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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - 79% 13.04 8 LFalllalll KBJs 1 9 C Save Layer Lines Undo Redo प्रेम क्या है लोग यही समझते है कि सब कुछ पा लेना ही प्रेम है। परंतु प्रेम तो एक ऐसा बंधन है जिसमे बंधने के लिए व्यक्ति को किसी और की सहायता की आवश्यकता नहीं होती।आज के समय में प्रेम शब्द है एक अहसास नही अगर अहसास होता तो लोगों को एक दूसरे की आवश्यकता महसूस होती।हम किसी से जब प्रेम करते है तो उसकी हर बात अच्छी लगती है वो गलत होते हुए भी सही लगता है।पर सच तो यह है की यह सिर्फ एक महत्वाकांक्षा है।क्यूंकि प्रेम तो हर गलती से दूर रखना चाहता है। प्रेम का महत्व तो सिर्फ एक मां बाप समझता है जोये चाहता है की उसकी संतान में कोई अवगुण न हो वह अच्छे मार्ग पर चलकर अपने भविष्य का निर्माण करे। प्रेम तो राधा ने भी कृष्ण से किया था पर कोई महत्वाकांक्षा को लेकर नहीं अगर ऐसा होता तो वो भी कृष्ण से विवाह करने की जिद करती।और गर्व करती कृष्ण की पत्नी होने का और प्रेम विवाह का। परंतु क्या उनकी पूजा होती या वो त्याग की मूर्ति कही जाती। आज की नई पीढियां बस ये जानती हैं की पा लो और न मिले तो उसे मिटा दो।यह तो सिर्फ स्वार्थ है। और जहां स्वार्थ है वहां प्रेम कहां।जहां विश्वास है वहां दूर होते हुए भी रिश्ते मजबूत होते हैं बस पूर्ण विश्वास की जो की आज के समय आवश्यकता में है ही नही। सोनम सिंह चौहान View Text Picture Stickers Draw Mode 79% 13.04 8 LFalllalll KBJs 1 9 C Save Layer Lines Undo Redo प्रेम क्या है लोग यही समझते है कि सब कुछ पा लेना ही प्रेम है। परंतु प्रेम तो एक ऐसा बंधन है जिसमे बंधने के लिए व्यक्ति को किसी और की सहायता की आवश्यकता नहीं होती।आज के समय में प्रेम शब्द है एक अहसास नही अगर अहसास होता तो लोगों को एक दूसरे की आवश्यकता महसूस होती।हम किसी से जब प्रेम करते है तो उसकी हर बात अच्छी लगती है वो गलत होते हुए भी सही लगता है।पर सच तो यह है की यह सिर्फ एक महत्वाकांक्षा है।क्यूंकि प्रेम तो हर गलती से दूर रखना चाहता है। प्रेम का महत्व तो सिर्फ एक मां बाप समझता है जोये चाहता है की उसकी संतान में कोई अवगुण न हो वह अच्छे मार्ग पर चलकर अपने भविष्य का निर्माण करे। प्रेम तो राधा ने भी कृष्ण से किया था पर कोई महत्वाकांक्षा को लेकर नहीं अगर ऐसा होता तो वो भी कृष्ण से विवाह करने की जिद करती।और गर्व करती कृष्ण की पत्नी होने का और प्रेम विवाह का। परंतु क्या उनकी पूजा होती या वो त्याग की मूर्ति कही जाती। आज की नई पीढियां बस ये जानती हैं की पा लो और न मिले तो उसे मिटा दो।यह तो सिर्फ स्वार्थ है। और जहां स्वार्थ है वहां प्रेम कहां।जहां विश्वास है वहां दूर होते हुए भी रिश्ते मजबूत होते हैं बस पूर्ण विश्वास की जो की आज के समय आवश्यकता में है ही नही। सोनम सिंह चौहान View Text Picture Stickers Draw Mode - ShareChat