नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती🙏,qनवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। ये शक्ति, साहस और विजय की देवी मानी जाती हैं।
📖 माँ कात्यायनी की कथा
प्राचीन समय में महिषासुर नामक राक्षस ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया कि उसे कोई देवता या पुरुष नहीं मार सकेगा। इस वरदान के कारण वह अत्यंत शक्तिशाली हो गया और देवताओं तथा मनुष्यों को सताने लगा।
तब सभी देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियों का तेज एकत्र किया, जिससे एक दिव्य देवी का प्रकट हुआ। महर्षि कात्यायन ने उस देवी की कठोर तपस्या की और उन्हें अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने का वर माँगा।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने महर्षि कात्यायन के यहाँ जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा।
जब माँ कात्यायनी युवती हुईं, तब उन्होंने महिषासुर से भयंकर युद्ध किया। कई दिनों तक चले युद्ध के बाद माँ ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर दिया और संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया।
🌼 माँ कात्यायनी का स्वरूप
माँ कात्यायनी सिंह पर सवार रहती हैं 🦁
उनकी चार भुजाएँ होती हैं
एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल
एक हाथ अभय मुद्रा और दूसरा वर मुद्रा में होता है
✨ पूजा का महत्व
माँ कात्यायनी की पूजा से—
विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं
साहस और शक्ति की प्राप्ति होती है
शत्रुओं पर विजय मिलती है
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