#🌹 सुविचार 🌹 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌹🙏 श्री हरि 🙏🌹 #🙏🌹सुप्रभात 🌹🙏 माँ के पेट में नौ महीने तक थे, कोई दुकान तो चलाते नहीं थे, फिर भी जिए !
हाथ-पैर भी न थे कि भोजन कर सको, फिर भी जिए।
श्वास लेने का भी कोई उपाय न था, फिर भी जिए।
आखिर नौ महीने माँ के पेट में तुम कैसे जिए ?
तुम्हारी मर्जी क्या थी ?
किसकी मर्जी से जिए ? 🌱
फिर माँ के गर्भ से जन्म हुआ। तुम्हारे जन्मते ही, बल्कि जन्म के पहले ही, माँ के स्तनों में दूध भर आया।
अभी दूध को पीने वाला आने ही वाला है कि दूध पहले से तैयार है...
यह किसकी मर्जी से हुआ ? 🤱
गर्भ से बाहर आते ही तुमने साँस ली। इसके पहले तो कभी साँस नहीं ली थी! माँ के पेट में तो माँ की साँस से ही काम चलता था।
जैसे ही तुम बाहर आए, तत्क्षण तुमने साँस ली... किसने सिखाया?
किसी पाठशाला में तो गए नहीं थे... फिर किसने सिखाया कि साँस कैसे ली जाती है ? किसकी मर्जी से ? 🌬️
ज़रा सोचो...
तुम्हारे भोजन को कौन पचाता है ?
कौन उसे हड्डी, मांस और मज्जा में बदलता है ?
किसने तुम्हें जीवन की सारी प्रक्रियाएँ दी हैं ?
जब तुम थक जाते हो, तो कौन तुम्हें सुला देता है? और नींद पूरी हो जाने पर कौन तुम्हें उठा देता है? 💤
कौन चलाता है इन चाँद-सूरज को ? ☀️🌙
कौन इन वृक्षों को हरा रखता है ? 🌳
कौन खिलाता है अनंत रंगों और सुगंधों वाले फूल ? 🌺
इतने विराट का आयोजन जिस महान स्रोत से चल रहा है, क्या तुम्हारी एक छोटी-सी ज़िंदगी उसके सहारे न चल सकेगी ?
थोड़ा सोचो... थोड़ा ध्यान करो ! 🧘♂️
अगर इस विराट आयोजन को तुम चलते हुए देख रहे हो, जहां कहीं कोई व्यवधान नहीं है, सब कुछ सुंदर और बेझिझक चल रहा है... तो तुम, जो इस जगत के एक छोटे से अंश हो, तुम्हें यह भ्रांति कब से आ गई कि —
"मुझे स्वयं को अलग से चलाना पड़ेगा ?"
"मुझे अपना जिम्मा अपने ऊपर ही लेना पड़ेगा ?"
याद रखो, इसी भ्रांति और अहंकार में तुमने अपने जीवन के सारे कष्ट, असफलताएँ और विषाद पैदा कर लिए हैं। सब उस पर छोड़ दो, वही चला रहा है । ✨
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