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#मां दुर्गा #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏शाम की आरती🪔
मां दुर्गा - AYAc ೧೩ g గా कठोरज्याटणत्कारबधिरीकृदिक्तटम् ततो देवीशरीरात्तु निर्गतास्तीव्रशक्तयः # ९४ T। कालिका तारिणी बाला त्रिपुरा भैरवी रमा बगला चैव मातंगी तथा त्रिपुरसुन्दरी II ५५ कामाक्षी तुलजा देवी जंभिनी मोहिनी तथा তুমব্চালী छिन्नमस्ता 1 Devi Bhagavatam (7.28.54-56) दशसाहस्त्रबाहुका ।। ५६ 1 यहाँ लीला और भी रहस्यमयी हो जाती है। देवी भागवत में RR ரி$ से अनेकों शक्तियाँ प्रकट होती हैं, जिनमें त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) भी हैं। सिद्ध  होता है कि दुर्गा और ललिता परस्पर उत्पन्न करने वाली नहीं इससे हैं, बल्कि वे एक ही सर्वव्यापी चेतना के विभिन्न पहलू हैं। जिस प्रकार ఢగ కైౌ` भी एक ही हैं अग्नि से उष्णता और प्रकाश अलग-अलग दिखाई  उसी प्रकार यह सभी रूप आदिशक्ति के ही स्वरूप हैं। Here the Lila becomes even more mysterious In the Devi Bhagavatam; from the body of Durga emerge numerous Shaktis including Tripurasundari (Lalita) This proves that Durga and Lalita are not sequentially created from one another but are interdependent aspects of the same all- pervadins consciousness. Just as heat and lisht are inseparable from fire so are these forms inseparable from Adishakti. AYAc ೧೩ g గా कठोरज्याटणत्कारबधिरीकृदिक्तटम् ततो देवीशरीरात्तु निर्गतास्तीव्रशक्तयः # ९४ T। कालिका तारिणी बाला त्रिपुरा भैरवी रमा बगला चैव मातंगी तथा त्रिपुरसुन्दरी II ५५ कामाक्षी तुलजा देवी जंभिनी मोहिनी तथा তুমব্চালী छिन्नमस्ता 1 Devi Bhagavatam (7.28.54-56) दशसाहस्त्रबाहुका ।। ५६ 1 यहाँ लीला और भी रहस्यमयी हो जाती है। देवी भागवत में RR ரி$ से अनेकों शक्तियाँ प्रकट होती हैं, जिनमें त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) भी हैं। सिद्ध  होता है कि दुर्गा और ललिता परस्पर उत्पन्न करने वाली नहीं इससे हैं, बल्कि वे एक ही सर्वव्यापी चेतना के विभिन्न पहलू हैं। जिस प्रकार ఢగ కైౌ` भी एक ही हैं अग्नि से उष्णता और प्रकाश अलग-अलग दिखाई  उसी प्रकार यह सभी रूप आदिशक्ति के ही स्वरूप हैं। Here the Lila becomes even more mysterious In the Devi Bhagavatam; from the body of Durga emerge numerous Shaktis including Tripurasundari (Lalita) This proves that Durga and Lalita are not sequentially created from one another but are interdependent aspects of the same all- pervadins consciousness. Just as heat and lisht are inseparable from fire so are these forms inseparable from Adishakti. - ShareChat

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