सुनो मेरे कान्हा जी....
मेरी बूंद बूंद की प्यासी भक्ति.....
तुम तो पूरा समंदर हो....
दुनियां ढूंढे जग में कान्हा तुमको...
पर तुम सबके अंदर हो.....
जंगल जंगल भटक रहा मृग...
ढूंढे अपनी ही कस्तूरी को...
कितना मुश्किल है तय करना..
खुद से खुद की दूरी को....
जय श्री कृष्ण राधे राधे 🌹 🙏🙏🙏🌹
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