#शिव #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🔱हर हर महादेव #🔱बम बम भोले🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
॥ श्रीहरिः ॥
*श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्*
*नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।*
*नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै 'न 'काराय नमः शिवाय ॥१॥*
जिनके कण्ठमें साँपोंका हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, भस्म ही जिनका अंगराग (अनुलेपन) है; दिशाएँ ही जिनका वस्त्र हैं [अर्थात् जो नग्न हैं), उन शुद्ध अविनाशी महेश्वर 'न' कारस्वरूप शिवको नमस्कार है ॥१॥
*मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।*
*मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै 'म 'काराय नमः शिवाय ॥२॥*
गंगाजल और चन्दनसे जिनकी अर्चा हुई है, मन्दार-पुष्प तथा अन्यान्य कुसुमोंसे जिनकी सुन्दर पूजा हुई है, उन नन्दीके अधिपति प्रमथगणोंके स्वामी महेश्वर 'म' कारस्वरूप शिवको नमस्कार है॥२॥
*शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।*
*श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै 'शि 'काराय नमः शिवाय ॥३॥*
जो कल्याणस्वरूप हैं, पार्वतीजीके मुखकमलको विकसित (प्रसन्न) करनेके लिये जो सूर्यस्वरूप हैं, जो दक्षके यज्ञका नाश करनेवाले हैं, जिनकी ध्वजामें बैलका चिह्न है, उन शोभाशाली नीलकण्ठ 'शि' कारस्वरूप शिवको नमस्कार है ॥ ३॥
*वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।*
*चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै 'व 'काराय नमः शिवाय ॥४॥*
वसिष्ठ, अगस्त्य और गौतम आदि श्रेष्ठ मुनियोंने तथा इन्द्र आदि देवताओंने जिनके मस्तककी पूजा की है, चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि जिनके नेत्र हैं. उन 'व'कारस्वरूप शिवको नमस्कार है ॥ ४ ॥
*यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।*
*दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै 'य'काराय नमः शिवाय ॥५॥*
जिन्होंने यक्षरूप धारण किया है, जो जटाधारी हैं, जिनके हाथमें पिनाक है, जो दिव्य सनातन पुरुष हैं, उन दिगम्बर देव 'य' कारस्वरूप शिवको नमस्कार है ॥ ५॥
*पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।*
*शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥६॥*
जो शिवके समीप इस पवित्र पंचाक्षरस्तोत्रका पाठ करता है, वह शिवलोकको प्राप्त करता है और वहाँ शिवजीके साथ आनन्दित होता है ॥ ६॥
॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ ॥ इस प्रकार श्रीमच्छंकराचार्यविरचित श्रीशिवपंचाक्षरस्तोत्र सम्पूर्ण हुआ॥
ॐ नमः शिवाय
शिव स्तोत्र रत्नाकर गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकसे साभार