🎁भक्ति विनर

@Nikesh Singh
856 views
3 days ago
सती अनुसूया और त्रिदेव अहंकार और परीक्षा की योजना एक बार देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती के बीच स्वयं को श्रेष्ठ पतिव्रता सिद्ध करने की बहस छिड़ गई। जब त्रिदेवों ने ऋषि अत्रि की पत्नी माता अनुसूया को सर्वश्रेष्ठ बताया, तो ईर्ष्यावश देवियों ने त्रिदेवों को उनकी परीक्षा लेने के लिए विवश किया। त्रिदेवों का आगमन और अनुचित शर्त ब्रह्मा, विष्णु और महेश साधु का वेश धरकर महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे। उस समय ऋषि आश्रम में नहीं थे। साधुओं ने अनुसूया के सामने भोजन ग्रहण करने के लिए एक अत्यंत कठिन शर्त रखी—कि वे उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराएं। सती का संकल्प और चमत्कार माता अनुसूया धर्म संकट में पड़ गईं, किंतु अपने तपोबल से उन्होंने जान लिया कि ये साधु स्वयं त्रिदेव हैं। उन्होंने अपने पति का स्मरण कर संकल्प किया कि यदि उनका पतिव्रत सच्चा है, तो ये तीनों साधु छह मास के शिशु बन जाएं। क्षण भर में त्रिदेव बालक बन गए। इसके बाद माता ने उन्हें वात्सल्य भाव से भोजन कराया। देवियों का पश्चाताप और वरदान जब सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और त्रिदेव वापस नहीं आए, तब तीनों देवियाँ लज्जित होकर आश्रम पहुँचे और माता अनुसूया से क्षमा मांगी। माता ने शिशुओं को पुनः उनके वास्तविक रूप में बदल दिया। अनुसूया की भक्ति से प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया और उनके पुत्रों के रूप में जन्म लिया: दत्तात्रेय (विष्णु के अंश) दुर्वासा (शिव के अंश) चंद्रदेव (ब्रह्मा के अंश) निष्कर्ष: यह कथा सिद्ध करती है कि जहाँ निष्काम भक्ति और चरित्र की शुद्धता होती है, वहाँ स्वयं ईश्वर को भी झुकना पड़ता है। राधे राधे #🙏भक्ति 🌺 #🙏शाम की आरती🪔 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️