*कर्ण कृष्ण संवाद* _________________________________ ✒ *पहली बात,* *महाभारत में* *कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछी.* मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक अवैध बच्चे के रूप में हुआ? ✒ *दूसरी बात* .. दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से मना कर दिया था क्योंकि वो मुझे क्षत्रीय नहीं मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था. ✒ *तीसरी बात* ... द्रौपदी के स्वयंवर में मुझे अपमानित किया गया, क्योंकि मुझे किसी राजघराने का कुलीन व्यक्ति नहीं समझा गया. ✒ *श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते* *हुए कर्ण को बोले, सुनो...* हे कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था. ▪ मेरे पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी. ▪ जिस रात मेरा जन्म हुआ, उसी रात मुझे माता-पिता से अलग होना पड़ा. ▪ मैने गायों को चराया और गायों के गोबर को अपने हाथों से उठाया. ▪ जब मैं चल भी नहीं पाता था, तब मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए. ▪ मेरे पास कोई सेना नहीं थी, कोई शिक्षा नहीं थी, कोई गुरुकुल नहीं था, कोई महल नहीं था, फिर भी मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा. ▪ बड़ा होने पर मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला. ▪ मुझे बहुत से विवाह, राजनैतिक कारणों से या उन स्त्रियों से करने पड़े, जिन्हें मैंने राक्षसों से छुड़ाया था. ▪ जरासंध के प्रकोप के कारण, मुझे अपने परिवार को यमुना से ले जाकर सुदूर प्रान्त, समुद्र के किनारे द्वारका में बसना पड़ा. ✒ *हे कर्ण...* धरती पर किसी का भी जीवन चुनौतियों से रहित नहीं है. सबके जीवन में सब कुछ ठीक नहीं होता. ▪ सत्य क्या है और उचित क्या है? ये हम अपनी आत्मा की आवाज़ से स्वयं निर्धारित करते हैं. ▪ इस बात से *कोई फर्क नहीं पड़ता,* कितनी बार हमारे साथ अन्याय होता है. ▪ इस बात से *कोई फर्क नहीं पड़ता,* कितनी बार हमारा अपमान होता है. ▪ इस बात से भी *कोई फर्क नहीं पड़ता,* कितनी बार हमारे अधिकारों का हनन होता है. ✒ *फ़र्क़ तो सिर्फ इस बात से पड़ता है* *कि हम उन सबका सामना किस प्रकार कर्मज्ञान के साथ करते हैं.* ✒ *कर्मज्ञान है तो ज़िन्दगी हर पल मौज़ है,* *वरना समस्या तो सभी के साथ रोज है.* 🌹🌹🙏🙏🙏🙏
धर्म-कर्म - ShareChat
135 views
6 months ago
Share on other apps
Facebook
WhatsApp
Copy Link
Delete
Embed
I want to report this post because this post is...
Embed Post