आईना सच दिखाए तो तोड़ देते हैं सब
अब सच के साथ इंसाफ कौन करे
हर कोई यहाँ अपने ही गुनाह में मशगूल है
मेरे हिस्से का हिसाब कौन करे
पत्थर दिलों की बस्ती में रो रहा हूँ मैं
इन बहरों में मेरी बात कौन सुने,
बिक रहा है हर शख्स बाज़ार में यहाँ
ऐसे में खुद से प्यार कौन करे
#📚कविता-कहानी संग्रह