💰बजट 2020 लाइव - मां से अपना दर्द बयां करतीं निर्भया की 6 चिट्ठिया . . . . . . पहलवामा मडो बहत दर्द हो रहा है । ये दर्द मुझसे सहा तक नहीं जा रहा है । 19 दिसंबर 2012 डॉक्टर्स की दवाईयां भी मेरा दर्द कम नहीं कर पा रही है । मैं इस दर्द और । पीड़ा को सहन नहीं कर पा रही है । दूसरी चिली मो . दर्द की वजह से में ठीक से सांस नहीं ले पा रही ह । सांस लेने में मुझे तकलीफ हो रही हा दिसंबर डॉक्टरों से कहो कि मुझे नींद की दवाई न दें , क्योंकि में सोती हु तो कोई मेरे शरीर को 2012 गोचता है । में बेबस होती ह । सोते हुए मे क्या समझ पाती हैं . मुझे नहीं पता । । तीसरी चिटः मां , मेरे आसपास के सारे शीले तोड़ दो । मैं अपना चेहरा नहीं देखना चाहती । 22 दिसंबर में नहान चाहती है । मेरे शरीर से जानवरों के खून की बदबू आ रही हो । 2012 मुझे अपने शरीर से नफरत हो रही है । मुझे छोड़कर मत जाना मा । । चौथी किही मां , पापा कहां है ? . . . वो मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रहे ? . . . 23 दिसंबर मां पापा को बोलना दुखी ना हो । 2012 पांचवी विड़ी : 25 दिसंबर मां , उन जानवरों को छोड़ना मत । किसी को भी माफ मत करना । । 2012 मेरा दोस्त कैसा है । अब में जीना नहीं चाहती हूं । छी विड़ी ' मां , मुझे अब सोने दो । मुझे बहुत दर्द हो रहा है । 26 दिसंबर 2012 डॉक्टर से कहकर मुडो दवाई दे दो । मुझे माफ कर देना । मैं थक गई हूं । । अब और दर्द नहीं झेल सकती मैं जीना नहीं चाहती . . . . 26 दिसंबर को इस आखिरी खत के बाद निर्भया कोमा में चली गई । और फिर कभी नहीं उठी . . . . . . - ShareChat
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