om jai Shri Krishna
bhagwatgeeta - | श्लोक 10 - 11 अध्याय 11 : विश्वरूपदर्शनयोग सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ॥ भावार्थ अनेक मुख और नेत्रों से युक्त , अनेक अद्भुत दर्शनों वाले , बहुत से दिव्य भूषणों से युक्त और बहुत से दिव्य शस्त्रों को धारण किए हुए और दिव्य गंध का सारे शरीर में लेप किए हुए , सब प्रकार के आश्चर्यों से युक्त , सीमारहित और सब ओर मुख किए हुए विराट्स्वरूप परमदेव परमेश्वर को अर्जुन ने देखा ॥ 10 - 11 ॥ - ShareChat
88 ਨੇ ਵੇਖਿਆ
6 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾਂ
ਬਾਕੀ ਐਪਸ ਤੇ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰੋ
Facebook
WhatsApp
ਲਿੰਕ ਕਾਪੀ ਕਰੋ
ਰੱਦ ਕਰੋ
Embed
ਮੈਂ ਇਸ ਪੋਸਟ ਦੀ ਸ਼ਿਕਾਯਤ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿਓਂਕਿ ਇਹ ਪੋਸਟ...
Embed Post