भारत मे जातिवाद से दरकती लोकतंत्र की दीवारेहरदोई से बरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकांत पाठक की कलम से हरदोई।भारत देश और यहाँ की मिट्टी की समरसता की विश्व मे कोई सानी नही रही है। यहां बहु धर्म ,विभिन्न जाति, वर्ग के होते हुये भी देश शान्ति का पैगाम देता चला आ रहा था।लेकिन भारत की खादी ने अपनी अपनी दुकानों को चलाने के लिये अपने अपने हिसाब से समाज को तोडने के हथकंडे अपनाकर अपना व अपने निजी स्वार्थ को साधने का काम किया। देश हित समाज हित पर किसी ने ध्यान नही दिया।कानून सविधान सब अपने अनुकूल बना लिये जिससे वह भी डर समाप्त हो गया। भारतीय सविधान मे समता का अधिकार ,देकर भी अधिकार नही है।सविधान मे एक शब्द लिखा गया धर्मनिरपेक्ष शायद इसका अर्थ सभी धर्मो का सममान करना होगा लेकिन भारत की राजनीति मे कानून कायदा केवल कागजो तक ही सीमित है। आज जब भाजपा सरकार सत्तारूढ़ है तो पूरा विपक्ष भाजपा पर मुस्लिम विरोधी सरकार का तोहमत मढती रहती है लेकिन  यही काग्रेंस  कुर्सी के लोभ मे इतना गिर गयी की मां भारती के दो भाग कर दिये।लेकिन कुर्सी नही छोडी। आजादी का जश्न मनाने वाला भारत कभी आजाद हुआ ही नही केवल रग बदला गोरै से काले हो गये लेकिन फूट डालो राजकरो की नीति भारतीय राजनीति से जा ही नही पायी। समाज बाटने मे क्षेत्रीय दलो का अहम रोल रहा हैँ।समाज वादी पार्टी के सस्थापक मुलायम सिह ने पिछडी जाति को समाज से तोडकर राजनीति की और वही तत्कालिन प्रधानमंत्री वीपीसिंह ने मजबूती प्रदान कर दी।दूसरी तरफ भाजपा द्वारा पोषित बहुजन समाज पार्टी नै केवल दलित राजनीति कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक तिजोरियों को भरा। समाज को विभिन्न सरकारों ने वोटबैंक को साधने के लिये वर्ग बिशेष की राजनीति कर छिन्न भिन्न कर डाला। जिसने समाज मे एकरूपता लाने के बजाय आज बटवारे की स्थिति खडी कर दी है।पिछडा दलित, सबर्णो मे बटा हिन्दू समाज देश को कैसे आगे ले जा सकता है।इसी समस्या से निपटने के लिए अगडो पिछडो ने भाजपा पर भरोसा व्यक्त कर प्रचण्ड बहुमत से सत्ता मे लाये लेकिन दलित प्रेम के चक्कर मे फसी सरकार ने समाज के 78% लोगो के खिलाफ एससी/एसटी विल लाकर लोगो को निराश कर अपने पैरो मे कुल्हाड़ी मारने से कतई कम नही है।जिस तरह भाजपा के प्रति अगडो पिछडो मे पनपता आक्रोश भाजपा को अर्श से फर्श पर ला सकता है  जिसके लिये गुजरात की जुगलबंदी ही जिम्मेदार होगी।जिस देश समाज के लिये अपनी जान निछावर करने वाले शहीदों ने भी शायद यह नही सोचा होगा कि जिस धरती माता के लिये बलिवेदी पर चढ कर जान निछावर कर रहे है उसकी खादी द्वारा इतनी  बुरी गति की जायेगी।आजादी से अबतक जितनी सरकारे सत्ता मे आयी विभाजन के अलावा  दूसरा काम ही नही किया जबकि शपथ लेते समय देश की एकता अखण्डता भारतीय सविधान के प्रति सच्ची निष्ठा की शपथ लेकर सविधान की आत्मा को मारने के लिये रात दिन एक किये रहते है।जैसा की बर्तमान सरकार ने किया है।इन आचरणो से समाज मे बढती बैमन्स्व की  भावना देश को विभाजन की ओर ले जाती दिखायी दे रही है।
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1 साल पहले
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