🌺ପବିତ୍ର ସିଂହ ସଂକ୍ରାନ୍ତି♌

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4 hours ago
#🐉ପବିତ୍ର ନାଗ ପଞ୍ଚମୀର ଶୁଭେଚ୍ଛା🤗 #🔱ଶ୍ରାବଣ ତୃତୀୟ ସୋମବାରର ଶୁଭେଚ୍ଛା𓉸𓆘 #🕉 ହର ହର ମହାଦେବ🔱 #🌺ପବିତ୍ର ସିଂହ ସଂକ୍ରାନ୍ତି♌ #🌞ସୁପ୍ରଭାତ🌞 "सच्ची मानवता" की सोच हमेशा यही होगी की ‘मुझे मिला‘ हुआ "दुःख" ‘किसी को नही मिले‘ और ‘मुझे मिला‘ हुआ "सुख" "सबको मिले"। ☘️शुभ सोमवार☘️ 🙏💐सुप्रभात💐🙏
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4 hours ago
सिंह संक्रांति का दिन धार्मिक ही नहीं, ज्योतिष दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। इस दिन न सिर्फ सूर्य ग्रह का गोचर होता है, बल्कि सूर्य देव की विशेष रूप से पूजा-अर्चना भी की जाती है। कुछ लोग तो इस दिन व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो लोग सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव की उपासना करते हैं, उन्हें यश, उत्तम स्वास्थ्य, मान-सम्मान और अपार सफलता मिलती है। साथ ही जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। यदि आप भी सिंह संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करना चाहते हैं तो सबसे पहले इसकी तिथि, पुण्य काल, महा पुण्य काल और शुभ मुहूर्त के बारे में जान लें। #सिंह_संक्रांति_2026_में_कब_है? ग्रहों के राजा सूर्य जिस भी दिन अपनी राशि सिंह में गोचर करते हैं, उसी तारीख पर सिंह संक्रांति मनाई जाती है। इस बार 17 अगस्त 2026, वार सोमवार को सिंह संक्रांति मनाई जाएगी। #सूर्य_किस_दिन_अपने_घर_में_करेंगे_गोचर: ज्योतिष गणना का आकलन करें तो 17 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रह कर्क राशि से निकलकर अपने घर यानी सिंह राशि में जाएंगे। इस दिन ये बड़ी ज्योतिषीय घटना सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर घटेगी। #सूर्य_कब_तक_अपने_घर_में_रहेंगे: 17 अगस्त को सिंह राशि में गोचर करने के बाद सूर्य 17 सितंबर 2026 तक यहीं रहेंगे। इस दिन सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्य का राशि परिवर्तन होगा यानी 31 दिन से ज्यादा वो अपने घर में रहेंगे। #सिंह_संक्रांति_के_दिन_पुण्य_काल_का_समय: पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि सिंह संक्रांति के दिन पुण्य काल और महा पुण्य काल के समय पूजा करने से खास लाभ होता है। इस बार 17 अगस्त को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 04 मिनट तक सिंह संक्रान्ति का पुण्य काल रहेगा, जिसके बीच महा पुण्य काल शुरू हो जाएगा। सिंह संक्रांति के दिन महा पुण्य काल सुबह 05 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। #सिंह_संक्रांति_का_शुभ_मुहूर्त: 17 अगस्त 2026 यानी सिंह संक्रांति के दिन सूर्योदय सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर होगा, जिससे पहले ब्रह्म मुहूर्त का आरंभ हो जाएगा। इस दिन सुबह 04 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 08 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। वहीं, प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 04 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 51 मिनट तक है। #सिंह_संक्रांति_का_क्या_महत्व_है? सिंह संक्रांति का हिंदू परंपराओं में विशेष महत्व है क्योंकि यह सूर्य के एक महत्वपूर्ण संक्रमण बिंदु को चिह्नित करता है और सूर्य देव से जुड़ा हुआ है, जिन्हें जीवन शक्ति, ज्ञान, अनुशासन और जीवनदायी ऊर्जा का दिव्य अवतार माना जाता है। परंपरागत रूप से, यह दिन भक्ति और दान के कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है। अनेक भक्तों के लिए, यह दिन केवल एक कैलेंडर दिवस नहीं बल्कि शुद्धि, कृतज्ञता और आध्यात्मिक अनुशासन का दिन है। #सूर्य पूजा: भक्त ऊर्जा, शक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं। #दान और परोपकार: भोजन, कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना एक अच्छा कर्म माना जाता है। #पवित्र स्नान: शुभ अनुष्ठानिक स्नान के साथ बिताया गया पवित्र समय आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। #प्रार्थना और मंत्र: अपनी व्यक्तिगत पूजा के दौरान, आप सूर्य से संबंधित मंत्रों का जाप कर सकते हैं। #आंतरिक अनुशासन: कृतज्ञता, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक इरादों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस क्षण का उपयोग करें। #सिंह_संक्रांति_पूजा_विधि: ●स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। साफ वस्त्र धारण करें। ●सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, कुमकुम और अक्षत (चावल) डालकर उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। ●भगवान शिव की पूजा: चूंकि यह श्रावण मास का समय है, इसलिए शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पंचामृत अर्पित करें। ●पितृ तर्पण: सिंह संक्रांति का दिन सूर्य उपासना के साथ-साथ पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है। ●दान-पुण्य: पुण्य काल के दौरान गेहूं, तांबा, गुड़, लाल वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न का दान करें। #🌺ପବିତ୍ର ସିଂହ ସଂକ୍ରାନ୍ତି♌