संसार के तमाम उपासक उपासिका आठ शिल ग्रहण करके उपोसथ का पालन क्यों ओर किसलिए करते हैं?
ये सवाल बहोत सीधा लगता हैं, लेकिन भगवान की वचन की गंभीरता से समझेंगे तो इसके लाभ ओर आध्यात्मिकता भी जीवन मे सहज भाव से उतर सकती हैं |
भगवान कहते हैं की,
" उपासका - उपासिकायों सद्धाय चित्तेन अठ्ठसिलानी
रक्खीत्वा च उपोसथानं धारयन्ति |
ते जीवितेसूं बहु पुण्यकम्मानि करित्वा च
अंतमसो सुगतिनं गच्छन्ति |
अर्थात, उपोसथ के दिन उपासक उपासिका आठ शिलो को ग्रहण करके उसका कड़ाई से पालन करते हैं | उपोसथ धारण करके वे अपने जीवन मे बहुत पुण्यकर्म करते है | ओर अंतिमत: उसी पुण्य कर्म के हेतु वे सुगती को भी प्राप्त होते | "
संसारी जीवन मे उपासक उपासिकावो के लिए उपोसथ का पालन करना ये एक ऐसा सरल मार्ग हैं की, जिस मार्ग की माध्यम मे उपासक उपासिका अपनी जीवन मे अनगिनत पुण्य का संचय कर सकते हैं | क्युकी, उपासक उपासिकावो के जीवन के जो कर्तव्य हैं, पारिवारिक, सामाजिक आदि जो जिम्मेदारियां हैं वो नैतिकता से निभाना इतना आसान काम नहीं हैं के जितना हम उसके बारे मे सोचते हैं | बहोत सारी ऐसी उनके जीवन मे उलझने उत्पन्न होती हैं के जिनको सुलझाना उनके लिए ओर उनके परिवार के लिए एक प्रकार की काटो पर चलनेवाली कसरत बन जाती हैं | धन कमाना, परिवार का पालन पोशन करना, बच्चों की शिक्षा, शादिया आदि जिसमे उपासक उपसिकावो को कभी कभी जीवन मे चैन से सांस लेने को भी फुरसत नहीं मिलती | ओर देखते -देखते जीवन मृत्यु की आख़िरी घड़ी कब उनके सामने खड़ी होती हैं, इसका वे कभी कभी अंदाजा भी नहीं लगा सकते |
संसार की ये सब स्थिति जानकर ही भगवान ने संसार को " संसारोगा महाब्भया " कहा हैं | अर्थात, संसार एक महा भयानक रोग हैं की, जिनको वो जकड़ लेता हैं उनकी मरते दम तक, ओर न जाने कितने अनंत काल तक उसका संक्रमण होता हैं, जिसके कारण संसारके सत्व दुःख, पीड़ा आदि मे पीसते रहते हैं |
लेकिन, उपासक उपासिकावो के लिए अपनी आध्यात्मिक यात्रा सुगम करने के लिए , ओर अपनी सुगती को प्राप्त करने के लिए उपोंसथ ये एक बहोत ही सीधा मार्ग हैं |
क्युकी, उपसथ के दिन उपासक उपासिका भले ही वे इस संसार मे रहते हैं, लेकिन उस दिन वे आठ शिलो का पालन करके शारीरिक ओर मानसिक रुप से भी एक अनासक्त जीवन व्यतीत करने का प्रयास करते है! जिनके कारण धीरे - धीरे ही क्यों न हो पर अंतिमता वे अपनी निर्वाण की यात्रा की ओर निकल पड़ते हैं | इसी कारण संसार के तमाम उपासक उपासिका उपोसथ का पालन करते है, ताकी इस संसार के दुःख से कभी न कभी मुक्ती मिले!
अनंत मैत्री के साथ...
Bkanya Arya
संसार के सभी सत्व सुखी एवं निब्बागामि हो..!
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भवतु सब्ब मंगलं...!
#अस्तिधातु☸️🪷🛐भगवान #नमो बुद्धाय नमो धम्माय नमो संघाय #☸️🪷 उपोसत 🪷☸️ #🪷 उपोसत 🪷 #उपोसत