#RealKnowledgeOf_Bible

sandeep
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1 महीने पहले
##RealKnowledgeOf_Bible भ्रांति : ईसाई धर्म की मान्यता है कि क्रस किये जाने के तीन दिन बाद ईसा मसीह फिर से जिंदा हो गए थे। सच्चाई : जबकि यह बात पूर्णतः सत्य नहीं है। संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा ही भक्ति की आस्था बनाए रखने के लिए ईसा जी की मृत्यु के पश्चात् ईसा जी का रूप धारण करके प्रकट होकर ईसाईयों के विश्वास को प्रभु भक्ति पर दृढ़ रखा था, नहीं तो ईसा जी के पूर्व चमत्कारों को देखते हुए ईसा जी का अंत देखकर कोई भी व्यक्ति भक्ति साधना नहीं करता और वे नास्तिक हो जाते। जिसका प्रमाण पवित्र बाइबिल में यूहन्ना ग्रन्थ अध्याय 16 श्लोक 4-15 में दिया गया है कि जिसे ईसाई धर्म के लोग शैतान कहते हैं, वह वास्तव में ब्रह्म काल जिसका प्रमाण पवित्र श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 21, 32 में है, यह शैतान काल यही चाहता है कि कोई भक्ति न करे यानि सभी नास्तिक बन जायें।
sandeep
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1 महीने पहले
##RealKnowledgeOf_Bible ईसाई धर्म हो या मुसलमान धर्म पुनर्जन्म को नहीं मानते। इनकी धारणा है कि एक बार सभी मरते जायेंगे और इन्हें कब्रों में दबाते जायेंगे। जब कयामत (प्रलय) आएगी तो परमात्मा अच्छे कर्म करने वालों को स्वर्ग में और बुरे कर्म करने वालों को नरक में डालेगा। जबकि संत रामपाल जी महाराज जी जीवनी हजरत मुहम्मद पुस्तक के पृष्ठ 161, 164-165 से स्पष्ट करते हैं कि मुहम्मद जी ने ऊपर हजरत आदम, ईसा, मूसा, दाऊद, अब्राहिम सभी को देखा। जबकि मुसलमान धर्म और ईसाई धर्म के अनुसार अभी कयामत आई ही नहीं। जिससे स्पष्ट है कि पुनर्जन्म की धारणा इन दोनों ही धर्म में गलत है। ✝️ईसा मसीह का जन्म एक देवता से हुआ। प्रमाण : पवित्र बाईबल मती रचित सुसमाचार मती=1ः25 पृष्ठ नं. 1-2 पर। ईसा मसीह की पूज्य माता जी का नाम मरियम तथा पूज्य पिताजी का नाम यूसुफ था। परन्तु मरियम को गर्भ एक देवता से रहा था। इस पर यूसुफ ने आपत्ति की तथा मरियम को त्यागना चाहा तो स्वपन में (फरिश्ते) देवदूत ने ऐसा न करने को कहा तथा यूसुफ ने डर के मारे मरियम का त्याग न करके उसके साथ पति-पत्नी रूप में रहे। देवता से गर्भवती हुई मरियम ने ईसा को जन्म दिया। ✝️ ईसा जी भगवान नहीं थे, वह तो एक ईश्वर की भक्ति बताते थे हजरत ईसा जी को भी पूर्ण परमात्मा सत्यलोक से आकर मिले तथा एक परमेश्वर का मार्ग समझाया। इसके बाद ईसा जी एक ईश्वर की भक्ति समझाने लगे। लोगों ने बहुत विरोध किया। बीच-बीच में ब्रह्म(काल) के फरिश्ते हजरत ईसा जी को विचलित करते रहे तथा वास्तविक ज्ञान को दूर रखा।
sandeep
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1 महीने पहले
##RealKnowledgeOf_Bible भ्रांति : ईसाई धर्म के लोग मानते हैं कि ईसा मसीह अर्थात जीसस स्वयं प्रभु यानी गॉड थे। सच्चाई : जबकि बाइबिल इब्रियों 1:5, मैथ्यू 17:5, मार्क 1:11 व ल्यूक 20:13 में बताया गया है कि यीशु (ईसा मसीह) को भगवान द्वारा पूर्ण परमात्मा का संदेश देने के लिए भेजा गया था। वे ईश्वर के पुत्र अर्थात दूत थे। जिससे स्पष्ट होता है कि ईसा जी प्रभु नहीं थे बल्कि प्रभु के पुत्र अर्थात दूत थे।