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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - मां -बाप ने पुरी जिंदगी मेहनत करके अपने बेटे को लिखाया - पढाया खेत बेच दिए गहने गिरवी रख दिए,बस और बहु 7 इसलिए की बेटा सुखी रहें , का बर्ताव सासनससुर ने पूरी उम्र बेटे के लिए लगा दी, लेकिन बहू ने अपने बच्चों को सिखाया = " दादा दादी गंदे रहते हैं और वो पुराने सोच के हैं, उनके पास मत जाओ वो कुछ देते भी नहीं । बच्चे माँ की बात मानते गए॰..और दादा दादी अकेले होते गए।जब दादी दुनिया छोड़ गईं॰तब भी बच्चों को अहसास नहीं हुआ।सालों बाद वही बच्चे बड़े हुए और वही व्यवहार अपनी माँ के साथ करने लगे। तब समझ को दिए जाते हैं वही लौटकर आते हैं आया =जो संस्कार बच्चों Hef(viral Truth) कड़वी ٩٤ बच्चों को दादा दादी करना , भविष्य से उन्हें काटना है। सासनससुर को बोझ बताने वाली बहू, अपने बुढ़ापे की दुश्मन खुद बनती है। बच्चे वही सीखते हैं, जो माँ रोज़ उनके कान में भरती है।  आज जो दादा-दादी को ठुकरा रहा है, कल वही मोँ-बाप को भी ठुकराएगा| 31 Rs गए॰ तो अकेलापन तय है। संस्कार अगर गलत मां -बाप ने पुरी जिंदगी मेहनत करके अपने बेटे को लिखाया - पढाया खेत बेच दिए गहने गिरवी रख दिए,बस और बहु 7 इसलिए की बेटा सुखी रहें , का बर्ताव सासनससुर ने पूरी उम्र बेटे के लिए लगा दी, लेकिन बहू ने अपने बच्चों को सिखाया = " दादा दादी गंदे रहते हैं और वो पुराने सोच के हैं, उनके पास मत जाओ वो कुछ देते भी नहीं । बच्चे माँ की बात मानते गए॰..और दादा दादी अकेले होते गए।जब दादी दुनिया छोड़ गईं॰तब भी बच्चों को अहसास नहीं हुआ।सालों बाद वही बच्चे बड़े हुए और वही व्यवहार अपनी माँ के साथ करने लगे। तब समझ को दिए जाते हैं वही लौटकर आते हैं आया =जो संस्कार बच्चों Hef(viral Truth) कड़वी ٩٤ बच्चों को दादा दादी करना , भविष्य से उन्हें काटना है। सासनससुर को बोझ बताने वाली बहू, अपने बुढ़ापे की दुश्मन खुद बनती है। बच्चे वही सीखते हैं, जो माँ रोज़ उनके कान में भरती है।  आज जो दादा-दादी को ठुकरा रहा है, कल वही मोँ-बाप को भी ठुकराएगा| 31 Rs गए॰ तो अकेलापन तय है। संस्कार अगर गलत - ShareChat