'अना' (मैं, अहंकार) का बोझ कभी
जिस्म से उतार के देख ,
मुझे ज़बान से नहीं रूह से पुकार के देख ,
ना पूछ मुझसे तेरे 'क़ुर्ब' (नजदिकी)का नशा क्या है तू अपनी आँख के डोरे में मेरी ख़ुमार को देख।
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से #😘बस तुम और मैं #सिर्फ तुम #🌙 गुड नाईट

