गज़ल
ग़ज़ल - गज़ल ईन्सान को तकसीम किया फिर भी दिल नही भरा , तूने शब्दों को भी मजहब का मुलम्मा चढा दिया । तेरी जात का वास्ता तुझको जिसमे तू शामिल है , बस अब तो उफ कर तू , तूने क्या से क्या बना दिया । ऐ देश तेरा है सब लोग तेरे अपने | फिर क्यु तू अलग है किसने नफरत का चश्मा चढ़ा दिया । हैं | बङी मुशिकल है समझाना तू ज़हनी बीमार | इन परिंदो को भी तूने मजहब का मतलब बता दिया । उम्र की बची बाकी ये कुछ चन्द घडिया | तूने रंजिशो के वार से इन्हें भी घटा दिया प्रतिमानृसिंह ऋषि Last modified : 17 Jan 2019 - ShareChat
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1 साल पहले
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