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जो लड़ सका वही तो महान है" महिलाओं की शिक्षा के अधिकार के लिए कीचड़, पत्थर और अपमान सहते हुए 18 विद्यालयों की स्थापना करने वाली भारत की प्रथम महिला शिक्षिका क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती आज देशभर में श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है माता साबित्रीबाई फूले का जीवन केवल एक शिक्षिका का नहीं, बल्कि भारत में ब्राह्मणवादी, जातिवादी और दकियानूसी पितृसत्तात्मक वर्चस्व के खिलाफ खड़े ऐतिहासिक प्रतिरोध का प्रतीक है! #jaibhim
jaibhim - follow@ jaybhim] महानायिका सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म  के लिये उन्होंने काम किया। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़ गोबर, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साडी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं। follow@ jaybhim] महानायिका सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म  के लिये उन्होंने काम किया। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़ गोबर, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साडी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं। - ShareChat

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