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#geeta gyan #भागवत गीता
geeta gyan - हे अफन श्रीमद्भागवत गीता अनाश्रितः कर्मफलम कार्यम कर्म करोति यः सः संन्यासी च योगी न निरग्निर्ना चाक्रियाः श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, जो मनुष्य बिना किये हुए  कर्मफल की इच्छा कर्म करता है तथा अपना दायित्व मानकर सत्कर्म करता है वही मनुष्य योगी है। जो सत्कर्म नहीं करता वह संत कहलाने योग्य नहीं है। हे अफन श्रीमद्भागवत गीता अनाश्रितः कर्मफलम कार्यम कर्म करोति यः सः संन्यासी च योगी न निरग्निर्ना चाक्रियाः श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, जो मनुष्य बिना किये हुए  कर्मफल की इच्छा कर्म करता है तथा अपना दायित्व मानकर सत्कर्म करता है वही मनुष्य योगी है। जो सत्कर्म नहीं करता वह संत कहलाने योग्य नहीं है। - ShareChat

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