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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #😇 चाणक्य नीति #💔दर्द भरी कहानियां
✍मेरे पसंदीदा लेखक - हासिल हुआ न कुछ भी ईमान बेचकर, गुमनाम हो गया हूँ मैं पहचान बेचकर। अपना कभी भी शहर ने समझा नहीं मुझे, रोया बहुत हूँ गाँव का मकान बेचकर। मुट्ठी में रह गई हैं बस तस्वीरें धूल की, लौटा हूँ चैन, सुकून, इत्मीनान बेचकर। महफ़िल में ऊँचे लोगों की झुकता रहा ये सर, रोती रही है रूह अपनी शान बेचकर। पूछता है आइना भी रोज़ ये सवाल, gsT कब तक जियोगे अपनी ये मुस्कान बेचकर? "नूरैन" सस्ते सौदों ने सब छीन लिया मेरा, ख़ुद को ही खो दिया है ये जहान बेचकर। हासिल हुआ न कुछ भी ईमान बेचकर, गुमनाम हो गया हूँ मैं पहचान बेचकर। अपना कभी भी शहर ने समझा नहीं मुझे, रोया बहुत हूँ गाँव का मकान बेचकर। मुट्ठी में रह गई हैं बस तस्वीरें धूल की, लौटा हूँ चैन, सुकून, इत्मीनान बेचकर। महफ़िल में ऊँचे लोगों की झुकता रहा ये सर, रोती रही है रूह अपनी शान बेचकर। पूछता है आइना भी रोज़ ये सवाल, gsT कब तक जियोगे अपनी ये मुस्कान बेचकर? "नूरैन" सस्ते सौदों ने सब छीन लिया मेरा, ख़ुद को ही खो दिया है ये जहान बेचकर। - ShareChat

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