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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - आधियों में समझ आई पलकों की कीमत , आंखों को गुरूर था हमें सब दिखता है .! आधियों में समझ आई पलकों की कीमत , आंखों को गुरूर था हमें सब दिखता है .! - ShareChat

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