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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - बेरोजगार युवा खोल कर देखा बटुआ एक दिन बेबसी की झलक मिलीं ख़ाली वह भी था ख़ाली मैं भी था न दर्द उसका कम था न दर्द मेरा कम था वह भी सोचता होगा किस बदनसीब के पाले में हूं मज़ाक बनके रह गया हूं मैं बेरोजगार युवा हूं आज fis बेरोजगार युवा खोल कर देखा बटुआ एक दिन बेबसी की झलक मिलीं ख़ाली वह भी था ख़ाली मैं भी था न दर्द उसका कम था न दर्द मेरा कम था वह भी सोचता होगा किस बदनसीब के पाले में हूं मज़ाक बनके रह गया हूं मैं बेरोजगार युवा हूं आज fis - ShareChat

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