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नज़र उनसे हमको मिलानी नही थी
उसे बात दिल की बतानी नहीं थी
कली बन के आई मेरी ज़िन्दगी में
देखी हमने ऐसी जवानी नहीं थी
चमक चहरे पे चाँदनी की तरह थी
मगर वो मेरी रात रानी नहीं थी
चली हम सफ़र बन के वो साथ मेरे
मगर रस्मे उल्फत निभानी नहीं थी
जला डाले वो सारे ख़त हमने उसके
मोहब्बत की जिसमे कहानी नहीं थी
चढ़ा इश्क का था नशा उन पर मेरे
मगर इश्क में वो रवानी नहीं थी
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
5/3/2017
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