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मेरी डायरी ✍️ - कभी मासूमियत इतनी थी, कि "हर चीज़" पर भरोसा था.! "तजुर्बा" इतना है, अब कि " सच्चाई" पर भी यक़ीन नहीं होता. ! Rupesh KumarBansod कभी मासूमियत इतनी थी, कि "हर चीज़" पर भरोसा था.! "तजुर्बा" इतना है, अब कि " सच्चाई" पर भी यक़ीन नहीं होता. ! Rupesh KumarBansod - ShareChat

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