गांधी जयंती

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6 months ago
गांधी जयंती—2 अक्टूबर पर देश और विश्व महात्मा गांधी को याद करते हैं; यह दिन भारत में राष्ट्रीय अवकाश है और संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में इसे International Day of Non-Violence के रूप में मान्यता दी है। आश्चर्यजनक बात: गांधी का 'सत्याग्रह' सिर्फ विरोध का तरीका नहीं था बल्कि एक ऐसा civil-resistance मॉडल था जिसने Martin Luther King Jr. और Nelson Mandela जैसे नेताओं तक को प्रेरित किया। तर्क/साइंस की जुड़ाव वाली बात: आधुनिक शोध दिखाते हैं कि nonviolent अभियानों की सफलता दर हिंसात्मक अभियानों से अधिक रही है और ये जीतें ज्यादा टिकाऊ लोकतांत्रिक नतीजे देती हैं—इसलिए सत्याग्रह केवल नैतिक नहीं, रणनीतिक रूप से भी असरदार था। एक छोटा पर जोरदार कोट और क्लैरिफिकेशन: अक्सर कहा जाता है “Be the change you wish to see in the world” जिसे गांधी के नाम पर लगाया जाता है, पर शोध बताते हैं यह exact शब्दों में गांधी का नहीं है; उन्होंने मूल रूप से लिखा था “If we could change ourselves, the tendencies in the world would also change…” — मतलब असल संदेश आत्म-परिवर्तन और जवाबदेही है, सिर्फ viral caption नहीं। और साफ़-सी बात: गांधी के नाम पर हिंसा, नफरत या shortcut-राजनीति को सही ठहराना गलत है—धर्म/नीति में जो सच्चा और नैतिक है उसे अपनाएँ और जो गलत है उसे गलती कहें।🙏🕊️✨ #गांधीजयंती #अहिंसा #Satyagraha #BeTheChange #RajGhat 📢 @गुरुवंतापी। गांधी जयंती मनाई जाएगी #गांधी जयंती #गांधी जयंती स्पेशल #राजीव गांधी जयंती
Praveen Kumar Yadav
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6 months ago
सत्य और अहिंसा की लड़ाई लड़ कर अग्रेजो से भारत को आजादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता शहीद महात्मा गॉंधी जी तथा जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री स्व लालबहादुर शास्त्री जी आप दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती पर मैं आप दोनो को कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।शहीद महात्मा गॉंधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था.शहीद महात्मा गॉंधी की माताजी का नाम पुतलीबाई जी तथा पिताजी का नाम करमचंद गाँधी जी था.शहीद महात्मा गॉंधी जी ने देश की आज़ादी के लिए कई महत्वपूर्ण अहिंसक आंदोलन चलाए,जिनमें चंपारण सत्याग्रह (1917),खेड़ा आंदोलन (1918),अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918),असहयोग आंदोलन (1920-22),सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930 जिसमें दांडी मार्च शामिल था),और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) प्रमुख था।आप ने अहिंसक प्रतिरोध का उपयोग करके ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के लिए एक सफल अभियान का नेतृत्व किया। भारत की आज़ादी के लिए शहीद महात्मा गॉंधी जी ने 8 अगस्त 1942 ई को मुम्बई के गोवलिया टैंक से "करो या मरो" का नारा देकर अग्रेजो के खिलाफ बिगुल फूंक दिया तथा अग्रेजो भारत छोड़ो का नारा देकर अन्तिम आदोंलन शुरू किया.इस आदोंलन की शुरुआत मुम्बई अधिवेशन से हुई.इस आदोंलन के शुरू होने के बाद अग्रेज डर गए तथा उन्होंने महात्मा गॉंधी जी सहित तमाम नेताओं को 9 अगस्त 1942 ई को नजरबंद कर दिया.इस आदोंलन में 940 लोग मारे गए तथा 1630 लोग घायल हुए जबकि 60229 लोगों ने गिरफ्तारी दी थी.इस आदोंलन में विधार्थियो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया तो वही सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए.इस आदोंलन के दौरान राममनोहर लोहिया जी,जयप्रकाश नारायण जी जैसे नेता उभर कर सामने आये.इस आदोंलन ने देश के नेताओं तथा जनता को एकजुट कर दिया तथा परिणामस्वरूप 15 अगस्त 1947 ई को हमारा देश आजाद हुआ और 30 जनवरी 1948 ई को शाम 5.17 मिनट पर नई दिल्ली के बिरला हाऊस में जब महात्मा गॉंधी जी प्रार्थना सभा करने जा रहे थे जिनका नारा था "ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,सबको सन्मति दे भगवान" उसी समय आप की गोली मारकर कर हत्या कर दी गई.आप की हत्या आर.एस.एस के एक कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर की थी.आप का अन्तिम वाक्य "हे राम" था.लालबहादुर शास्त्री जी भी भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे,जिन्होंने 1964 से 1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया.आप का जन्म 2 अक्टूबर,1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था.आप ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे.स्वतंत्रता के बाद,आप ने उत्तर प्रदेश में संसदीय सचिव और फिर परिवहन मंत्री के रूप में कार्य किया.आप अपनी सादगी,ईमानदारी और देश के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं.1965 ई के भारत-पाक युद्ध के दौरान आप के नेतृत्व में देश ने साहस दिखाया और आप ने "जय जवान, जय किसान" का प्रसिद्ध नारा दिया था ताकि जवान तथा किसान सशक्त बनें.आप के कार्यकाल के दौरान, भारत को खाद्य संकट का सामना करना पड़ा,जिसके समाधान के लिए आप ने हरित क्रांति की शुरुआत की और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति का समर्थन किया. आप ने भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965) के दौरान देश को एकजुट किया.शास्त्री जी ने सोवियत संघ के ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए.लाल बहादुर शास्त्री जी का निधन 11 जनवरी 1966 को ताशकंद, उज्बेकिस्तान में हृदय गति रुकने से हुआ था,जबकि वह भारत-पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद वहीं थे।शत् शत् नमन🇮🇳🇮🇳🇮🇳😢😢😢🙏जय हिंद जय भारत।🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #🙌 Never Give Up #🌞 Good Morning🌞 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #गांधी जयंती