जिस प्रकार सुवर्ण की खानों में पत्थर में मिले हुए सुवर्ण को उसके निकालने की विधि जानने वाला स्वर्णकार उन विधियों से उसे प्राप्त कर लेता है, वैसे ही अध्यात्म तत्व को जानने वाला पुरुष आत्मप्राप्ति के उपायों द्वारा अपने शरीर रूप क्षेत्र में ही ब्रह्मपद का साक्षात्कार कर लेता है।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/७/७/२१
श्रीमद्भागवत-महापुराण/7/7/21
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