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✍️ साहित्य एवं शायरी - aaa जब वक़्त बदलता है तो सब कुछ बदल कर रख देता है। जिन कपड़ों पर अंग्रेज़ों को अभिमान था, आज वही कपड़ बैंड-बाजे वाले पहनते हैं। में राजाओं और बादशाहों की हुंकार गूंजा करती थी, তিন महलों जहाँ रानियों और बेगमों की हँसी की आवाज़ें भरती थीं अब वहाँ चमगादड़ बसेरा करते हैं। जिन हवेलियों में कभी भीड हुआ करती थी, आज वे सूनी पड़ी हैं इंसानों को तरसती हैं। और बावडियाँ जो ತಗೆ लोगों की प्यास बुझाकर खुद को अमृत सागर समझती थीं भरकर विलुप्त हो गई हैं। अब वे कूड़े कचरे वक़्त किसी को नहीं छोड़ता वह सबका हिसाब करता है बस वक़्त को थोड़ा वक़्त लगता है और जैसा श्रीकृष्ण जी ने कहा था किए  चिंता मत " कर्म जाः फल की कर क्योंकि वक़्त सबको न्याय खद करता है aaa जब वक़्त बदलता है तो सब कुछ बदल कर रख देता है। जिन कपड़ों पर अंग्रेज़ों को अभिमान था, आज वही कपड़ बैंड-बाजे वाले पहनते हैं। में राजाओं और बादशाहों की हुंकार गूंजा करती थी, তিন महलों जहाँ रानियों और बेगमों की हँसी की आवाज़ें भरती थीं अब वहाँ चमगादड़ बसेरा करते हैं। जिन हवेलियों में कभी भीड हुआ करती थी, आज वे सूनी पड़ी हैं इंसानों को तरसती हैं। और बावडियाँ जो ತಗೆ लोगों की प्यास बुझाकर खुद को अमृत सागर समझती थीं भरकर विलुप्त हो गई हैं। अब वे कूड़े कचरे वक़्त किसी को नहीं छोड़ता वह सबका हिसाब करता है बस वक़्त को थोड़ा वक़्त लगता है और जैसा श्रीकृष्ण जी ने कहा था किए  चिंता मत " कर्म जाः फल की कर क्योंकि वक़्त सबको न्याय खद करता है - ShareChat

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