धर्म-कर्म - कबीर अमृतवाणी पटने कब जी कबीर , दुख में सुमिरन सब करें , सुख में करे ना कोय । जो सुख में सुमिरन करें , तो दुख काहे को होय । । । कबीर , सुख में सुमिरन किया नहीं , दुख में किया याद । कह कबीर ता दास की , कौन सुने फरियाद । । । अधिक जानकारी के लिए पवित्र पुस्तक जीने की राह निःशुल्क प्राप्त करें । | अपना नाम , पूरा पता , मोबाइल नंबर हमें Whatsapp करें 7496801825 SPIRITUAL LEADER SAINT RAMPAL JI @ SAINTRAMPALJIM A SANT RAMPAL JI A THE SUPREMEGOD . ORG MAHARAJ - ShareChat
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8 महीने पहले
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