ॐ सूर्याय नमः 🙏💖 शुभ रविवार 💖💖 प्रातः अभिनंदन 🙏🙏💖💖🌹🌹

sn vyas
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6 days ago
#🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️ #ॐ सूर्याय नमः 🙏💖 शुभ रविवार 💖💖 प्रातः अभिनंदन 🙏🙏💖💖🌹🌹 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 श्रीशिव प्रोक्तं- श्रीसूर्य अष्टकम् ।। (हिंदी अर्थ सहित) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ सूर्यदेव की आराधना को बहुत महत्त्वपूर्ण माना गया है। प्रतिदिन सूर्योदय के समय जल अर्पित करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जो भी व्यक्ति सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में रोली मिला हुआ जल सूर्यदेव को चढ़ाता है और सूर्याष्टकम का पाठ करता है, उसके सभी ग्रह दोष खत्म हो जाते हैं और ऐसा होते ही जीवन में समस्त दृष्टियों से पूर्णता प्राप्त होने लगती है। सूर्यदेव की पूजा के लिए रविवार का दिन श्रेष्ठ रहता है। सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। जो व्यक्ति सूर्यदेव की उपासना करता है, उसकी कुंडली में यदि ग्रह दोष है तो वह भी दूर हो जाता है। सूर्यदेव सम्पूर्ण जगत में शक्ति और ऊर्जा के भंडार हैं। उनकी ऊर्जा द्वारा ही सारे संसार के कार्य पूरे होते हैं। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। कठिन से कठिन असाध्य रोगों में भी जल्दी लाभ होने लगता है।नौकरी का योग बनने लगता है। व्यापार में भी सफलता प्राप्त होती है। मानसिक विकास होता है। सकारात्मक सोच उत्पन्न होती है। व्यक्ति हर समय ऊर्जावान बना रहता है। वह कुसंगति से बचा रहता है। उसकी तामसिक भावना नष्ट हो जाती है। वस्त्र आसन सफेद तथा दिशा पूर्व हो । नित्य ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय के समय इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है । आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमौऽस्तु ते।।१।। सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्। श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।२।। लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्। महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।३।। त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम्। महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।४।। बृंहितं तेजः पुञ्ज च वायुमाकाशमेव च। प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।५।। बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम्। एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।६।। तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजः प्रदीपनम्। महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।७।। तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्। महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।