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#👬दोस्ती-यारी #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #🌙रात की शायरी✍ #🌸 सत्य वचन #🌙 गुड नाईट
👬दोस्ती-यारी - ना मेरी नियत बुरी थी॰ना उसमे कोई थी, बुराई तेरी जुदाई का सब मुक़दर का खेल शिकवा करूतो थ बस किस्मत में किससे करू॰ जुदाई थी यहाँ तो हर कोई !!! ೧ವ भी मुझे तेरा अब समझता है ..!!! ना मेरी नियत बुरी थी॰ना उसमे कोई थी, बुराई तेरी जुदाई का सब मुक़दर का खेल शिकवा करूतो थ बस किस्मत में किससे करू॰ जुदाई थी यहाँ तो हर कोई !!! ೧ವ भी मुझे तेरा अब समझता है ..!!! - ShareChat

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