#एशियानेट से चंद्रयान पर सवाल
एशियानेट से चंद्रयान पर सवाल - * * * * * * विक्रम की व्यथा * * * * * इतनी आशाओं , उम्मीदों का बोझ था , पांव तो उसका भी लडखडाया होगा । जब संपर्क टूटा उसका पृथ्वी से , स्वयं को कितना अकेला पाया होगा । दूर क्षितिज पर जब दिखी होगी धरती , गला तो उसका भी रुंध आया होगा । धम्म कर जब गिरा , विजयोल्लास में - बिखर गया होगा , संभाल न पाया होगा । अंत समय मे जब भटका वो पथ से , नन्हे बालक जैसा वो घबराया होगा । गिर कर टूट गया होगा , पर फिर भी अशोक चक्र तो रज पर सजाया होगा । - ShareChat
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2 महीने पहले
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