८।। ।। इति श्रीशिव प्रोक्तं सूर्याष्टकं सम्पूर्णम् ।। भावार्थ 〰️〰️〰️ हे आदिदेव भास्कर आपको प्रणाम है, आप मुझ पर प्रसन्न हों, हे दिवाकर! आपको नमस्कार है, हे प्रभाकर। आपको प्रणाम है। सात घोड़ों वालें रथ पर आरूढ़, हाथ में श्वेत कमल धारण किये हुए प्रचण्ड तेजस्वी कश्यप कुमार सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ। लोहित वर्ण रथारूढ़ सर्वलोक पितामह महापाप हारी सूर्य देव को मैं प्रणाम करता हूँ। जो त्रिगुणमयी ब्राह्मा, विष्णु और शिव रूप हैं, उन महापाप हारी महान बीर सूर्यदेव को मैं नमस्कार करता हूँ। जो बड़े हुए तेज के पुंज हैं और वायु तथा आकाश स्वरूप हैं, उन समस्त लोकों के अधिपति सूर्य को मैं प्रणाम करता है। जो बन्धूक के पुष्प समान रक्तवर्ण और हार तथा कुण्डलों से विभूषित हैं, उन एक चक्रधारी सूर्यदेव को मैं प्रणाम करता हूँ। महान तेज के प्रकाशक, जगत के कर्ता, महापाप हारी उन सूर्य भगवान को मैं नमस्कार करता हूँ। उन सूर्यदेव को जो जगत के नायक है, ज्ञान, विज्ञान तथा मोक्ष को भी देते हैं, साथ ही जो बड़े-बड़े पापों को भी हर लेते हैं, उनको मैं प्रणाम करता हूँ। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
sn vyas
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20 days ago
#moj_content #moj_content #शुभ रविवार #🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️ #ॐ सूर्याय नमः 🙏💖 शुभ रविवार 💖💖 प्रातः अभिनंदन 🙏🙏💖💖🌹🌹 #ॐ घृणि सूर्याय नमः 🙏🌼 # जय सूर्य नारायण भगवान 🙏🌻 *श्रीसूर्यद्वादशनामस्तोत्रम् के साथ दिन का शुभारम्भ –* `सूर्य देव को प्रणाम🙏🏻` `जिनके उदय से अंधकार मिटता है , रोग व दरिद्रता दूर होती है एवं जीवन में तेज आता है ।` *॥ स्तोत्र ॥* *आदित्यः प्रथमं नाम द्वितीयं तु दिवाकरः ।* *तृतीयं भास्करः प्रोक्तं चतुर्थं च प्रभाकरः ॥* *पञ्चमं च सहस्रांशु षष्ठं चैव त्रिलोचनः ।* *सप्तमं हरिदश्वं च अष्टमं तु अहर्पतिः ॥* *नवमं दिनकरः प्रोक्तं दशमं द्वादशात्मकः ।* *एकादशं त्रिमूर्तिश्च द्वादशं सूर्य एव तु ॥* `अर्थात 👉🏻 १. आदित्यः – अदिति नंदन , २. दिवाकरः – दिन को प्रकाशित करने वाले , ३. भास्करः – तेज से प्रकाशित होने वाले , ४. प्रभाकरः – प्रभुता/तेज फैलाने वाले , ५. सहस्रांशुः – हजार किरणों वाले , ६. त्रिलोचनः – तीनों लोकों को देखने वाले , ७. हरिदश्वः – हरे घोड़ों वाले रथ के स्वामी , ८. अहर्पतिः – दिन के अधिपति , ९. दिनकरः – दिन को उत्पन्न करने वाले , १०. द्वादशात्मकः – १२ आदित्यों/१२ महीनों के स्वरूप वाले , ११. त्रिमूर्तिः – ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप , तथा १२. सूर्यः – समस्त जगत को प्रेरणा देने वाले ।` *॥ फलश्रुति ॥* *द्वादशादित्यनामानि प्रातःकाले पठेन्नरः ।* *दुःस्वप्नो नश्यते तस्य सर्वदुःखं च नश्यति ॥* `अर्थात 👉🏻 जो मनुष्य प्रातःकाल इन १२ नामों का पाठ करता है , उसके दुःस्वप्न/ बुरे स्वप्न औऱ सभी दुःख नष्ट हो जाते हैं ।` { `अतिरिक्त फल 👉🏻 दरिद्रता , रोग दूर होते हैं । आयु , आरोग्य , सौख्य एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है । इसे पढ़ने से सर्वतीर्थ का फल मिलता है ।` } `॥ आज का दिन विशेष ॥` *रविप्रदोष व्रत में सूर्य स्तोत्र तथा शिव पूजा करने से ☆रोग , ☆दरिद्रता औऱ ☆ग्रह बाधा दूर होती है ।* `१. सूर्य दोष शांत होते हैं ,` `२. मान-सम्मान , तेज , आरोग्य बढ़ता है ,` `३. शिव कृपा से मनोकामना पूर्ण होती है ।` `🪷 आइए आज सूर्योदय के समय ३ बार इस स्तोत्र का पाठ कर तेज , आरोग्य तथा शांति का आशीर्वाद लें ।` *ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः☀️* *॥ 🚩हर हर महादेव🚩 ॥* *ॐ आदित्याय नमः🚩* *ॐ दिवाकराय नमः🚩* *ॐ सप्ताश्वाय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्🚩* *हर हर महादेव🔱* `© सर्वाधिकार सुरक्षित। सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄` `#सर्वज्ञ_शङ्कर` `#प्रभात_वंदन` `#रविप्रदोष_व्रत` `#प्रभातवंदन` `#सूर्यस्तोत्र`
