वेद

Ravi Soni ( Rvs Tiger )
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27 days ago
Bayana Ke Railway Station Ke Pas 😱Khandani Vaid FK Pathan#doctor #ved
RaysVeda
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3 months ago
📖 चारों वेदों का ज्ञान — सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर ✨ 🔸 ऋग्वेद — मंत्रों और देवताओं की स्तुति का वेद 🔸 यजुर्वेद — यज्ञ, कर्मकांड और पूजा विधियों का वेद 🔸 सामवेद — संगीत, स्वर और भक्ति का वेद 🔸 अथर्ववेद — आयुर्वेद, जीवन ज्ञान और रक्षा मंत्रों का वेद 🕉️ वेद केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान हैं। 🙏 👇 कमेंट करें — “ॐ अग्नये नमः 🔥” ✨ वीडियो को Like & Share करें 🌿 और ऐसे ही आध्यात्मिक ज्ञान के लिए @raysveda को फ़ॉलो ज़रूर करें। #Vedas #Bhaktireels #mantra #SanatanDharma #trending
Ashutosh shukla
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4 months ago
यह भाषाई और वैज्ञानिक रूप से भी सच है। वेदों की सुरक्षा का जो तरीका हमारे ऋषियों ने बनाया था, वह दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है। यहाँ इस बात को पुख्ता करने वाले कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: स्वर और मात्रा की शुद्धता (The Vedic Chanting): वेदों को 'श्रुति' (सुनकर याद रखने वाला) कहा जाता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए 'विकृति पाठ' (जैसे जटा पाठ, शिखा पाठ, घन पाठ) जैसी जटिल प्रणालियाँ बनाई गईं। इसमें मंत्रों को शब्दों के क्रम बदल-बदल कर गाया जाता है। अगर कोई एक मात्रा या 'डंडा' (स्वर) भी बदलने की कोशिश करे, तो वह लय टूट जाती है और तुरंत पकड़ में आ जाता है। अपौरुषेय ज्ञान: वेदों को 'अपौरुषेय' माना जाता है, यानी ये किसी मनुष्य की रचना नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान हैं जो सृष्टि के आरंभ से है। इनकी तुलना में पुराण बहुत बाद के हैं और उनमें भौगोलिक व ऐतिहासिक कहानियों के जुड़ने से मिलावट की गुंजाइश बनी रही। संस्कृत का व्याकरण: वेदों की संस्कृत (Vedic Sanskrit) इतनी प्राचीन और नियमबद्ध है कि उसमें मध्यकालीन या आधुनिक मिलावट के शब्द साफ अलग चमकते हैं। पाणिनि के व्याकरण के नियमों ने वेदों को एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर दिया था। इस प्रकार निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है: अगर किसी को सनातन धर्म का सबसे शुद्ध, वैज्ञानिक और मौलिक (Original) ज्ञान चाहिए, तो वेदों और उपनिषदों से बेहतर कुछ नहीं है। पुराणों में जो 'गंदगी' या 'मिलावट' देखी जा सकती हैं, उससे कई समाज सुधारक (जैसे महर्षि दयानंद सरस्वती) भी सहमत थे और उन्होंने ही "वेदों की ओर लौटो" का नारा भी दिया था। जय श्री राम , जय सनातन धर्म I 🙏🙏🙏यह भाषाई और वैज्ञानिक रूप से भी सच है। वेदों की सुरक्षा का जो तरीका हमारे ऋषियों ने बनाया था, वह दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है। यहाँ इस बात को पुख्ता करने वाले कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: स्वर और मात्रा की शुद्धता (The Vedic Chanting): वेदों को 'श्रुति' (सुनकर याद रखने वाला) कहा जाता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए 'विकृति पाठ' (जैसे जटा पाठ, शिखा पाठ, घन पाठ) जैसी जटिल प्रणालियाँ बनाई गईं। इसमें मंत्रों को शब्दों के क्रम बदल-बदल कर गाया जाता है। अगर कोई एक मात्रा या 'डंडा' (स्वर) भी बदलने की कोशिश करे, तो वह लय टूट जाती है और तुरंत पकड़ में आ जाता है। अपौरुषेय ज्ञान: वेदों को 'अपौरुषेय' माना जाता है, यानी ये किसी मनुष्य की रचना नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान हैं जो सृष्टि के आरंभ से है। इनकी तुलना में पुराण बहुत बाद के हैं और उनमें भौगोलिक व ऐतिहासिक कहानियों के जुड़ने से मिलावट की गुंजाइश बनी रही। संस्कृत का व्याकरण: वेदों की संस्कृत (Vedic Sanskrit) इतनी प्राचीन और नियमबद्ध है कि उसमें मध्यकालीन या आधुनिक मिलावट के शब्द साफ अलग चमकते हैं। पाणिनि के व्याकरण के नियमों ने वेदों को एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर दिया था। इस प्रकार निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है: अगर किसी को सनातन धर्म का सबसे शुद्ध, वैज्ञानिक और मौलिक (Original) ज्ञान चाहिए, तो वेदों और उपनिषदों से बेहतर कुछ नहीं है। पुराणों में जो 'गंदगी' या 'मिलावट' देखी जा सकती हैं, उससे कई समाज सुधारक (जैसे महर्षि दयानंद सरस्वती) भी सहमत थे और उन्होंने ही "वेदों की ओर लौटो" का नारा भी दिया था। जय श्री राम , जय सनातन धर्म I 🙏🙏🙏 #ved #genral knowledge