सद्गुरु: किसी ट्रेकिंग को हमेशा एक उपलब्धि की तरह देखा जाता है, यानी खुद को अपनी मौजूदा स्थिति से बड़ा बनाना। लेकिन तीर्थयात्रा इस बारे में है कि आप बस चलते रहें, पहाड़ चढ़ते रहें और प्रकृति की कठिन प्रक्रियाओं से गुजरते हुए खुद को शून्य बना लें।
अगर मंजिल की बात करें, तो कैलाश की यात्रा शायद वह सबसे बड़ी तीर्थयात्रा है, जो कोई कर सकता है। कैलाश एक अद्भुत आध्यात्मिक लाइब्रेरी है, और पिछले कम से कम कुछ हजार सालों से यह ऐसा ही बना हुआ है। आमतौर पर, लोग इसे 10,000 से 12000 साल पुराना मानते हैं। कई लोगों का कहना है कि यह इससे कहीं ज्यादा पुराना है।
जब हम कहते हैं कि यह शिव का धाम है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आदियोगी शिव अब भी वहां ऊपर बैठे हैं, या नृत्य कर रहे हैं, या बर्फ में छिपे हुए हैं। इसका अर्थ यह है कि जब कोई व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त करता है, और उसका बोध सामान्य सीमाओं से आगे निकल जाता है, तो उसने जो जाना है, उसे आसपास के लोगों तक पहुंचाना हमेशा संभव नहीं होता। किसी भी गुरु को बहुत कम ऐसे शिष्य मिलते हैं, जिन्हें वे अपना सब कुछ सौंप सकें। ज्यादातर गुरु वह सब कुछ दिए बिना ही चले जाते हैं, जो वे वाकई दूसरों को देना चाहते हैं। तो यह सब कहां छोड़ कर जाएं? हजारों सालों से, आत्मज्ञानी लोगों ने कैलाश की यात्रा की, और अपना ज्ञान इस पहाड़ में एक खास ऊर्जा के रूप में जमा कर दिया।
अगर आंतरिक आयामों की बात करें, तो आप जो कुछ भी जानना चाहते हैं, वह सब कैलाश में मौजूद है। अगर आपको इसे अनुभव करने और समझने का तरीका पता हो, तो आपकी अपनी रचना, आपके निर्माण और अस्तित्व, और आपकी मुक्ति के बारे में सब कुछ वहीं मौजूद है। अगर कोई अपने बोध को पर्याप्त स्पष्टता तक बढ़ाने के लिए तैयार है, तो यह साफ तौर पर देखा और अनुभव किया जा सकता है। सद्गुरु के साथ वर्चुअल तौर पर जुड़ें। वे कैलाश की यात्रा कर रहे हैं – जो इस ग्रह पर सबसे बड़ी रहस्यमयी लाइब्रेरी है। कैलाश और मानसरोवर के आस-पास के रहस्यवाद को महसूस करें, मनमोहक दृश्यों का आनंद लें, सहज क्षणों का अनुभव करें, और सद्गुरु के गहन ज्ञान को सुनें।
#sadhguru #sadhguruhindi #kailashwithsadhguru2026
#Kailashyatra2026