीरू देशपांडे या सुधा मूर्ति? सालों से बहस जारी है! लेकिन सच तो यह है कि वह 'पारले गर्ल' कोई असली इंसान नहीं, बल्कि 60 के दशक में कलाकार मगनलाल दहिया द्वारा बनाया गया एक काल्पनिक चित्र (Illustration) है। एक ऐसी 'नन्हीं रूह' जो आज भारत के हर घर की रसोई में रहती है। मिठास का यह साम्राज्य किसी बोर्डरूम में नहीं, बल्कि उस भारतीय रसोई में बना जिसने अंग्रेजों की रेसिपी को अपनाने से इनकार कर दिया था। आज जब आप लाल-सफेद कागज वाली Kismi खोलें या Poppins का इंद्रधनुष निकालें, तो याद रखिएगा—ये सिर्फ टॉफियां नहीं, भारत की आत्मनिर्भरता का स्वाद हैं! ❤️ #Parle #HistoryOfIndia #Kismi #ParleG #SuccessStory #MadeInIndia #Nostalgia #IndianBrands #IncredibleIndia #☝ मेरे विचार #🧒मेरा बचपन #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🇮🇳 हम है हिंदुस्तानी