कल तक जो घर के लाडले थे, आज वो अकेले में रो लेते हैं।
मां के बाजू पर सर रखकर सोने वाले अब बगैर बिस्तर के
ही सो लेते हैं।
बाप के डांटने पर मां से शिकायत करने वाले अब ज़माने
के सौ नखरे सह लेते हैं।
बहन को छोटी छोटी बात पर तंग करने वाले अब बहन को
याद करके रो लेते हैं।
उठ कर पानी तक न पीने वाले अब अपने कपड़े खुद धो लेते हैं।
खाने में सौ नखरे करने वाले अब खुद पकाके कच्चा पक्का
खा लेते हैं।
सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते हैं।
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