om jai Shri Krishna
bhagwatgeeta - श्लोक 1 अध्याय 15 : पुरुषोत्तमयोग और यज्ञादि कर्मों द्वारा इस संसार वृक्ष की रक्षा और वृद्धि करने वाले एवं शोभा को बढ़ाने वाले होने से वेद ' पत्ते ' कहे गए हैं ) कहे गए हैं , उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूलसहित सत्त्व से जानता है , वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है । ( भगवान् की योगमाया से उत्पन्न हुआ संसार क्षणभंगुर , नाशवान और दुःखरूप है , इसके चिन्तन को त्याग कर केवल परमेश्वर ही नित्य - निरन्तर , अनन्य प्रेम से चिन्तन करना ' वेद के तात्पर्य को जानना है ) ॥ 1 ॥ - ShareChat
93 ਨੇ ਵੇਖਿਆ
5 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾਂ
ਬਾਕੀ ਐਪਸ ਤੇ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰੋ
Facebook
WhatsApp
ਲਿੰਕ ਕਾਪੀ ਕਰੋ
ਰੱਦ ਕਰੋ
Embed
ਮੈਂ ਇਸ ਪੋਸਟ ਦੀ ਸ਼ਿਕਾਯਤ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿਓਂਕਿ ਇਹ ਪੋਸਟ...
Embed Post