sn vyas
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1 months ago
#👉 Sunday Thoughts #🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️ #ॐ सूर्याय नमः 🙏💖 शुभ रविवार 💖💖 प्रातः अभिनंदन 🙏🙏💖💖🌹🌹 सूर्यं सुन्दरलोकनाथममृतं वेदान्तसारं शिवं ज्ञानब्रह्ममयं सुरेशममलं लोकैकचित्रस्वयम् । इन्द्रादित्यनराधिपसुरगुरुं त्रैलोक्यचूडामणिं *ब्रह्मविष्णुशिवस्वरूपहृदयं वन्दे सदा भास्करम् ॥ [ `यह सूर्याष्टक स्तोत्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध मंत्र है , जिसका वर्णन मुख्य रूप से साम्भ पुराण एवं भविष्य पुराण में प्राप्त होता है` ] `अर्थात 👉🏻 मैं उन भास्कर ( भगवान सूर्य ) को सदैव वंदन करता हूँ , जो सुंदर लोकों के स्वामी हैं , अमृतस्वरूप हैं ( मृत्यु से परे हैं ) ; वेदांत ( उपनिषदों ) का सार हैं तथा कल्याणकारी ( शिव ) हैं । वे ज्ञान औऱ ब्रह्म के स्वरूप ( भंडार ) हैं , देवताओं के ईश्वर हैं , निर्मल हैं एवं इस संसार के एकमात्र अद्भुत चित्र स्वयं ही हैं । वे इंद्र , आदित्य ( देवताओं ) , मनुष्यों के राजा तथा देवगुरु ( बृहस्पति ) के भी स्वामी हैं ; तीनों लोकों के मुकुटमणि हैं औऱ जिनके हृदय में ब्रह्मा , विष्णु एवं शिव— तीनों का स्वरूप समाहित हैं ।` `ॐ भास्कराय नमः🌞` `🌸 श्लोक का पद–पद अर्थ 🌸` `१.` *सुन्दरलोकनाथम्* `👉🏻 सुंदर लोकों के स्वामी हैं सूर्यदेव` `२.` *अमृतं वेदान्तसारं शिवं* `👉🏻 अमृतस्वरूप , वेदान्त के सार एवं कल्याणकारी हैं` `३.` *ज्ञानब्रह्ममयं सुरेशम्* `👉🏻 ज्ञान स्वरूप ब्रह्म हैं तथा देवों के ईश्वर हैं` `४.` *लोकैकचित्रस्वयम्* `👉🏻 संपूर्ण लोकों के अद्भुत चित्रकार स्वयं हैं` `५.` *इन्द्रादित्यनराधिपसुरगुरुम्* `👉🏻 इन्द्र , आदित्य , राजा औऱ देवगुरुओं के भी गुरु हैं` `६.` *त्रैलोक्यचूडामणिम्* `👉🏻 तीनों लोकों के शिरोमणि हैं` `७.` *ब्रह्मविष्णुशिवस्वरूपहृदयम्*`👉🏻 जिनके हृदय में ब्रह्मा , विष्णु , शिव तीनों का स्वरूप है` `८.√ *सदा भास्करम् वन्दे*`👉🏻 ऐसे सदैव प्रकाशमान भास्कर को मैं प्रणाम करता हूँ ।` `🪔 शास्त्र का भाव –` `इस एक श्लोक में सूर्य को "त्रिदेवात्मक" कहा गया है 👉🏻` `ब्रह्मा – सृष्टिकर्ता , विष्णु – पालनकर्ता ,एवं शिव – संहारकर्ता । तीनों कार्य सूर्य से ही चलते हैं ।` `😊🪷 इसीलिए सूर्य को "प्रत्यक्ष देव" कहा गया । तथा कोई अन्य देव मनुष्यों हेतु दृष्टिगोचर नहीं है , किन्तु सूर्य हमें नित्य दर्शन देते हैं ।` `🌺 पाठ का फल` `प्रात – इस श्लोक का नित्यप्रतिदिन ३ बार पाठ करने से 👉🏻` `१. बुद्धि में "ज्ञानब्रह्ममय" तेज आता है ।` `२. शरीर में "अमृत" जैसी आरोग्यता की प्राप्ति होती है ।` `३. जीवन में "त्रैलोक्यचूडामणि" सदृश्य मान-सम्मान प्राप्त होता है ।` `☝🏻 अतैव निष्कर्षत: – सूर्य केवल ग्रह नहीं , अपितु वो ☆वेदान्त का सार हैं , ☆ज्ञान के सूर्य हैं , औऱ ☆ब्रह्म–☆विष्णु–☆शिव का एकीभूत स्वरूप हैं ।` *ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः🌞* *आदित्याय नमः🙏🏻🚩* `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`