ShareChat
click to see wallet page
#lik+like-------100k #sharechat #followme
lik+like-------100k - पहले लगता था पापा क्यों हर बार "ना" कहते हैं. क्यों हर चीज़ का हिसाब रखते हैं, क्यों हमारी माँगों पर मुस्कुरा कर टाल देते हैं। अब समझ आता है वो ना' पैसे की नहीं, हालात की थी. वो मुस्कुराहट मजबूरी नहीं, संयम थी. थकान नहीं, जिम्मेदारी थी। और वो खामोशी ~  वो खुद टूटी घड़ी पहन लेते थे, ताकि हमारे पास वक्त सही चले। शर्ट पहनते थे, वो खुद पुरानी ताकि हम नए सपने पहन सकें। अब जब तनख्वाह आती है और महीने के आख़िर में कुछ बचता नहीं तो समझ आता है पापा अमीर नहीं थे, पर सबसे बड़े दिलवाले थे। धीरे धीरे पता चल रहा है. "पापा सिर्फ़ कमाने वाले नहीं थे, वो चुपचाप हमें जीना सिखा रहे थे।" पहले लगता था पापा क्यों हर बार "ना" कहते हैं. क्यों हर चीज़ का हिसाब रखते हैं, क्यों हमारी माँगों पर मुस्कुरा कर टाल देते हैं। अब समझ आता है वो ना' पैसे की नहीं, हालात की थी. वो मुस्कुराहट मजबूरी नहीं, संयम थी. थकान नहीं, जिम्मेदारी थी। और वो खामोशी ~  वो खुद टूटी घड़ी पहन लेते थे, ताकि हमारे पास वक्त सही चले। शर्ट पहनते थे, वो खुद पुरानी ताकि हम नए सपने पहन सकें। अब जब तनख्वाह आती है और महीने के आख़िर में कुछ बचता नहीं तो समझ आता है पापा अमीर नहीं थे, पर सबसे बड़े दिलवाले थे। धीरे धीरे पता चल रहा है. "पापा सिर्फ़ कमाने वाले नहीं थे, वो चुपचाप हमें जीना सिखा रहे थे।" - ShareChat

More like this