झूलें हिंडोरें सांवरो,वाकी शोभा वरनी न जाय ललना।। यमुना तीर सुभग कुंजन में रच्योहे हिंडोरो आय ललना।।१।। कंचन के द्वै खंभ विराजत, डांडी चार सुहाय ललना।। चोकी खचित हैं पांच पिराजा,हीरा रतन जराय ललना।।२।। पटुली हेम जड़ाव की, जोरी लाल बनाय ललना।। दादुर मोर पपैया बोले,थोरी थोरी बूंद सुहाय ललना।।३।। गृह गृहतें सब सुंदरी,चली देखन नंदलाल हो ललना।। निरख निरख मुख देत झोटका, पुष्पन वृष्टि कराय ललना।।४।। आरती करत जसोदा मैया,मोतिन चौक पुराय ललना।। चतुर्भुज प्रभु गिरिधरनलाल को, श्रीराधा झूलावन आय ललना।।५।।
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24 दिन पहले
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