om jai Shri Krishna
bhagwatgeeta - श्लोक 2 अध्याय 2 : सांख्ययोग इलाक श्रीभगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् । अनार्यजुष्टमस्वयंमकीर्तिकरमर्जुन । भावार्थ श्रीभगवान बोले - हे अर्जुन ! तुझे इस असमय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ ? क्योंकि न तो यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरित है , न स्वर्ग को देने वाला है और न कीर्ति को करने वाला ही है । - ShareChat
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8 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾਂ
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