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#mashallah subhanallah
mashallah subhanallah - 786/ 92 मेरी माँ ओ मेरी माँ! मेरी माँ ओ प्यारी माँ! सूनी सूनी डगर उजड़ा उजड़ा चमन. बिन तेरे ये न महकेगा मुश्क ए ख़ुतन टूट कर जैसे गिर जाएगा ये गगन मेरी माँ ! तू है जन्नत में मस्त ओ-्मगन कैसे तुझ को कहूँ, फिर से आ जा यहाँ सब्र करता तो हूँ॰ सब्र आता नहीं सामने तेरी सूरत कोई लाता नहीं तेरा पैग़ाम अब कोई लाता नहीं दर्द एन्दिल हाए रे मेरा जाता नहीं किस को अपनी हम दास्ताँ सुनाएँगे मेरे वालिद का ता्देर साया रहे उन की चश्म ओ इनायत का दरिया बहे उन की मेहनत मशक़्क़त से हम हैं पले दिल से ख़िदमत करें उन की अब बिन कहे उन की ख़िदमत का वांदा लिया तू ने हाँ मेरी माँ ! तेरी ममता पे कुर्बान मैं भूल जाऊँ न मौला का फ़रमान मैं याद कर कर के हो जाऊँ हैरान मैं पढ पढ़ के बख़्शेंगा कुरआन तुझ को तेरा बेटा सिद्दीक़ और तू उस की माँ Saheb raza 472 786/ 92 मेरी माँ ओ मेरी माँ! मेरी माँ ओ प्यारी माँ! सूनी सूनी डगर उजड़ा उजड़ा चमन. बिन तेरे ये न महकेगा मुश्क ए ख़ुतन टूट कर जैसे गिर जाएगा ये गगन मेरी माँ ! तू है जन्नत में मस्त ओ-्मगन कैसे तुझ को कहूँ, फिर से आ जा यहाँ सब्र करता तो हूँ॰ सब्र आता नहीं सामने तेरी सूरत कोई लाता नहीं तेरा पैग़ाम अब कोई लाता नहीं दर्द एन्दिल हाए रे मेरा जाता नहीं किस को अपनी हम दास्ताँ सुनाएँगे मेरे वालिद का ता्देर साया रहे उन की चश्म ओ इनायत का दरिया बहे उन की मेहनत मशक़्क़त से हम हैं पले दिल से ख़िदमत करें उन की अब बिन कहे उन की ख़िदमत का वांदा लिया तू ने हाँ मेरी माँ ! तेरी ममता पे कुर्बान मैं भूल जाऊँ न मौला का फ़रमान मैं याद कर कर के हो जाऊँ हैरान मैं पढ पढ़ के बख़्शेंगा कुरआन तुझ को तेरा बेटा सिद्दीक़ और तू उस की माँ Saheb raza 472 - ShareChat

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